देखिये, मैं इस बकवास को दिखाता हूँ। पिछले साल का अखबार लाता हूँ। वह दौड़ते हुए घर गया। पिछले साल का अखबार लाकर दिखाते हुए कहा, मिलाइए मुखियाजी अक्षरशह शब्द मिल रहे हैं कि नहीं। पिछले साल क्या हुआ था?

मुखिया जी के चौपाल पर आज गहमागहमी था। दर्जनों लोग अखबार पर नजर गड़ाये थे। मुखिया जी अखबार में छपी खबर का विश्लेषण एक सधे आलोचक के समान कर रहे थें। शीर्षक था, बाढ़ की तैयारी पूरी कर ली गयी है। इस खबर में संलिष्ट अभिधा शक्ति, लक्षणा शक्ति और व्यंजना शक्ति पर बार-बार अवलोकन किया जा रहा था। अंत में ग्रामीण अपने स्वभानुकूल अभिधा शक्ति से आश्वस्त हुए। मुखिया जी ने कहा, हमारी सरकार काम के प्रति कितना तत्पर है। पूरी तरह मुस्तैद है। बाढ़ के लिए कमर कसकर तैयार हो गयी है। अप्रैल आयी कि नहीं नहीं, बाढ़ की सारी तैयारी कर ली गयी है।
मुखिया जी झूठ बोलते हैं –वीडियो में देखें – https://youtu.be/KirRlRwQvTM
देखों, क्या लिखा है-बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के प्रखंडों में नावें गिरा दी गयी है। गोदामों में अनाज सैंत दिया गया है। टेंट के लिए प्रत्येक प्रखंड में हजारों -हजार पोलीथीन भिजवा दिया गया है। यहां तक कि बाढ़ पीड़ितों को सोने के लिए सैकड़ों खाटें पहुँचा दी गयी है। लोगों का बना-बनाया खाना मिले इसके लिए प्रत्येक प्रखंड में सैकड़ों हलवाई दमकल व्यवस्था की तरह चौबीस घंटे प्रखंड मुख्यालय पर मुश्तैद रहेंगे। पानी के लिए सैकड़ों टैंकर उपलब्ध करा दिए गये है। जिला से प्रखंड तक के सभी अधिकारियों की छुट्टी रद्द कर दी गयी है।
मुखिया जी कहिन –https://youtu.be/UaJaPF6AYck

सिविल सर्जन एवं चिकित्सकों की टीम मुख्यालयों पर चौबीस घंटे रहेंगे। अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी कर दिये गए हैं। यदि बाढ़ पीड़ितों की सेवा में थोड़ी भी कोताही बरती गई तो हाकिमों के चलता कर दिया गया। गाँव के सभी तटबंधों की मरम्मती का काम मई महीने के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा। खबर पढ़कर ग्रामीण सुनहले सपनों में खोने लगे थें। जैसा थका आदमी बादल भरी हवाओं में झपकी लेने लगता हो। सभी उन दृश्यों को देखने को लालायित हो रहे थें। क्या शिविर होगा! क्या खाट होगी! बना-बनाया भोजन होगा! पीने को मीठा पानी होगा! नौका विहार का आनंद लिया जाएगा! ठंडी -ठंडी हवाएँ होगी! सरकारी सुख का आनंद लिया जायगा। लोगों को लग रहा था कि कितनी जल्दी बाढ़ आयें और इन सबके आनंद उठायेगें। बाढ़ के बाद कोटे से मुफ्त अनाज, और उपर से नकद हजार-हजार। धन्य हो लोकतंत्र! तुम दीर्घजीवी बने रहो।
मुखिया जी कहिन 2 – https://youtu.be/HRcskF5CDMI

हम सब तुम्हें दीर्घजीवी बनाये रखेंगे। एक आदमी को मुखियाजी से विचारों का तफरका था। पियोर यथार्थवादी आदमी का मुश्किल यह है कि जब तक वह अपनी आंखों से देख नहीं लेता, विश्वास ही नहीं करता है। विफरते हुए उसने कहा, यह सब बकवास है। यह सब कुछ नहीं होने वाला है। देखिये, मैं इस बकवास को दिखाता हूँ। पिछले साल का अखबार लाता हूँ। वह दौड़ते हुए घर गया। पिछले साल का अखबार लाकर दिखाते हुए कहा, मिलाइए मुखियाजी अक्षरशह शब्द मिल रहे हैं कि नहीं। पिछले साल क्या हुआ था? आप भूल गये? हमें तो एक-एक बात याद है। कोई इंतजाम नहीं था। पूरा गाँव, लड़के-बच्चे समेत बरसते पानी में ढ़ेले के समान बिलबिला रहें थें। औरतें जाड़ो से कापती रही थीं। सिर छिपाने की व्यवस्था नहीं थी। तीन दिनों तक बिना पेट में अन्न डालें सभी पड़े रहे थें। कोई सरकारी पूत दर्शन करने नहीं आया था। तीन दिनों बाद एक सूट-बूटवाला आदमी यह कहकर चला गया था कि पकवानों से भरा ट्रक प्रखंड के मैदान में फंसा पड़ा है। दूसरे दिन एक आया तो कहा था- अब हेलिकॉप्टर से खाना गिराया जायगा। फिर तीन दिन तक आकाश देखते रह गये थें। बाढ़ का पानी पी-पीकर गुजारा किया था। न नाव, न अनाज, न भोजन, न मोमबती, न दियासलाई, न नमक। फिर हल्ला हुआ था बीडीओ साहब नाव से गाँव की ओर आ रहे थे। नाव ही डूब गयी। हाकिम-हुक्काम उन्हीं को खोजने में लग गये थें। कहाँ-कहाँ से गोताखोरो को बुलाया गया था। मंत्री आ रहे थें। संतरी आ रहे थें। सभी बीडीओ के परिवार को सांत्वना देकर वही से वापस लौट गये थें। किसी ने हमलोगों की ओर भी ताका था? कोई भी व्यक्ति कलक्टर साहब के कान में बाढ़ प्रभावित लोगों के बारे में कहता, तो वे बिगड़ कर बम हो जाते थें। गरजकर कहते थें, मेरा एक आदमी बाढ़ में डूब गया है। वह भी सरकारी अफसर। वह भी सरकारी काम में डूब गया है। जाकर उनके बीबी-बच्चों को देखों। रो- रोकर बेहाल हो रहे है। तुम्हें बाढ़ प्रभावित लोगों की सूझ रही है। भगवान करें बीडीओ मिल जाय। तीन दिनों के बाद बीडीओ पेड़ पर चढ़े मिले थें। पानी से उन्हें सर्दी लग गयी थी। बुखार चढ़ आया था। जल्दी-जल्दी एम्बुलेंस लाया गया था। अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सुबह अखबार में खबर छपी थी, बीडीओ मरणासन्न अवस्था में पाये गये। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहाँ वे जीवन और मौत से जूझ रहे हैं। पानी उतर गया था। लोग घर को वापस लौटने लगे थें। कानों -कान खबर उड़ने लगी थी। प्रखंड में बाढ़ के लिए दो करोड़ की राशि आयी थी।
राजेश्वर प्रसाद