नई दिल्ली — राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (DSIIDC), राज्य वेटलैंड प्राधिकरण (DSWLA) और जिलाधिकारी (पश्चिम) को गांव मुंडका स्थित पांच जलाशयों से अतिक्रमण हटाने और उनके पुनर्जीवन के लिए तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

मामला: O.A. No. 311/2022 (डॉ. जीत सिंह यादव बनाम दिल्ली सरकार एवं अन्य) ट्रिब्यूनल ने पिछले कई वर्षों से लंबित डिमार्केशन और अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही पर गंभीर असंतोष व्यक्त किया, जबकि सर्वोच्च न्यायालय और एनजीटी के स्पष्ट आदेश पहले से मौजूद हैं। मामला: O.A. No. 311/2022 (डॉ. जीत सिंह यादव बनाम दिल्ली सरकार एवं अन्य)
ट्रिब्यूनल ने पिछले कई वर्षों से लंबित डिमार्केशन और अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही पर गंभीर असंतोष व्यक्त किया, जबकि सर्वोच्च न्यायालय और एनजीटी के स्पष्ट आदेश पहले से मौजूद हैं।
NGT के प्रमुख निर्देश:
DDA और जिलाधिकारी (पश्चिम) को आदेश दिया गया है कि वे 15 दिनों के भीतर सभी तालाबों (खसरा नं. 178/1, 373/1, 142, 163 और 17/27) का डिमार्केशन पूरा करें तथा अतिक्रमण का पूरा विवरण, अतिक्रमणकारियों के नाम, पते,कब्जे का क्षेत्र
प्रस्तुत करें। DDA को 6 सप्ताह में एक्शन प्लान दाखिल करना होगा, जिसमें शामिल होगा—पुनर्जीवन के उपाय,बजट,कार्य आवंटन,समय-सीमा जिम्मेदार नोडल अधिकारी

DSIIDC को खसरा नं. 17/27 के जलाशय के पुनर्जीवन हेतु स्पष्ट और पठनीय एक्शन प्लान दाखिल करने का निर्देश। राज्य वेटलैंड प्राधिकरण (DSWLA) को 6 सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करनी होगी, जिसमें यह भी बताया जाए—डिमार्केशन की स्थिति,विभिन्न एजेंसियों की लापरवाही पर क्या कार्रवाई की गई,वेटलैंड नियम, 2017 के पालन की वास्तविक स्थिति,निर्देशों का पालन न होने पर, एनजीटी ने स्पष्ट किया कि—भारी लागत लगाई जा सकती है. वरिष्ठ अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ेगा. अगली सुनवाई की तिथि 15 जनवरी 2026 निर्धारित की गई है।
