बागी चम्बल में होते हैं और डकैत संसद में, यह एक वाक्य आपको चम्बल से अवगत करा दिया है।

भारत के आजादी के लिए सबसे ज्यादा स्वतंत्रता सेनानी, आजादी के सबसे ज्यादा मतवाले , पंडित राम प्रसाद बिस्मिल , लाल सेना और लाल सेना के संस्थापक कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया, भगवान परशुराम , लक्ष्मीबाई , अटल बिहारी बाजपाई , वर्तमान सरकार के पूर्व कृषि मंत्री यह सब देश के लिए चम्बल की देन है पर यक्ष सवाल है कि देश नें चम्बल को क्या दिया? लोकप्रिय धारणा में चम्बल को “शापित” या “अपवित्र” माना जाता है पर वास्तव में चम्बल का योगदान हमारे लिए बहुत बड़ा और बहुआयामी है।
चम्बल को जानना है तो यह विडिओ देखें – https://youtu.be/bg-OJmE3t8o?si=DfD9ewpA0UGkCQ11
गांधी सागर, राणा प्रताप सागर और जवाहर सागर जैसे बड़े- बड़े बाँध, लाखों एकड़ सतही सिंचाई भूमि, करोड़ों यूनिट सतत बिजली का उत्पादन, दुनिया के सबसे बड़े घड़ियाल संरक्षण क्षेत्र, भारत की सबसे स्वच्छ (प्रदूषण-मुक्त) प्रमुख नदियां, राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में घड़ियाल, मगरमच्छ, गंगा डॉल्फिन और सैकड़ों प्रजाति के पक्षी, महाभारत काल का शिव मंदिर, 1857 की क्रांति से लेकर आजादी तक कई क्रांतिवीरों को शरण स्थल यही तो चम्बल की पहचान है। राजस्थान चम्बल को अपनी “कामधेनु” कहता है। दुर्भाग्य से देश ने चंबल को बहुत कम दिया है और बहुत कुछ छीना भी है। हजारों साल से “खून की नदी”, “शापित नदी” की धारणा बनाई गई (राजा रंतिदेव के यज्ञ, द्रौपदी का श्राप आदि कथाओं के सहारे )। लोग इसे पूजते नहीं, नहाते नहीं, पीते नहीं — जबकि यह सबसे कम प्रदूषित नदियों में से एक है। भारत सरकार के गलत कृषि नीतियों, अत्यधिक चराई और मिट्टी संरक्षण की कमी से बीहड़ हर साल बढ़ते गए। पिछले 60-70 साल में हजारों हेक्टेयर उपजाऊ जमीन बंजर हो गई। 1950-80 के दशक में फूलन देवी, पान सिंह तोमर जैसे डाकुओं की वजह से पूरी दुनिया में “डकैतों की घाटी” कहलाया गया। असल समस्या गरीबी, जातिगत अन्याय और भूमि असमानता थी, लेकिन नदी और क्षेत्र को बदनाम किया गया। चंबल घाटी के अधिकांश गाँव आज भी मूलभूत सुविधाओं (पक्की सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा) से वंचित हैं। संक्षेप में कहें तो चंबल ने देश को पानी, बिजली, जैव-विविधता, इतिहास और सिनेमा तक दिया, लेकिन देश ने चंबल को श्राप, उपेक्षा, बदनामी और बीहड़ ही ज्यादा दिया। आज जरूरत है कि हम इसे “शापित” नहीं बल्कि “शक्तिशाली और जीवनदायिनी” के रूप में देखें और इसके संरक्षण, सफाई और विकास पर ध्यान दें। हम चंबल को उसका हक दिलाकर ही मानेंगे, बस आपका साथ चाहिए……
कृपया यह विडियो देखें – https://www.youtube.com/shorts/hgLdmoXQsyk
