पथ का हो बंटवारा, मंजिल को तुम मत बांटो । किरणों का कर लो बंटवारा, सूरज को तुम मत बांटो। सभी धर्मों की मंजिल एक है। उसे पाने के रास्ते अलग हो सकते हैं। ” मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना ” इकबाल साहब की लिखी इस लाइन का मर्म ही इस सवाल का जवाब है ।

यह यक्ष प्रश्न नहीं है कि जनता के लिए कांग्रेस सरकार अच्छी थी या बीजेपी सरकार अच्छी है? तुलना संभव नहीं है। कॉंग्रेस के पास आजादी के जंग और आजादी से लेकर 2014 तक का एक भारत सृजन का इतिहास है वहीं भाजपा के पास अटल के जैसा दुरदर्शता सोंच और मोदी की आक्रमकता की कहानी है ।मोदी ने भारत के लिए बीते समय में जो किया है, वह भुलाया नहीं जा सकता। वे राजनीति में टाइम पास के लिए नहीं बल्कि एक निश्चित मिशन के लिए हैं, इसलिए उनकी राजनीति में ब्रेक, इंटरवल और अवकाश नहीं होता .वे बेशक हार्ड टास्क मास्टर हैं, वे जितना आगे समय से खुद रहते हैं, उतना ही आगे देश को ले जाना चाहते हैं। तब भी कहूँगा कि मोदी भारत नहीं है, मोदी के पहले भी देश चल रहा था, मोदी नहीं होंगे तब भी देश चलेगा क्योंकि चल तो अफगानिस्तान और पाकिस्तान भी रहा है। इस भारत मे सब कुछ सम्भव है अपनी गलत नीतियों के कारण मैमुना बेगम जनतापार्टी से चुनाव हार गयीं लेकिन चार वर्ष बाद वही सम्पूर्ण बहुमत से वापिस आ गयीं । लोकसभा चुनाव में विपक्षी दल जब बीजेपी को अकेले दम पर बहुमत हासिल करने से रोकने में कामयाब रहे थे तो संभवतः सबसे ज़्यादा खुश कांग्रेस पार्टी हुई थी. साल 2014 के लोकसभा चुनावों में 44 और और 2019 के लोकसभा चुनावों 52 सीटों पर सिमटने वाली कांग्रेस को इस साल के लोकसभा चुनावों में 99 सीटों पर जीत मिलीं तो कई राजनीतिक विश्लेषकों और विशेषज्ञों ने इसे कांग्रेस की वापसी माना. कांग्रेस ने संविधान, आरक्षण, महंगाई और बेरोज़गारी जैसे मुद्दों को उठाकर लोकसभा चुनावों में बीजेपी और एनडीए को दबाव में लाने में बहुत हद तक कामयाबी हासिल कर ली थी. लेकिन लोकसभा चुनावों में बेहतर प्रदर्शन के बाद कांग्रेस एक बार फिर से राज्यों के लिए हो रहे विधानसभा चुनावों में बुरी हार का सामना कर रही है. जहाँ कांग्रेस के सहयोगी दल जीत रहे हैं, वहाँ भी कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा नहीं दिखा है.

