दम बिरयानी, फ्लेवर कैफे, श्री भोजनम जैसे मशहूर फूड कैफे अब नोएडा में भी अपना ब्रांच खोल चुके हैं: आशीष गुप्ता की विजनरी यात्रा का प्रतीक अब आपके शहर में भी ……

नोएडा, उत्तर प्रदेश का यह आधुनिक शहर अब फूड लवर्स के लिए एक स्वर्ग बनता जा रहा है। जहां पहले लोग दिल्ली या गुरुग्राम की ओर रुख करते थे, वहीं आज दम बिरयानी, फ्लेवर कैफे और श्री भोजनम जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड्स ने यहां अपनी शाखाएं खोल ली हैं। यह विकास केवल व्यावसायिक विस्तार नहीं, बल्कि एक बड़े विजन का हिस्सा है। इस विजन के पीछे हैं आशीष गुप्ता, जो वगमी वेंचर्स (Vagmi Ventures) और भगवान दास फाउंडेशन के मालिक भी हैं। उनका सपना है कि देश भर में, बल्कि विदेशों में भी उच्च गुणवत्ता वाले फूड कोर्ट्स का नेटवर्क फैलाया जाए, जो न केवल स्वादिष्ट भोजन उपलब्ध कराए बल्कि समुदाय को जोड़े, रोजगार पैदा करे और सस्टेनेबल बिजनेस मॉडल को बढ़ावा दे।

फूड इंडस्ट्री का बदलता परिदृश्य और नोएडा का उदयभारत में फूड और बेवरेज इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है। NCR region में नोएडा युवा पेशेवरों, IT प्रोफेशनल्स, फैमिलीज और स्टूडेंट्स का हब बन चुका है। यहां की तेज रफ्तार वाली जिंदगी में क्विक, हेल्दी और ऑथेंटिक फूड की डिमांड बढ़ी है। इसी को देखते हुए दम बिरयानी, फ्लेवर कैफे और श्री भोजनम जैसे ब्रांड्स ने नोएडा में एंट्री की। दम बिरयानी – यह नाम ही मुंह में पानी ला देता है। दम स्टाइल में पकाई गई बिरयानी, जहां मसालों की खुशबू हर कण में समाई होती है। मूल रूप से हैदराबादी या अवधी स्टाइल से प्रेरित, यह ब्रांड अब नोएडा के सेक्टर 63, 67 आदि इलाकों में उपलब्ध है। यहां चिकन, मटन, वेज और स्पेशल सीफूड वैरायटी मिलती है। नोएडा ब्रांच में लोकल टेस्ट को ध्यान में रखकर मेन्यू को कस्टमाइज किया गया है – कम तेल, ज्यादा फ्रेश इंग्रीडिएंट्स। ग्राहक फीडबैक के अनुसार, यहां की बिरयानी “दिल्ली वाली से बेहतर” बताई जा रही है। एक सैटिस्फाइंग प्लेट के साथ रायता, सलाद और मिर्ची का कॉम्बिनेशन इसे परफेक्ट बनाता है। फ्लेवर कैफे – कैजुअल डाइनिंग का प्रतीक। यहां कॉफी की महक, पास्ता की क्रंचीनेस, पिज्जा की चीजीनेस और इंडियन फ्यूजन डिशेज का मिश्रण मिलता है। नोएडा में खुली ब्रांच युवाओं और वर्किंग प्रोफेशनल्स को आकर्षित कर रही है। वाई-फाई, कम्फर्टेबल सीटिंग, लाइव म्यूजिक और थीम्ड इवेंट्स (जैसे कॉर्पोरेट मीटिंग्स या बर्थडे सेलिब्रेशन) इसे सिर्फ खाने की जगह नहीं बल्कि अनुभव का केंद्र बनाते हैं। फ्लेवर कैफे का फोकस हेल्दी ऑप्शन्स पर भी है – क्विनोआ बाउल्स, एवोकाडो टोस्ट, ग्लूटेन-फ्री आइटम्स। श्री भोजनम – साउथ इंडियन फ्लेवर्स का राजा। इडली, दोसा, वड़ा, सांभर, रसम और फिल्टर कॉफी की ऑथेंटिक टेस्ट। वाराणसी और अन्य जगहों पर मशहूर यह ब्रांड अब नोएडा में भी पहुंच गया है। शुद्ध शाकाहारी विकल्प, ताजा सामग्री और पारंपरिक रेसिपीज इसे फैमिली डाइनिंग के लिए आदर्श बनाती हैं। नोएडा ब्रांच में स्पेशल थाली सिस्टम है, जहां एक प्लेट में पूरा साउथ इंडियन अनुभव मिलता है। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सबको पसंद आने वाला यह ब्रांड हेल्थ कंसर्न वाले लोगों के लिए भी बेस्ट है।
ये ब्रांच खुलना महज संयोग नहीं। यह आशीष गुप्ता और उनकी टीम की स्ट्रैटेजी का नतीजा है।आशीष गुप्ता: विजनरी उद्यमी और कम्युनिटी बिल्डरआशीष गुप्ता एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें फूड इंडस्ट्री में “ड्रीमर एंटरप्रेन्योर” कहा जा सकता है। वगमी वेंचर्स के माध्यम से वे इन्वेस्टमेंट और बिजनेस डेवलपमेंट पर फोकस करते हैं, जबकि भगवान दास फाउंडेशन सोशल इम्पैक्ट और कम्युनिटी सर्विस पर काम करता है। दोनों को मिलाकर वे फूड कोर्ट्स को सिर्फ कमर्शियल वेंचर नहीं, बल्कि सोशल इकोसिस्टम का हिस्सा बना रहे हैं। आशीष का बैकग्राउंड बिजनेस और सोशल वर्क का मिश्रण है। वे मानते हैं कि “खाना सिर्फ पेट भरने की चीज नहीं, यह संस्कृति, भावनाएं और अर्थव्यवस्था जोड़ता है।” वगमी वेंचर्स (Vagmi Ventures) विभिन्न स्टार्टअप्स और फूड ब्रांड्स को फंडिंग, मेंटरशिप और ऑपरेशनल सपोर्ट प्रदान करता है। फूड कोर्ट डेवलपमेंट में वे मल्टी-ब्रांड मॉडल पर जोर देते हैं – जहां एक जगह पर कई पॉपुलर ब्रांड्स साथ आकर सिनर्जी क्रिएट करें। भगवान दास फाउंडेशन उनके परिवार या इंस्पिरेशन से जुड़ा लगता है, जो एजुकेशन, हेल्थ, फूड डिस्ट्रीब्यूशन और कम्युनिटी वेलफेयर पर काम करता है। फाउंडेशन फूड वेस्ट रिडक्शन, गरीबों को मुफ्त मील्स और लोकल फार्मर्स को सपोर्ट जैसे प्रोजेक्ट्स चलाता है। आशीष की चाहत है कि उनके फूड कोर्ट्स में CSR एक्टिविटीज भी शामिल हों – जैसे लोकल इंग्रीडिएंट्स का इस्तेमाल, महिलाओं को एम्प्लॉयमेंट और पर्यावरण-अनुकूल प्रैक्टिसेस।नोएडा में ब्रांच खोलने का फैसला इसी विजन का हिस्सा है।
- मल्टी-क्यूजिन हॉल – उत्तर भारतीय, साउथ भारतीय, चाइनीज, कांटिनेंटल, हेल्दी और स्ट्रीट फूड।
- किड्स जोन और फैमिली एरिया – फैमिलीज को आकर्षित करने के लिए।
- इवेंट स्पेस – बर्थडे, कॉर्पोरेट, कल्चरल इवेंट्स।
- सस्टेनेबिलिटी – सोलर पावर, वेस्ट मैनेजमेंट, लोकल सप्लाई चेन।
- टेक इंटीग्रेशन – ऐप-बेस्ड ऑर्डरिंग, QR कोड, लॉयल्टी प्रोग्राम।
देश भर में विस्तार की योजना: दिल्ली-NCR के बाद मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चंडीगढ़। विदेशों में UAE, USA, UK जैसे भारतीय डायस्पोरा वाले इलाकों में। हर कोर्ट लोकल टेस्ट को इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के साथ मिक्स करेगा।उदाहरण के लिए, नोएडा फूड कोर्ट में दम बिरयानी की बिरयानी, श्री भोजनम की दोसा और फ्लेवर कैफे की कॉफी एक साथ मिलेंगी। इससे क्रॉस-सेलिंग बढ़ेगी और कस्टमर एक जगह पर पूरा अनुभव पाएंगे।चुनौतियां और समाधानफूड बिजनेस में चुनौतियां कम नहीं – कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, स्टाफ ट्रेनिंग, हाइजीन स्टैंडर्ड, कॉम्पिटिशन (Zomato, Swiggy, लोकल ढाबे)। आशीष गुप्ता इनका सामना कैसे करते हैं?
- सप्लाई चेन: डायरेक्ट फार्मर्स से टाई-अप, कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग।
- ट्रेनिंग: स्टाफ को रेगुलर ट्रेनिंग, भगवान दास फाउंडेशन के जरिए स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम।
- मार्केटिंग: सोशल मीडिया, इंफ्लुएंसर पार्टनरशिप, ग्रैंड ओपनिंग इवेंट्स।
- क्वालिटी कंट्रोल: सेंट्रलाइज्ड किचन और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स।
नोएडा ब्रांचेस में ये सिस्टम पहले से लागू हैं, जिससे कस्टमर्स संतुष्ट हैं।सोशल इम्पैक्ट: फूड से परेभगवान दास फाउंडेशन के जरिए आशीष सुनिश्चित करते हैं कि बिजनेस प्रॉफिट का कुछ हिस्सा सोशल वर्क में जाए। उदाहरण:
- फूड बैंकिंग और वेस्ट रिडक्शन।
- अनाथ आश्रमों या सीनियर सिटिजन होम्स में फ्री मील्स।
- लोकल महिलाओं को होममेड फूड बिजनेस शुरू करने में मदद।
- एनवायरनमेंटल अवेयरनेस कैंपेन।
यह मॉडल “प्रॉफिट विद पर्पज” का है, जो युवा उद्यमियों को इंस्पायर करता है। नोएडा के रेसिडेंट्स इन नए ब्रांचेस से खुश हैं।नोएडा वालों के लिए यह शुभ संकेत है। अगर आप फूड लवर हैं तो इन ब्रांचेस को जरूर विजिट करें। आशीष गुप्ता जैसे उद्यमियों को सपोर्ट करें जो न केवल स्वाद देते हैं बल्कि समाज को भी बेहतर बनाते हैं।


