बरसों से जो शख़्स फ़ोन करके ‘रॉन्ग नंबर’ कहकर फ़ोन रख देता था, वह कोई और नहीं–

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह ‘सहज़’,हरदा, मध्य प्रदेश वे शामें अब भी मेरी रूह पर उकेरी हुई हैं, जब वक्त जैसे थम सा जाता था और यादों के चिराग खुद-ब-खुद जलने लगते थे। इतने साल बीत गए, उम्र का परिंदा न जाने कितने मौसमों की उड़ान भर चुका है, लेकिन ज़हन के किसी कोने में उसके … Continue reading बरसों से जो शख़्स फ़ोन करके ‘रॉन्ग नंबर’ कहकर फ़ोन रख देता था, वह कोई और नहीं–