भाजपा में नवीन युग: ताजपोशी की तस्वीर और सत्ता-संरचना में पीढ़ीगत बदलाव-रितेश सिन्हा

अटल बिहारी वाजपेयी की उदार राष्ट्रवादी दृष्टि, नरेंद्र मोदी–अमित शाह की सशक्त प्रबंधकीय राजनीति और नितिन गडकरी की व्यावहारिक विकास सोच के बाद अब नितिन नवीन जैसे युवा चेहरे के उभार को भाजपा के नए युग की आहट माना जा रहा है। यह परिवर्तन आकस्मिक नहीं, बल्कि दशकों की वैचारिक तपस्या, संगठनात्मक अनुशासन और राजनीतिक प्रयोगों का स्वाभाविक परिणाम है।

भारतीय जनता पार्टी की राजनीतिक यात्रा केवल सत्ता परिवर्तन की कथा नहीं, बल्कि विचार, संगठन और नेतृत्व के पीढ़ीगत विकास का जीवंत इतिहास है। जनसंघ की वैचारिक विरासत से जन्मी यह पार्टी आज चौथी पीढ़ी के नेतृत्व की दहलीज पर खड़ी दिखाई देती है। अटल बिहारी वाजपेयी की उदार राष्ट्रवादी दृष्टि, नरेंद्र मोदी–अमित शाह की सशक्त प्रबंधकीय राजनीति और नितिन गडकरी की व्यावहारिक विकास सोच के बाद अब नितिन नवीन जैसे युवा चेहरे के उभार को भाजपा के नए युग की आहट माना जा रहा है। यह परिवर्तन आकस्मिक नहीं, बल्कि दशकों की वैचारिक तपस्या, संगठनात्मक अनुशासन और राजनीतिक प्रयोगों का स्वाभाविक परिणाम है। भारतीय जनता पार्टी का गठन 1980 में हुआ। जनसंघ के विघटन और दोहरी सदस्यता विवाद के बाद पार्टी अस्तित्व के संकट से गुजर रही थी। 1984 के लोकसभा चुनाव में मात्र दो सीटें मिलना इस संघर्ष का चरम बिंदु था। इसी दौर में अटल बिहारी वाजपेयी ने पार्टी को वैचारिक स्पष्टता और लोकतांत्रिक गरिमा प्रदान की। उनकी वाक्पटुता, उदार राष्ट्रवाद और संवाद की शैली ने भाजपा को हाशिये से निकालकर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में स्थापित किया।

1989 में 85 सीटों की उपलब्धि ने यह संकेत दे दिया कि भाजपा अब वैकल्पिक शक्ति बन रही है। राम मंदिर आंदोलन ने हिंदुत्व को सामाजिक चेतना से जोड़ा और लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा ने नब्बे के दशक में जनभावनाओं को व्यापक रूप दिया। यह वह दौर था जब भाजपा ने वैचारिक आंदोलन से संगठित राजनीतिक शक्ति बनने की दिशा पकड़ी। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा ने परिपक्वता की राजनीति सीखी। गठबंधन को कमजोरी नहीं, बल्कि शक्ति में बदलने की कला उन्होंने विकसित की। 1998 से 2004 तक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार का सफल संचालन इसका प्रमाण रहा। पोखरण परमाणु परीक्षण और कारगिल विजय ने भारत के आत्मसम्मान को नई ऊंचाई दी। अटल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वैचारिक जड़ों को आधुनिक लोकतांत्रिक संदर्भ में प्रस्तुत किया। उनकी कवितामयी भाषा और शालीन व्यवहार ने भाजपा को भावनात्मक और बौद्धिक आधार दिया।

यद्यपि ‘इंडिया शाइनिंग’ का नारा चुनावी सफलता नहीं दिला सका, फिर भी अटल युग ने भाजपा को एक जिम्मेदार और स्वीकार्य सत्ता विकल्प के रूप में स्थापित किया। इस कालखंड ने पार्टी को गठबंधन राजनीति का अनुभवी खिलाड़ी बना दिया। 2014 के बाद भाजपा ने भारतीय राजनीति का नया व्याकरण रचा। नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने संगठन, प्रचार और शासन तीनों स्तरों पर अभूतपूर्व प्रयोग किए। 2014 में दो सौ बयासी और 2019 में तीन सौ तीन सीटों की ऐतिहासिक जीत ने भाजपा को भारतीय राजनीति की धुरी बना दिया। विकास, राष्ट्रवाद और मजबूत नेतृत्व का संदेश जनता तक स्पष्ट रूप से पहुंचा। गुजरात मॉडल, वस्तु एवं सेवा कर, अनुच्छेद 370 की समाप्ति और निर्णायक शासन शैली ने भाजपा को साहसिक फैसलों की पार्टी के रूप में स्थापित किया। अमित शाह ने बूथ स्तर तक संगठन को सुदृढ़ किया और डिजिटल माध्यमों के जरिये युवाओं को राजनीति से जोड़ा। सोशल मीडिया, डेटा आधारित रणनीति और कार्यकर्ता केंद्रित संगठन भाजपा की पहचान बने।

2024 के चुनाव में भाजपा को 240 सीटें मिलीं। यह परिणाम पूर्ण बहुमत से कम था, किंतु गठबंधन सरकार के गठन ने यह सिद्ध किया कि भाजपा अब भी केंद्रीय राजनीतिक शक्ति बनी हुई है। किसान आंदोलन, रोजगार और सामाजिक संतुलन जैसे मुद्दे इस दौर की प्रमुख चुनौतियां रहीं, परंतु हिंदुत्व और विकास का संतुलन पार्टी की मूल धुरी बना रहा।

इसी क्रम में नितिन गडकरी भाजपा की राजनीति में व्यावहारिकता का प्रतीक बनकर उभरे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नागपुर पृष्ठभूमि से आए गडकरी ने अध्यक्ष रहते संगठन को स्थिरता दी और सड़क परिवहन मंत्री के रूप में बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व कार्य किया। पचास हजार किलोमीटर से अधिक राष्ट्रीय राजमार्ग, वैकल्पिक ऊर्जा पर जोर और स्पष्टवादिता उनकी पहचान बनी। वे अटल की संयमशीलता, मोदी की विकास दृष्टि और शाह की संगठन क्षमता को जोड़ने वाली कड़ी सिद्ध हुए।

अब भाजपा ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां नेतृत्व का स्वाभाविक पीढ़ीगत हस्तांतरण आवश्यक हो गया है। नितिन नवीन इसी चौथी पीढ़ी के प्रतिनिधि के रूप में उभरते हैं। युवा, तकनीक-सक्षम, संगठन में प्रशिक्षित और क्षेत्रीय पकड़ वाले नितिन नवीन को भविष्य की कमान सौंपे जाने की चर्चा केवल अटकल नहीं, बल्कि रणनीतिक आवश्यकता के रूप में देखी जा रही है।

उनकी सोच संगठन को आधुनिक तकनीक, युवा अपील और सामाजिक संतुलन की दिशा में ले जाने की है। दक्षिण भारत में विस्तार, पिछड़े वर्गों का एकीकरण और रोजगार केंद्रित राजनीति उनके संभावित एजेंडे के केंद्र में हैं। नितिन नवीन की व्यावहारिकता के साथ युवा जोश का मेल उन्हें विशिष्ट बनाता है।

2026 में संभावित ताजपोशी को 2024 के चुनावी अनुभवों से जोड़ा जा रहा है। यह संकेत है कि भाजपा आत्ममंथन करने और समय के अनुसार स्वयं को ढालने की क्षमता रखती है। बदलते वैश्विक समीकरण, भारत की अंतरराष्ट्रीय भूमिका और विकसित भारत के लक्ष्य के संदर्भ में संगठन को नई ऊर्जा और नए चेहरे की आवश्यकता है।

1980 की 2 सीटों से लेकर 2024 की 240 सीटों तक का सफर वैचारिक आंदोलन से डिजिटल संगठन तक की यात्रा है। हर दशक ने भाजपा को नया अध्याय दिया। अटल ने आधार दिया, मोदी–शाह ने मशीनरी खड़ी की, गडकरी ने विकास को गति दी और अब नितिन नवीन उस ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करते हैं जो भविष्य की राजनीति को दिशा देगी।

चौथी पीढ़ी के नेतृत्व में भाजपा केवल सत्ता की नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की राजनीति को आगे बढ़ाने का दावा करती है। परंपरा और परिवर्तन का यही संगम भाजपा के नए युग की पहचान बनेगा।

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