आर्य समाज शास्त्री नगर की वरिष्ठ एवं श्रद्धेय सदस्या माता सत्यवती ओबरॉय जी का 100वाँ जन्मदिवस (शताब्दी पर्व) अत्यंत उल्लास, श्रद्धा एवं धूमधाम के साथ मनाया गया।

इस पावन अवसर पर माता जी के परिजनों, आर्य समाज शास्त्री नगर के मान्य सदस्यों एवं स्थानीय नागरिकों ने एकत्र होकर एक भव्य सभा का आयोजन किया। इस विशेष समारोह में मुख्य भजन उपदेशक के रूप में पंडित अजय आर्य जी को आमंत्रित किया गया। पंडित अजय आर्य जी ने अपने मधुर एवं भावपूर्ण भजनों की प्रस्तुति से संपूर्ण वातावरण को भक्तिमय बना दिया तथा उपस्थित जनसमूह को माता जी के शताब्दी जीवन एवं वैदिक संस्कारों से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। समारोह में प्रस्तुत प्रमुख भजन “ईश्वर कृपा को जिसने भी पाया, उसी का जन्म ये सफल हो गया है” का संदेश: मानव जीवन की वास्तविक सार्थकता प्रभु की कृपा और सत्कर्मों में है। प्रभु अनुकंपा से ही 100 वर्षों का दीर्घ और आरोग्यमयी जीवन संभव हो पाता है।

भजन “प्रभु जी तेरी लीला हैअपरंपार, अविनाशी निराकार है दाता है” का संदेश: ईश्वर सर्वव्यापी एवं निराकार है। परिवार एवं समाज का कल्याण उसी परमपिता परमेश्वर की कृपा पर आधारित है। अन्य भजन “जन्मदिन आज फिर आया, बधाई हो बधाई हो” का संदेश: शताब्दी वर्ष के इस ऐतिहासिक पड़ाव पर उपस्थित सभी लोगों ने माता जी के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं निरंतर मार्गदर्शन के लिएमंगलकामनाएँ व्यक्त कीं। एक अन्य गीत ”मां का ऋण कौन उतारे” का संदेश: माँ का वात्सल्य और त्याग अतुलनीय है, जिसके ऋण से कोई भी संतान कभी उऋण नहीं हो सकती। ”मां की उपमा क्या दूं, हर उपमा उप रह जाती है ।

मां के गुणगान में तो वाणी भी चुप रह जाती है” का संदेश: माँ का स्वरूप और महिमा सांसारिक शब्दों एवं उपमाओं से परे है। अंत में ऋषि दयानंद की भक्ति का गीत “ऋषि आते न जो…” का संदेश: ऋषियों और महर्षियों द्वारा दिखाए गए ज्ञान के मार्ग से ही समाज में वैदिक संस्कारों और सत्य की स्थापना संभव हुई है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों ने माता सत्यवती ओबरॉय जी के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लिया और उनके दीर्घायु एवं स्वास्थ्यप्रद जीवन की कामना की। इस अवसर पर आर्य समाजशास्त्र रेलवे के प्रधान सूरजपाल मंत्री मदनपाल सिंह तोमर प्रधान श्री रविंद्र सिंह डॉ वीरेंद्र एवं आर्य समाज स्थापना नगर से श्री राजेश सेठी जी आर्य समाज बुढ़ाना गेट से श्री सुधाकर जी आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का प्रारंभ यज्ञ के द्वारा किया गया जिसे आचार्य रणधीर शास्त्री विद्या भास्कर द्वारा कुशलतापूर्वक संपन्न कराया गया




