मैं बिहार हूँ, मैं क्या था और क्या हो गया ? मेरा क्या होगा ?

मैं बिहार हूँ और अपने किसी नेताओं पर भरोसा नहीं करता। पूराने उन क्रांतिकारी जीवन,स्वर्णिम इतिहास आपको कभी माफ नहीं करेगी। आज के समय में नेताओं को लेकर जो आम जनता का भरोसा टूटा है, उसे कमोबेश हर सजग नागरिक महसूस कर रहा है। जब आप पुराने अखबारों में बिहार के क्रांतिकारी जीवन, स्वर्णिम इतिहास की बात करते हैं, तो ज़हन में डॉ राजेन्द्र प्रसाद जी, रामधारी सिंह दिनकर जैसे नाम आते हैं, जिन्होंने नेतागिरी को कोई “बिजनेस” या “टीआरपी का खेल” नहीं, बल्कि समाज को जगाने और अन्याय के खिलाफ लड़ने का एक हथियार बनाया था। उनके लिए नेतागिरी एक मिशन थी, जिसके लिए उन्होंने जेल जाना और लाठियां खाना भी स्वीकार किया।

बिहार भारत का एक ऐसा राज्य है जिसकी आर्थिक यात्रा extremes से भरी रही है। 1990 के दशक में लालू प्रसाद यादव के शासन में आर्थिक ठहराव (negative per capita growth) के बाद 2005 से नीतीश कुमार युग में तेज सुधार हुआ। 2026 में सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी नीतियां largely निरंतरता वाली हैं, खासकर सात निश्चय कार्यक्रम के तहत। राज्य की आर्थिक नीतियां मुख्य रूप से सुशासन, आधारभूत संरचना, सामाजिक कल्याण, कृषि और औद्योगीकरण पर केंद्रित रही हैं। आज की नेतागिरी और पुराने समय की नेतागिरी में कुछ बहुत गहरे और बुनियादी अंतर आ चुके हैं. पुराने दौर में नेतागिरी देश और समाज को बदलने की जिद से निकलते थे। आज नेतागिरी बड़े कॉर्पोरेट और व्यावसायिक हितों से संचालित होते हैं, जहां ‘टीआरपी’ और ‘मुनाफा’ सबसे ऊपर आ गया है। आज बिहार के नेतागिरी के विश्लेषण से ज्यादा ध्यान इस बात पर होता है कि कौन सी मेरा काम कितनी सनसनी पैदा कर सकती है या कितनी जल्दी ‘ट्रेंड’ हो सकती है। निष्पक्षता जो कभी नेतागिरी की रीढ़ मानी जाती थी, वह आज कहीं खो गई है। नेतागिरी अब जनता सुविधा देने के लिए कम, और एक खास किस्म का नैरेटिव या एजेंडा सेट करने के लिए ज्यादा दिखाई जाती हैं। “जब नेतागिरी जनता के सवालों को छोड़कर देश के गलियारों में अपनी जगह तलाशने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि देश और राज्य की सत्ता की सोंच की ताकत गिरवी रख दी गई है।” यह बात बिल्कुल सच है कि अगर आज वो पुराने नेताओं के नेतागिरी इस दौर की नेतागिरी को देखते, तो शायद उनका दिल टूट जाता। इस व्यवस्था में जो गिने-चुने नेता ईमानदारी से काम करना भी चाहते हैं, उन पर भी चौतरफा दबाव होता है। ऐसी स्थिति में एक जागरूक नागरिक के तौर पर हमारे पास यही रास्ता बचता है कि हम किसी भी नेता , पार्टी पर आंख मूंदकर भरोसा न करें, बल्कि अपनी बुद्धि और विवेक से सही-गलत का फैसला करें। अब बात करते हैं बिहार के आज की स्थति की —

देखिये बिहार का हालिया आर्थिक प्रदर्शन को, बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार 2024-25 में GSDP (current prices) ₹9.92 लाख करोड़ के आसपास, 13.1% वृद्धि। Constant prices पर 8.6% वृद्धि, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर। 2025-26 में GSDP प्रोजेक्शन ₹10.97 लाख करोड़, 2026-27 में ₹13.1 लाख करोड़ (15% ग्रोथ)। प्रति व्यक्ति आय अभी भी देश में सबसे कम (लगभग ₹1.05 लाख nominal, 2026-27 est.)। राज्य तेज विकास कर रहा है लेकिन निम्न आधार से, इसलिए प्रतिशत अच्छे दिखते हैं। कृषि पर निर्भरता अभी भी अधिक (कर्मचारियों का बड़ा हिस्सा), लेकिन सेवा और निर्माण क्षेत्र बढ़ रहे हैं। अब बात करते हैं प्रमुख आर्थिक नीतियां और उनकी विशेषताएं की  नीतीश कुमार के समय सड़कें, पुल, बिजली और शहरी विकास पर भारी निवेश। सम्राट सरकार में भी जारी एक्सप्रेसवे, ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट (सुल्तानगंज, रक्सौल), स्मार्ट सिटी।जिसका प्रभाव था कि  निर्माण क्षेत्र GSDP में महत्वपूर्ण योगदान। डबल इंजन सरकार (केंद्र + राज्य) से फंडिंग आसान थी। रखरखाव और गुणवत्ता में चुनौतियां, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थायित्व कम। कृषि और ग्रामीण विकास  सात निश्चय-3 (2025-2030),किसान आय दोगुनी, सिंचाई, कोल्ड स्टोरेज, फूड प्रोसेसिंग। Jannayak Karpoori Thakur Kisan Samman Nidhi (₹3000/वर्ष अतिरिक्त PM-KISAN पर)। Jeevika (SHG) कार्यक्रम , महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण। कृषि उत्पादकता में सुधार, लेकिन छोटे जोत, बाढ़/सूखा और कम mechanization बड़ी समस्या। औद्योगीकरण और निवेश आकर्षण Bihar Startup Policy 2022: 1200+ स्टार्टअप्स, सीड फंडिंग। New Age Economy पहल, MSME, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग पर फोकस। 2026 में ₹1.36 लाख करोड़ निवेश आ चुका, ₹5 लाख करोड़ का लक्ष्य। नीतियां आकर्षक (सब्सिडी, लैंड बैंक), लेकिन जमीन पर execution कमजोर। Corruption perception, skill gap और बुनियादी ढांचे की कमी निवेशकों को रोकती है। शिक्षा, स्वास्थ्य और स्किल डेवलपमेंट, बजट में शिक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता (मॉडल स्कूल, मेडिकल कॉलेज, Ayushman Bharat)। साक्षरता बढ़ी, लेकिन गुणवत्ता (learning outcomes) और उच्च शिक्षा में कमी। युवा बेरोजगारी और outward migration जारी। वित्तीय प्रबंधन और कल्याण, Fiscal deficit 3% GSDP के लक्ष्य पर (FRBM)।  Revenue surplus की कोशिश। महिला, EBC, महादलित केंद्रित योजनाएं (pink buses, mahila haat)।   मजबूती सामाजिक स्थिरता और राजनीतिक समर्थन। कमजोरी, राजकोषीय घाटा नियंत्रण में चुनौती, debt burden। ताकतें (Strengths) उच्च वृद्धि दर, कई वर्षों में राष्ट्रीय औसत से बेहतर। जनसांख्यिकीय लाभ,युवा आबादी (60%+ 25 वर्ष से कम) labour force। केंद्र सहयोग,NDA सरकार में फंड ट्रांसफर बेहतर। सुशासन विरासत,कानून-व्यवस्था सुधार से निवेश माहौल बना। कमजोरियां और चुनौतियां (Weaknesses) कम औद्योगीकरण, मैन्युफैक्चरिंग शेयर सीमित, सेवा और कृषि dominant। निम्न प्रति व्यक्ति आय और गरीबी,विकास inclusive नहीं पूरी तरह। संरचनात्मक समस्याएं,बाढ़ प्रबंधन, irrigation, power reliability, land reforms। स्किल और रोजगार, उच्च migration, local jobs कम। निवेश realization,घोषणाएं ज्यादा, ground breaking कम। भ्रष्टाचार और नौकरशाही,Transparency International के अनुसार बाधा। अवसर (Opportunities)Supply chain diversification (China+1) में labour-intensive industries (टेक्सटाइल, leather, food processing)। Tourism (बोधगया, राजगीर) और IT/BPO। Renewable energy और agro-based industries। Saat निश्चय-3 जैसे roadmap से 2030 तक per capita income double करने का लक्ष्य। खतरें (Threats) राजनीतिक अस्थिरता का इतिहास। जलवायु परिवर्तन (बाढ़)। राष्ट्रीय/वैश्विक मंदी का प्रभाव। Demographic dividend को बर्बाद होने का खतरा अगर स्किलिंग न हुई। बिहार की आर्थिक नीतियां विकासवादी और कल्याणकारी हैं, जिन्होंने 2005 के बाद राज्य को “सुशासन” की राह दी। तेज GSDP ग्रोथ impressive है, लेकिन गुणवत्ता, समावेशिता और स्थिरता की कमी है। नीतीश मॉडल ने बुनियाद रखी अब सम्राट चौधरी को structural transformation चाहिए, aggressive industrialization, land and labour reforms, quality education/skilling, flood-resilient agriculture और ease of doing business में सुधार। बिहार की आर्थिक नीतियां सही दिशा में हैं लेकिन execution, innovation और inclusive growth पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। अगर ये कमियां दूर हुईं तो बिहार न केवल तेज बढ़ेगा बल्कि भारत की विकास कहानी का engine भी बन सकता है। वर्तमान में यह “fastest growing poorest state” की स्थिति में है इसे बदलने का समय आ गया है। मतलब आज भी यह सवाल है मैं बिहार हूँ, मैं क्या था और क्या हो गया ? मेरा क्या होगा ?

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