यौन अपराधी जेफ़री एपस्टीन की ईमेल में मुकेश-नीता-अनिल-टीना का नाम

रौथचाइल्ड के सहारे ’सरकार’ चलवा रहा अंबानी परिवार- रितेश सिन्हा

अमेरिका में ’एपस्टीन फाइल्स’ के जारी होते ही पूरी दुनिया में बवाल मच गया। यौन अपराधी जेफ़री एपस्टीन से जुड़ी लाखों फाइलें अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने हाल ही में जारी की हैं। इन फाइलों में लगभग 30 लाख पेज, 1-80 लाख तस्वीरें और करीब 2000 वीडियो सार्वजनिक किए गए हैं। इनमें एपस्टीन के जेल में बिताए दिनों के खुलासे के साथ एक मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट भी शामिल है, जो उनकी रहस्यमयी मौत के बारे में बताती है। इसके अलावा एपस्टीन और हाई-प्रोफाइल हस्तियों के बीच हुए लिखित ईमेल की प्रतियां भी सामने आई हैं। कई ईमेल और डॉक्यूमेंट एक दशक से भी ज्यादा पुराने लगते हैं।

चर्चित यौन अपराधी जेफ़री एपस्टीन से जुड़ी इन ईमेल्स में भारत के सबसे प्रभावशाली और वर्तमान में सबसे धनाढ्य कारोबारी परिवार—मुकेश, नीता, अनिल और टीना अंबानी—का नाम भी शामिल है। अंबानी परिवार का रिलायंस इंडस्ट्रीज के जरिए देश की वर्तमान अर्थव्यवस्था में खासा प्रभाव है। इस परिवार का नाम उनकी कामयाबी के साथ कई विवादों को भी समेटे हुए है, जो विभिन्न अदालतों में विचाराधीन हैं। हाल ही में उजागर हुए एपस्टीन के ईमेल में अंबानी परिवार से हुई मुलाकातों और मौज-मस्ती के खुलासों के बाद इस परिवार के एपस्टीन के साथ रिश्तों की परतें खुलती नजर आ रही हैं।

अंबानी परिवार के पास एस्टोनिया की ई-रेसिडेंसी है, जिसके माध्यम से वे अपनी कंपनी को पंजीकृत कर विश्व के किसी भी कोने से यूरोपीय व्यवसाय बिना बाधा के संचालित कर सकते हैं। एस्टोनिया दुनिया का पहला ऐसा देश है, जिसने डिजिटल रेजिडेंसी की शुरुआत की। अंबानी परिवार ने खुद को पंजीकृत कर एक विशिष्ट डिजिटल पहचान हासिल की। 2019 में मुकेश अंबानी ने एस्टोनिया में कंपनी पंजीकृत कर रिलायंस जियो को यूरोपीय बाजार में उतार दिया। लंदन के बकिंघमशायर में स्टोक पार्क की 300 एकड़ संपत्ति खरीदकर मुकेश अंबानी परिवार सहित लंदन में नया ठिकाना बनाने का इरादा कर चुके हैं।

बता दें कि इससे पहले कई गुजराती कारोबारी भगोड़े—जैसे विजय माल्या, ललित मोदी और नीरव मोदी—देश छोड़कर अन्य देशों में शरण ले चुके हैं, ताकि आर्थिक अपराधों के शिकंजे से निजात पा सकें।छोटे अंबानी अनिल की बात करें तो उनके रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस कैपिटल पर धोखाधड़ी व कर्ज डिफॉल्ट के अनेक आरोप हैं। ईडी और सीबीआई ने इन पर कई जगह छापे मारे और दस्तावेज जब्त किए। जांच एजेंसियों के अनुसार कुछ लोन शेल कंपनियों के जरिए डायवर्ट किए गए, जिससे बैंक और निवेशक प्रभावित हुए। इसके बाद अनिल अंबानी की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई और निवेशकों में चिंता की लहर दौड़ गई।

एपस्टीन फाइल्स के सामने आने के बाद पता चला कि 2017 में दुबई के डीपी वर्ल्ड सीईओ सुल्तान अहमद बिन सुलायम ने अंबानी को एपस्टीन से रूबरू कराया। उसके तुरंत बाद निवेश, रक्षा सौदे, कर्ज और डील्स में एपस्टीन की ’नेटवर्किंग’ का जादू चला। अनिल अंबानी और रिलायंस ग्रुप पर 40,000 करोड़ रुपये के कथित बैंक लोन को शेल कंपनियों के जरिए ट्रांसफर करने का आरोप है। इस मामले की जांच में ईडी-सीबीआई की देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई।

4 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इस 40,000 करोड़ बैंक फ्रॉड के अलग-अलग मामलों में जांच एजेंसियों को केस दर्ज करने के निर्देश दिए। इसमें सीबीआई को कई और केस दर्ज करने पड़ेंगे, क्योंकि फंड डायवर्जन के आरोप 20 से ज्यादा लोन से जुड़े हैं। ईडी को मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल शेल कंपनियों का नेटवर्क मिला, जिसमें एक कंपनी शामिल है जिसे मैनहट्टन अपार्टमेंट की बिक्री से 8.3 मिलियन डॉलर मिले। ये पैसे पाकिस्तान से जुड़े व्यक्ति द्वारा नियंत्रित दुबई की कंपनी के साथ नकली इनवेस्टमेंट के आड़ में अमेरिका से भेजे गए।

मुकेश अंबानी और नीता अंबानी की कंपनियों पर भी सेबी ने कार्रवाई की है। केसी बेसिन मामले में मुकेश अंबानी व उनकी कंपनी गंभीर आरोपों का सामना कर रही हैं। भारत सरकार और रिलायंस इंडस्ट्रीज के बीच केजी-डी6 डीप वाटर गैस ब्लॉक को लेकर 13 साल पुराना वित्तीय विवाद अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के निर्णय का इंतजार कर रहा है। मुकेश-अनिल अंबानी समेत परिवारिक सदस्यों पर शेयर होल्डिंग व रिपोर्टिंग नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाकर 25 करोड़ का जुर्माना लगाया गया। यह दिखाता है कि भारत में कोई भी व्यक्ति या संगठठन—चाहे कितना शक्तिशाली हो—कानून के दायरे से बाहर नहीं।

सवाल उठता है कि क्या अमीर और गरीब के लिए कानून समान रूप से लागू होता है। 2005 में धीरूभाई अंबानी के निधन के बाद परिवार का विभाजन हुआ। मुकेश ने रिलायंस इंडस्ट्रीज से तेल, पेट्रोकेमिकल्स व डिजिटल क्षेत्रों में विस्तार किया, जबकि अनिल को आई कंपनियों में कर्ज व कानूनी दबाव झेलना पड़ा। इससे पारिवारिक सामंजस्य की कमी ने व्यवसायिक विरासत पर गहरा असर डाला। यह विभाजन साबित करता है कि संपत्ति व शक्ति की बड़ी मात्रा होते हुए भी पारिवारिक विवाद लंबे समय तक आर्थिक व सामाजिक परिणाम ला सकते हैं।

नीता अंबानी ने शिक्षा व खेल विकास परियोजनाओं से सामाजिक क्षेत्र में योगदान दिया है, जो सराहनीय है। लेकिन बड़े प्रोजेक्ट्स में पारदर्शिता व स्थानीय समुदाय की सुनवाई कितनी होती है, यह सवाल उठता है। मुकेश व नीता अंबानी को अत्यधिक सुरक्षा कवरेज मिला है, जिस पर सवाल है कि क्या संपन्न लोगों को सामान्य नागरिकों से ज्यादा सुरक्षा चाहिए। टीना अंबानी का नाम भी तब चर्चा में आया जब उन्होंने कानूनी समन का पालन नहीं किया।यह घटना सवाल खड़ा करती है कि क्या प्रभावशाली व्यक्ति कानून से ऊपर हैं। न्याय व नियम सभी के लिए समान होने चाहिए, चाहे कोई कितना धनी या शक्तिशाली हो। 

सोशल मीडिया व कुछ प्लेटफॉर्म्स पर अंबानी परिवार से जुड़े सनसनीखेज आरोप आते रहते हैं, लेकिन अधिकांश सत्यापित नहीं। अफवाह व वास्तविकता में फर्क करना लोकतंत्र के लिए जरूरी है। अंबानी परिवार के वित्तीय विवाद, पारिवारिक विभाजन व कानूनी जांच जवाबदेही, पारदर्शिता व अनुपालन की अनिवार्यता दिखाते हैं। जनता व नियामक निगरानी रखते हैं कि संपत्ति व शक्ति का उपयोग समाज व कानून के प्रति जिम्मेदारी से हो। मुकेश, नीता, अनिल व टीना अंबानी की कहानी बताती है कि जितनी बड़ी सफलता, उतनी बड़ी जांच व जवाबदेही।

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