राम मंदिर में चोरी नहीं हुई है!

अनंत श्री विभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अनन्तानन्द सरस्वती ,राजगुरु मठ पीठाधीश्वर -काशी

एक बार एक बहुत बड़े व्यक्ति जिनका कि देश के तमाम मुख्यमंत्री से संबंध था! उनके पंजाबी शिष्य में एक करोड रुपए के लेनदेन का एक झूठा आरोप लगा करके पुलिस थाने में कंप्लेंट डाल दिया! हुआ क्या कि, वह कंप्लेंट राज्यपाल,मुख्यमंत्री, सचिव, जो भी एक राज्य की व्यवस्था होती है! उसमें सभी के पास कम्प्लेंट डाले जाने के कारण जांच का विषय बन गया! जांच शुरू हो गई, क्योंकि जब जांच बढ़ने लगी तो उसमें बड़े-बड़े लोगों का नाम आने लगा! तो जब जिस पंजाबी व्यक्ति ने कंप्लेंट किया था वह एक बड़े व्यक्ति जो थे उनका वह शिष्य था! उन्होंने पूछा भाई तुमने मेरा नाम क्यों डाल दिया?

तो उसने,पंजाबी ने कहा कि आपका नाम इसलिए डाला हूं कि आप वह चैन है जिससे मुख्यमंत्री से लेकर के संत्री तक का गोला बन जा रहा है सर्कल बन जा रहा  है और मुझे सर्कल पूरा करना था! क्योंकि जब सर्कल पूरा होगा तभी यह बात सिद्ध होगी कि जो मैं कह रहा हूं  सही है। और कड़ी से कड़ी जुड़ जाएगी?अंततोगत्वा वह कम्प्लेनेन्ट उस केस में फसने लगा तब  कोर्ट में उसने समझौता किया और बात आई गयी हो गयी!!!! यानी की ऊपर की बात का दृष्टांत लेकर मैं कह सकता हूं की राम मंदिर में हुआ कुछ और है लेकिन इस देश के धर्मद्रोही, राजनीतिक गिद्ध और बाबा के भेष में जिनके दादा गुरु ने विश्वनाथ जी की अवहेलना कर दी!! उनका पोता चेला अगर राम मंदिर को आगे रख करके हिंदू धर्म को तार- तार करें तो यह कोई बड़ी बात नहीं है! वैसे भी अविमुक्तेश्वरानंद और निश्चलानंद जब से राम मंदिर बना है तब से उसका विरोध कर रहे हैं। तो सच्चाई कुछ और है और जगत के सामने लाया कुछ और जा रहा है की मलाई यानी चढ़ावे का हिस्सा जो लोग पहले से खाते आ रहे हैं वह क्यों चाहेंगे उसे दान के धन का सदुपयोग हो और त्यागी तपस्वी विचारधारा के लोग उस धन का सदुपयोग करे!!

स्पष्ट कहूं तो अगर वर्तमान की व्यवस्था में सज्जन पुरुष अगर सर्वाधिक कहीं मिल सकते हैं तो वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ है। उनके प्रचारक जीवन को  जिस तरह से तार-तार करने का प्रयास किया गया है ईश्वर भी देख रहा है और समाज भी निर्णय करेगा और उसे निर्णय में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा…… मेरा उद्देश्य किसी की भावनाओं को आहत करना नही जो समाज मे चल रहा है उसको आपके सामने वैसे ही लाया हूं.

नोट – मीडिया मार्ट इंडिया इस लेख को लेखक की सोंच मानकर उसी रूप में प्रकाशित कर रहा है जिस रूप में लेखक, अनंत श्री विभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अनन्तानन्द सरस्वती, राजगुरु मठ पीठाधीश्वर-काशी जी चाहते हैं । इस लेख की पूरी जिम्मेदारी लेखक की है  

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