हम सभी के जीवन में हमारे सपनो का बहुत बड़ा महत्व है। हम अपनें उन सपनों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत भी करते हैं और अपने उन सपनो को हकीक़त में जीते भी है.

पर कभीं कभी ऐसा भी होता है की हम अपनें सपनो के लिए कड़ी परिश्रम भी करते है, लेकिन सपने साकार नहीं होते या यूं कहुँ कि सपने साकार होने में थोड़ा वक़्त लग जाता है। इन नाकामियों से कई बार हमारा मन करता है कि अब छोड़ दूँ ये सब ,अब ये मेरे बस का नहीं है, मन उदास हो जाता है, निराशा और कुंठा से हम घिर जाते है। कभी-कभी लोगों के द्वारा हमारा मजाक तक बनाया जाता है. पर सफलता उन्ही को मिलती है, सपनें उनके ही पुरे होते है, जो इनका कमियों से लड़कर हमेशा आगे बढ़नें की सोचते है और वही इतिहास बनाया करते है। ऐसे कई इतिहासकार है जिन्होने असफलताओं पे भी सफलता पाई और अपने सपनो को सच किया अपने सफलता पाने की जोश को कभी कम न होने दिया।
कौन नहीं जानता महान वैज्ञानिक थॉमस अल्वा एडिसन को जो कई असफलताओं के बाद भी अपने सपनों केा सच करनें के प्रयास में लगे रहे और एक दिन सफलता पाई और विधुत बल्ब का अविष्कार किया। वो हमेशा यही कहा करते थे कि हमारी सबसे बड़ी कमजोरी हार मान लेना है, सफल होनें का सबसे निश्चित तरीका है की हमेशा एक और प्रयास करना ,क्युकी जब हम असफल होते है और अपनें काम को छोड देते है, अपनें सपनो को जीना छोड़ देते है तब हम सफलता के बेहद करीब होते है। माउंटेनमैन दशरतमाझी, जिन्होने केवल अपने सपनो को पूरा करने के लिए अकेले ही ३६० फुट लम्बी ,३० फुट चौड़ी और २५ फुट ऊचे पहाड़ को काटकर एक सड़क बना डाली , लगातार २२ वर्षो के परिश्रम के बाद उन्हे सफलता मिली। वो कहा करते थे की जब उन्होंने पहाड़ी तोड़ना शुरू किया तो कई लोगों नें उन्हे पागल तक कहाँ लेकिन इससे उनके निश्चय और सपनों को पूरा करनें का और मजबूत बल मिला और अन्ततः उन्होंने अपने सपने सच किये। मैं आज केवल सपनो की बाते इसलिए कर रहा हूँ की इन महीनों सभी के परीक्षा परिणाम आने शुरू हो गऐ है और उन परिणामों से हमारे सपने जुडे होते है। हममें से कईयों के सपने पुरे भी होंगे कईयों के शायद नहीं भी हो। पर जिनके नहीं हुऐ इसका ये मतलब नहीं की वो असफल हुऐ। बस उन्हे अपने अंदर के जोश को बनाए रखने की जरुरत है जो आपके सपनो को पूरा करेगी। इस जोश की शुरुआत कहाँ से होती है ? मुझे लगता है, हम इसके साथ पैदा होते है और ये कभी खत्म नहीं होती उनके लिऐ जिनके पास अपने सपने होते है जो अपने सपनो को जीना चाहते है। लेकिन जिंदगी में कई बड़े तुफान आपके जोश को खत्म करने की कोशिश भी करेंगे, इनसे हमे हमेशा बचने की जरुरत है। ये है निराशा, कुंठा और हमारे जीवन में कोई उध्देश नहो नोया यु कहुँ बिना सपनो का जीवन। निराशा तब होगी जब आपको मनचाहा रिजल्ट न मिल पाएं, न कुछ आपके प्लान के मुताबिक हो पाएं, जब आपके सपने सच न हो, एग्जाम में लो ग्रेड आ जाये। हममे से तो कई लोग निराशा के वजह से खुद को खत्म तक कर लेते है। ये हमारी कितनी बड़ी बेबकूफी है, पर इस बात को समझा जा सकता है की निराशा हमे किस हद तक ले जा सकती है। निराशा का दुसरा रूप है कुंठा (फ्रस्टेशन) ये तब होती है जब कोई काम अटक जाये, जब हम बार बार असफल हो रहे हो, जब हमारे सपने हमसे दुर होते दिखने लगे।ये हमारे जोश को खत्म कर देती है। और जहां तक बात कोई उध्देश न होनो या यु कहुँ बिना सपनो का है तो ये बिलकुल वैसे ही है जैसे बिन प्राण के शरीर। हम इन सभी को अवॉयड नहीं कर सकते। मानसून की तरह ये भी हमारे जीवन में बार बार आते रहेंगे, हमें बस हमारा रेन कोर्ट तैयार रखना है, ताकि हमारे अंदर का जोश बुझने न पाए और हमारे सफलताओं में असफलता कभी बाधक न बन पाए।
