हे राम, जय श्री राम द्विज राजनीति

चाणक्य नें बहुत पहले आर्यो की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने वाले अपने राजनीतिज्ञ वारिसों को यह सीखाया और पढ़ाया था कि द्विज राजनीति सदा से अपना वर्चस्व कायम करने और उसे बनाये रखने के लिए छल प्रपंचों का इस्तेमाल करती रहती है।

आजादी के तुरंत बाद हमारे प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने काशी जाकर दो सौ ब्राह्मणों और पुरोहितों के चरण धोये थे। उनके इस कृत्य पर जवाहर लाल नेहरू बहुत नाराज हुए और डॉ. राम मनोहर लोहिया ने तो यहाँ तक कहा था कि भारतीय दुनिया में सबसे अभागे लोग हैं। उनके प्रथम नागरिक यानी राष्ट्रपति तथाकथित विद्वतजनों का चरण धोता है। पर तत्कालीन राष्ट्रपति को न तो अपने पद की गरिमा की चिंता थी और न ही देश की अस्मिता की परवाह। वैसे आप इसे राजनीति ना कह कर सेवा भाव कह सकते हैं. वैसे राजेन्द्र प्रसाद ही नहीं, बाद में अधिकांश राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी बनारस जाकर पंडितों के पांव छूने से लेकर, शंकराचार्यो के मठों और दरबारों में जाकर उनके पैर धोते रहे हैं। उनकी देखा देखी राज्यपालों से लेकर मुख्यमंत्रियों तक और मंत्रियों से लेकर कैबिनेट सचिवों तक ने यही सब किया। साथ ही सरकारी धन को मठों,मन्दिरों तथा आश्रमों में बांटने का प्रावधान रहा है। आज की तारीख में अगर सरकारों द्वारा मठों, मन्दिरों, आश्रमों तथा विभिन्न देवी और देवस्थानों को खैरात में बांटे जाने वाले धन का ब्यौरा लें तो यह पूर्व की तुलना में बहुत अधिक होगा। ये भी राजनीति का एक रूप है। पर आज कि राजनीति द्विज राजनीति हो चुकि है। एक दल इलेक्शन के पूर्व संध्या पर खुल्लम खुल्ला ऐलान करता हैं कि राम मंदिर पर हिन्दू मुसलमानों के बीच राजीनामा हो या न हो, सुप्रीम कोर्ट के साथ संविधान भी उनके लिए कोई मायने नहीं रखता, हम हर हालत में मन्दिर वहीं अयोध्या में बनाएंगे और बनाया भी । बाबरी मस्जिद ढाह कर राम सेवकों ने राम राज्य की दिशा में एक प्रयोग तो पिछली शताब्दी में कर लिया था। अब नई शताब्दी में राम मंदिर बनाकर नया प्रयोग हो गया और सत्ता सुख ले लिया ? बजरंगियों के साथ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ  एक नही हजार प्रयोग करने पर उतारू हैं? वैसे 75* साल के बदले 70* महीना, काम राम भरोसे फिर भी बर्चस्व तो चाहिए ही ना यानि द्विज राजनीति ? तो भूलें नहीं चाणक्य की वो वाणी, द्विज राजनीति सदा से अपना वर्चस्व कायम करने और उसे बनाये रखने के लिए छल प्रपंचों का इस्तेमाल करेगी ही,जो होगा ही।

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