संघ में गुरुदक्षिणा बंद करने का मतलब- गोपाल प्रसाद खटीक

मैंने संघ में अपनी गुरुदक्षिणा बंद कर दी है क्योंकि अब मुझे पूर्णतः विश्वास हो गया है कि संघ अपनी मूल अवधारणा से विमुख होकर सत्ता की गुलामी करने में लिप्त है।

RSS का चाल, चरित्र और चेहरा उजागर हो चुका है। दो ही व्यक्ति सरकार चला रहे हैं और उन्हें योग्य,कर्मठ, लगनशील नेताओं तथा कार्यकर्ताओं की जरूरत ही नहीं। भाजपा राष्ट्रीय संगठन में भी वे अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए उन्हें यस मैन चाहिए। भाजपा पर संघ का वर्चस्व समाप्त हो चुका है। जे पी नड्डा के स्पष्ट बयान के बाद स्थिति स्पष्ट हो चुकी है। संघ अपने वर्ग में जल जंगल जमीन जन और जानवर के संरक्षण की डरपोरशंखी घुट्टी पिलाते रहे और उनके परामर्श से चुने गए मोदी देश के सारे प्राकृतिक संसाधनों और देश की संपदा को अडानी को समर्पित कर दे और संघ के सरसंघचालक धृतराष्ट्र की तरह व्यवहार करे, तो मेरे जैसा स्वयंसेवक के पास विकल्प क्या बचेगा? मैंने संघ और भाजपा दोनों से तिलांजलि ले ली है। लेकिन वर्तमान समय में भारत की जनता के मन में भाजपा और संघ के प्रति जो भाव पनप रहे हैं वही अब इनकी चूलें हिलाने के लिए काफी है। अतिशीघ्र इनको पता चलेगा कि जनता को बेवकूफ बनाने का, झूठ बोलने का, जुमलेबाजी करने का और चारित्रिक पतन का, देश में डाका डालने का क्या परिणाम होता है। जब प्रमाणित हो चुका है कि इनका कोई वर्चस्व ही नहीं, इनकी कोई औकात ही नहीं, तो फिर इन्हें गुरुदक्षिणा क्यों दें?

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