राजधानी पटना में बाइकर्स गैंग अब हथियारों के साथ अपराधिक गतिविधियों को भी अंजाम दे रहे हैं। कम उम्र के नाबालिक नवयुवक अपने इलाके में वर्चस्व को लेकर काफी सक्रिय रहते हैं। इनके द्वारा तरह-तरह की अपराधिक गतिविधियों को लगातार अंजाम दिया जा रहा है। जैसे मोबाइल-चैन छिनना, मारपीट, लूट, हत्या, लड़कियों से छेड़छाड़ समेत कई अन्य संगीन घटनाओं को इनके द्वारा अंजाम दिया जा रहा है।

परिवारिक रईस घराने से आने की वजह से इनके पास शुरुआत के दिनों में पैसे की कमी नहीं होती है। महंगे मोटरसाइकिल, महंगी मोबाइल आदि इनके शौक में शामिल है। महंगी बाइक और महंगी मोबाइल के साथ चलने वाले युवकों के गैंग को ही राजधानी में *बाइकर्स गैंग* के नाम से जाना जाता है। पटना वासियों को बाइकर्स गैंग का नाम सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। इन गैंगों में शामिल युवकों के द्वारा इलाके में इस प्रकार का भय का माहौल बनाया जाता है कि लोग इन के विरुद्ध कुछ बोलने से भी कतराते हैं। इन बाइकर्स गैंग के लड़कों के द्वारा इलाके में भय का माहौल बनाने के लिए बेतरतीब तरीके से मारपीट और तोड़फोड़ किया जाता रहा है। पटना के कई इलाकों में इस तरह के गैंग अलग-अलग नामों से सक्रिय हैं। गैंगों के बीच इलाके में वर्चस्व को लेकर गैंगवार तक की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
क्यों बना बाइकर्स गैंग
सोशल मीडिया और TV पर चल रहे अंडरवर्ल्ड की खबरों को जानने के बाद यह कम उम्र की नाबालिक नवयुवक अंडरवर्ल्ड के खौफ को अपने अंदर उतारने का प्रयास करते हैं, जिस तरीके से अंडरवर्ल्ड का खौफ उनके इलाकों में होता है कि अंडरवर्ल्ड के नाम सुनते ही लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उसी प्रकार से अपने इलाके में बाइकर्स गैंग अपना एक अलग खौफ पैदा करने में लगे हुए हैं। जिस प्रकार से मेट्रोपोलिटन सिटी में लॉरेंस बिश्नोई, दाऊद, छोटा राजन, अबू सलेम समेत न जाने कितने गैंग अंडरवर्ल्ड के नाम पर संचालित किए जाते हैं और उनका प्रभाव शहरों के लोगों को काफी प्रभावित करता है। ठीक उसी प्रकार राजधानी पटना के भी नवयुवक उन्हीं अंडरवर्ल्ड के नक्शे कदम पर चलना आरम्भ कर दिया है।
जैसे-जैसे समय बीतता जाता है उन नाबालिको को उनकी प्रेमिका, मोटरसाइकिल, मोबाइल इत्यादि के लिए पैसे की जब कमी होती है। तब ये लोग अपराध की ओर मुड़ना शुरू करते हैं। इनके द्वारा नाइट आउट शब्द का बार-बार प्रयोग किया जाता है। लड़कियों के साथ रेव पार्टी, अय्याशी के अलावा बाइक पर प्रेमिकाओं को घुमाने के लिए जरूरी पैसे की पूर्ति के लिए नाइट आउट कर लूटपाट करना और विरोध करने पर उनके साथ मारपीट करना इनकी आदत होती जा रही है
बाइकर्स गैंग का उपयोग
बाइकर्स गैंग में शामिल युवकों को राजनीतिक दलों द्वारा आयोजित रोड शो, रैली, लोगों की जमीनों पर कब्जा कराना, सुपारी किलिंग, रंगदारी आदि में इनका खूब इस्तेमाल किया जा रहा है। राजनीतिक दलों के आयोजित रोड शो और रैलियों में इन बाइकर्स गैंग का प्रयोग खूब धड़ल्ले से किया जाता रहा है। इसके बदले उन्हें राजनीतिक संरक्षण प्रदान किया जाता है।
राजधानी पटना में बाइकर्स गैंग का बढ़ता आतंक पुलिस के लिए चुनौती साबित हो रही है। पुलिस के मुताबिक पिछले दिनों बिहार पुलिस के एएसपी पर हुए जानलेवा हमले में भी इन्हीं बाइकर्स गैंग का हाथ होने की पुष्टि हुई थी। पटना में बाइकर्स गैंग के बढ़ती आतंक को को मद्देनजर एसएसपी ने बाइकर्स गैंग के पूरे अनुसंधान रिपोर्ट तलब करने को कहा। डीएसपी विधि-व्यवस्था बताते हैं कि इन बाइकर्स अपने-अपने इलाके में वर्चस्व को लेकर लोगों में खौफ पैदा करना चाहते हैं। लूटपाट, मारपीट, चेन स्नेचिंग, हत्या और लड़कियों पर फब्तियां कस कर उनके साथ छेड़छाड़ जैसे कई संगीन आरोप भी लगे हैं। पटना पुलिस पिछले दिनों बाइकर्स गैंग के आतंक को काबू करने के लिए ठोस कार्रवाई करते हुए गैंग के दर्जनों सदस्यों को जेल भी भेजा था। इलाके में वर्चस्व, प्रेमिका और पैसे की जरूरत समेत कई अन्य मामलों में गैंगवार की घटनाएं आम तौर पर देखी जाती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अब यह लोग हथियार देसी कट्टा, पिस्टल आदि का भी प्रयोग करने लगे हैं। पिछले दिनों पटना के कई राजनीतिक हत्या में बाइकर्स गैंग के ही लोगों के शामिल होने की बात बताई जा रही है।
राजधानी पटना के किस क्षेत्र में कौन सा गैंग सक्रिय है।
आप भी जान लीजिए:-लीजेंड ऑफ पटना – बीडी इवनिंग कॉलेज,बीएनएस (बिगड़े नवाब शहजादे)- गर्दनीबाग, बाप्स ऑफ पटना- करबीगहिया,रोमर्स- कंकडबाग, माइंस- एसके पुरी, अपनी सरकार- खगौल, रॉकर्स- मैनपुरा, एक विलेन- बाकरगंज,रैंडम्स- बेउर,राजेश सरकार- महुआबाग (एयरपोर्ट),स्ट्राइकर- एसके पुरी, लायंस ऑफ बिहार- अनीसाबाद, सिपारा हंटर- कदमकुआँ , किंग्स ऑफ पटना,हॉर्लिक्स , बॉर्नविटा समेत कई अन्य गैंग राजधानी में खूब सक्रिय हैं।
बोर्नविटा गैंग के सदस्यों का कहना है कि हम राजधानी में बाहर से आए थे, बाहर से आकर पटना में रहने वाले युवकों ने भी एक बॉर्नविटा नामक गैंग बनाया। इस गैंग के सदस्य रोशन राज का कहना है कि बाहर से आकर हॉस्टलों में और लौज़ो में रह रहे छात्रों को यहां के स्थानीय बाइकर्स काफी परेशान करते थे। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि हमारे साथ आए दिन लॉजों में घुसकर मारपीट भी किया जाता था। जिस से परेशान होकर हम लोगों ने बॉर्नविटा नामक गैंग का निर्माण किया। वहीं किंग्स ऑफ पटना के नेता गोलू सिंह के नेतृत्व में राजधानी के कई गैंगों का विलय अपने किंग्स ऑफ पटना में करा लिया। उनमें *किडर, माइंस, रिटर्ंस ऑफ रॉकर्स, किंग्स ऑफ फुलवारी, अपनी सरकार, बीएनएस, रेंडांस, स्ट्राइकर, Ek Villain* शामिल है। मतलब यह कहा जा सकता है कि किंग्स ऑफ पटना का राजधानी के कई इलाकों में साम्राज्य कायम है।
बाइकर्स गैंग एक नई चुनौती
पटना पुलिस के सामने इन बाइकर्स गैंग एक नई चुनौती बन चुकी है। डीएसपी विधि-व्यवस्था कहते हैं कि बाइकर्स गैंग के द्वारा अपराध को अंजाम देने के बाद जब इन पर पुलिसिया दबिश बढ़ती है, तो राजनीतिक दबाव के साथ-साथ कम उम्र होने का फायदा भी इन्हें मिल जाता है। उनके मुताबिक इन गैंगों में शामिल युवकों की उम्र तकरीबन 13 से 20 साल के बीच में होता है। जिसके कारण न्यायालय से तुरंत बेल पर रिहा हो जाते हैं। रिहाई के बाद भी अपनी अपराधिक गतिविधियों पर अंकुश नहीं लगाना प्रशासन के लिए सिरदर्द साबित हो रहा है। डीएसपी विधि-व्यवस्था के अनुसार बाइकर्स गैंग के मामले में पटना पुलिस के सामने कई चुनौतियां दिख रही है, जिसमें युवकों के कम उम्र होना। इन गैंगों में नए लोगो के जुड़ाव का चयन भी पुलिस के लिए चुनौती से कम नहीं है। डीएसपी विधि व्यवस्था कहते हैं कि परिजन अपने बच्चों को नैतिक शिक्षा संस्कार देने की जरूरत है। साथ ही बच्चों के क्रियाकलापों पर माता-पिता को बच्चों के क्रिया कलापों पर ध्यान देने की जरूरत भी बताया है।
कहां जाए तो बाइकर्स गैंग का आतंक राजधानी के कई इलाकों में सिर चढ़कर बोल रहा है। पुलिस के ठोस कार्रवाई के बावजूद यह लोग अपने कारनामों से बाज नहीं आ रहे हैं। आए दिन खुलेआम सड़कों पर गोलीबारी करना, मारपीट, तोड़फोड़ और लड़कियों के साथ किया कर छेड़खानी इनकी आदत बन चुकी है। पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक ने बाइकर्स गैंग को खात्मे की बात पूर्व में भी कई दफा कर चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बाइकर्स गैंग पर नकेल कसने में पटना पुलिस कोई कसर नहीं छोड़ेगी। सवाल यह उठता है कि क्या पटना पुलिस के वरीय अधीक्षक के दावे साकार होते हैं या फिर बाइकर्स गैंग के आतंक एसएसपी के मनसूबों पर पानी फेरेगा। सवाल यह कि बाइकर्स गैंग के आतंक से पटना वासियों को कब मुक्ति मिलती है, यह आने वाला समय ही बता पायेगा।
