मीडिया मार्ट इंडिया और पत्रकारिता: देश, काल, पात्र की स्थिति के अनुरूप समसामयिक

हम पात्रत्व के अनुरूप ईश्वरीय अनुग्रह प्राप्त करते हैं और बाह्य जीवन को समृद्धियों से तथा भीतरी जीवन विभूतियों से भरा पूरा देखकर आनन्दित होते हैं।

जिस प्रकार व्यायामशाला में शरीर को स्कूल में मस्तिष्क को और मन्दिर में आत्मा को परिष्कृत करके सर्वांगीण जीवन विकास की व्यवस्था बनाई जाती है उसी प्रकार तीनों शरीरों में देवत्व की मात्रा बढ़ाकर आत्मबल बढ़ाया जाता है, प्रश्न केवल रास्ते की पसन्दगी है। मंजिलें दोनों ही एक लक्ष्य पर पहुँचती हैं। रास्तों में दिखाई पड़ने वाले दृश्यों के मनोरंजन का अन्तर मात्र है। एक रास्ता सदाचार का होता है, दूसरा व्यभिचार। दोनों में से किस रास्ते जाया जाए ? कौन सा अधिक आकर्षक है ? इस प्रश्न पर मतभेद हो सकता है और पसंद भी अलग अलग हो सकती है ? इसीलिये अनादि काल से प्रवृत्ति मार्ग और निवृत्ति मार्ग के दो विधान बने चले आ रहे हैं। इस समय हमारा देश राजनीतिक और धार्मिक असहिसुन्य अपराधी, कुकर्मी और उद्धत का अखाडा बना हुआ है। शोक, सन्ताप, दुःख,दारिद्रय की आग में जल रहा है। इस राजनीतिक और धार्मिक असहिसुन्य को बदला ही जाना चाहिये। यह कार्य जन मानस का स्तर बदलने से ही सम्भव है। विचारक्रान्ति आज की सर्वोपरि आवश्यकता है। मीडिया मार्ट इंडिया का एक छोटा अभियान इसी आवश्यकता की पूर्ति करनें का प्रयास है। अपने प्रभाव क्षेत्र में नवनिर्माण की विचार धारा को अधिकाधिक व्यापक बनाना एक ऐसा पुण्य परमार्थ है जिस पर मानव जाति के उज्ज्वल भविष्य की सम्भावनाएँ निर्भर हैं। अपने पाठकों को स्थिति के अनुरूप ही मीडिया मार्ट इंडिया पिछले कुछ महीनों से देश और देशी अस्मिता के ज्वलंत मुददों को आपके सामनें लानें का प्रयास किया है यहाँ सामान्य स्तर के साधना विधान की चर्चा करना ही उचित है। जड़ों की गहराई तक ले जाने और उपलब्धियों को चिरस्थायी बनाने के लिये कुछ अधिक गहराई में जाना पड़ता है और कुछ अधिक मजबूत प्रयत्न करने पड़ते हैं इन गहरे और मजबूर प्रयोगों से आध्यात्मिक क्षेत्र में साधना द्वारा गतिविधियाँ ही नहीं, प्रवृत्तियाँ भी बदल जाती हैं। यह परिवर्तन ही व्यक्तित्व को एक स्थिर ढाँचे में ढाल देने का प्रयोजन पूरा करता है। मीडिया मार्ट इंडिया प्रयासरत है। देश, काल, पात्र की स्थिति के अनुरूप साधनाओं के मूल उद्देश्य को सुरक्षित रखते हुए कार्य पद्धति में सामयिक हेर फेर किये जाते हैं। मीडिया मार्ट इंडिया प्रारंभ से लेकर अब तक अपने पाठकों की मनोभूमि और समाज की परिस्थितियों का ध्यान रखते हुए आपका मार्ग दर्शन किया है।

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