माँ और सीख : जन्म दात्री, ममता की पवित्र मूर्ति

रक्त कणो से अभिसिंचित कर नव पुष्प खिलाती। स्नेह निर्झर झरता माँ की मृदु लोरी से। हर पल अंक से चिपटाए, उर्जा भरती प्राणो में। विकसित होती पंखुडिया, ममता की छावो में। सब कुछ न्यौछावर उस ममता की वेदी पर जिसके आँचल की साया में हर सुख का सागर! आप है माँ…..

माँ दुनिया के सबसे खूबसूरत शब्दों में से एक है क्योंकि माँ के प्यार की कोई सीमा नहीं होती। इसलिए माँ और बच्चे का रिश्ता इस दुनिया के सबसे खूबसूरत रिश्तों में से एक है। लेकिन यह बात भी सच है कि वह जिंदगी के कई चेप्टर्स को सिखाने के लिए कभी प्यार का सहारा लेती हैं, तो कभी मार का। लेकिन इस बात की पूरी गारंटी होती है कि उससे बेहतरीन जिंदगी के पड़ावों को कोई दूसरा नहीं समझा सकता है ,किसी के भी जीवन में एक माँ पहली, सर्वश्रेष्ठ और सबसे अच्छी व महत्त्वपूर्ण होती है क्योंकि कोई भी उसके जैसा सच्चा और वास्तविक नहीं हो सकता। वो एकमात्र ऐसी है जो हमेशा हमारे अच्छे और बुरे समय में साथ रहती है। अपने जीवन में दूसरों से ज्यादा वो हमेशा हमारा ध्यान रखती है और प्यार करती है जितना कि हम काबिल नहीं होते है।  वो प्रकृति की तरह है जो हमेशा हमको देने के लिये जानी जाती है, बदले में बिना कुछ भी हमसे वापस लिये। हम उसे अपने जीवन के पहले पल से देखते है. जब इस दुनिया में हम अपनी आँखे खोलते है। जब हम बोलना शुरु करते है तो हमारा पहला शब्द होता है माँ। इस धरती पर वो हमारी पहला प्यार, पहला शिक्षक और सबसे पहला दोस्त होती है । अपने जीवन मे वो हमें पहली प्राथमिकता देती है और हमारे बुरे समय में उम्मीद की झलक देती है। जिस दिन हम पैदा होते है वो माँ ही होती है जो सच में बहुत खुश हो जाती है। वो हमारे हर सुख-दुख का कारण जानती है और कोशिश करती है कि हम हमेशा खुश रहें। माँ और बच्चों के बीच में यहाँ एक खास बंधन होता है जो कभी खत्म नहीं हो सकता है। कोई माँ कभी भी अपने प्यार और परवरिश को अपने बच्चे के लिये कम नहीं करती और हमेशा अपने हर बच्चे को बराबर प्यार करती है लेकिन उनके बुढ़ापे में हम सभी बच्चे मिलकर भी उसे थोड़ा सा प्यार नहीं दे पाते है। इसके बावजूद वो हमें कभी गलत नहीं समझती और हमेशा एक छोटे बच्चे की तरह माफ कर देती है। वो हमारी हर बात को समझती और हम उसे बेवकूफ नहीं बना सकते है। वो नहीं चाहती कि हमें किसी दूसरे से तकलीफ पहुँचे और दूसरों से अच्छा व्यवहार करने की सीख देती है। माँ शब्द की कोई परिभाषा नहीं होती है यह शब्द अपनेआप में पूरा होता है। माँ शब्द को किसी भी तरह से परिभाषित नहीं किया जा सकता है। असहनीय शारीरिक पीड़ा के बाद एक बच्चे को जन्म देने वाली माँ को भगवान का दर्जा दिया जाता है क्योंकि माँ जननी होती है और भगवान ने माँ के द्वारा ही पूरी सृष्टि की रचना की है।

भगवान का एक रूप : माँ दुनिया में भगवान का एक दूसरा रूप होती है जो हमारे दुःख लेकर हमे प्यार देती है और अच्छा इंसान बनाती है। ऐसा माना जाता है कि भगवान हर किसी स्थान पर नहीं रह सकता इसलिए उसने माँ को बनाया है हालाँकि माँ के साथ कुछ महत्वपूर्ण क्षणों को वर्णित किया जा सकता है। हमेशा साथ रहने वाले भगवान के रूप में इस संसार में सभी के जीवन में माँ सबसे अलग होती है जो अपने बच्चों के सभी दुःख ले लेती है और उन्हें प्यार तथा संरक्षण देती है। हमारे शास्त्रों में माँ को देवी के समान पूजनीय माना जाता है। माँ हर मुश्किल घड़ी में अपने बच्चों का साथ देती है और अपने बच्चे को हर दुःख से बचाती है। माँ का महत्व : समाज और परिवार में माँ का बहुत महत्व होता है। माँ के बिना जीवन की उम्मीद भी नहीं की जा सकती है। अगर माँ न होती तो हमारा अस्तित्व भी नहीं होता। खुशी छोटी हो या बड़ी माँ उसमें बढ़-चढकर हिस्सा लेती है क्योंकि माँ के लिए हमारी खुशी ज्यादा मायने रखती है। माँ बिना किसी लालच के अपने बच्चे को प्यार करती है और बदले में केवल बच्चे से प्यार ही चाहती है। हर किसी के जीवन में माँ एक अनमोल इंसान होती है जिसके बारे में शब्दों में कहा नहीं जा सकता। एक माँ बच्चे की छोटी-से-छोटी जरूरत का ध्यान रखती है। माँ बिना किसी लाभ के हमारी प्रत्येक जरूरत का ध्यान रखती है। माँ की ममता : माँ अपने बच्चे की पसंद-नापसंद को सबसे बेहतर समझती है और बच्चे को सही गलत में अंतर करना सिखाती है। इस दुनिया में माँ की तुलना किसी और से नहीं की जा सकती है क्योंकि बच्चे को पालने के लिए माँ के जितना स्नेह, त्याग और अनुशासन कोई और नहीं कर सकता है।

माँ की आवश्यकता : हमारे लिए माँ सबसे अच्छा खाना बनाने वाली, सबसे अच्छी बातें करने वाले, सबसे अच्छा सोचने वाली और सभी दुखों के सामने पहाड़ की तरह खड़ी रहने वाली है लेकिन माँ जरूरत पड़ने पर अपने बच्चे के अच्छे भविष्य के लिए उसे डांट भी सकती है। माँ बच्चे को सही कामों के लिए सदैव समर्थन देती है। माँ हमेशा परिवार को एक बंधन में बांधकर रखती है। माँ अपने बच्चों के बारे में जानती है और माँ यह भी जानती है कि बच्चे को किस प्रकार सही रास्ता दिखाना है। माँ का सबसे अधिक समय संतान की देखभाल में ही गुजरता है। एक माँ ही संतान में संस्कार प्रदान करती है। एक माँ बच्चे की सबसे पहली गुरु होती है। केयर करना- यह बिल्कुल सच है कि माँ अपने बच्चों से ज्यादा शायद ही किसी से प्यार करती है। चाहे बच्चे कितने भी बड़े या शैतान क्यों न हो। क्योंकि, बचपन से लेकर बड़े होने तक माँ के केयरिंग नेचर में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं आता है। ऐसे में बच्चों को अपने माँ से फ्यूचर लाइफ के लिए बहुत ही जरूरी केयरिंग नेचर को सीखा जा सकता है। हालाँकि, यह सच है कि पेरेंट्स बनने के बाद यह नेचर खुद ब खुद डेवलप हो जाते हैं। जिम्मेदारी बच्चे के जन्म से लेकर उनके होश संभालने तक माँ हर वह एक काम को बखूबी निभाती हैं। इतना ही नहीं माँ के उपर बच्चे के खाने पीने से लेकर उन्हें स्कूल तक छोड़ने की रिस्पॉन्सबिलिटी उनके ऊपर होती है। ऐसे में बच्चों को अपनी माँ से जिंदगी के सबसे अहम सिख जिम्मेदारी को जरूर सीखनी चाहिए। क्योंकि, रिस्पॉन्सबिलिटी, कैसे निभाते हैं इसे मां से ज्यादा अच्छा और आसानी से कोई नहीं सीखा सकता।…….अनुशासन का पालन करना-  अपने से बड़ों और छोटे के साथ कैसे बात करनी है, इसकी सीख सबसे पहले घर में मौजूद माँ से ही मिलती है। उनकी हर कोशिश यही रहती है कि अपने बच्चों को अनुशासन का पाठ पढ़ाकर एक अच्छा इंसान बनाएं। ऐसे में बच्चों को प्रोफेशनल से लेकर पर्सनल लाइफ तक में काम आने वाली इस सीख को माँ से जरूर सीखनी चाहिए।

गुस्से पर काबू रखना- जिंदगी के सबसे अहम सीख में से एक है गुस्से पर काबू पाना। क्योंकि एक परिवार को बांधे रहने के लिए उन्हें अच्छी तरह से पता होता है कि क्या नजरअंदाज करना है और कब बोलना है। इतना ही नहीं, कई बार बच्चों के जवाब देने पर मां अक्सर सुनकर खामोश रह जाती हैं। ऐसे में इगो को साइड रखकर कैसे रिलेशनशिप को निभाते हैं इस बात को मां से बेहतर कोई नहीं समझा सकता।……भरोसा करना- हर रिश्ते की नीब भरोसे पर टिकी होती है, क्योंकि एक भरोसा ही होता है जो शादी के बाद नए घर से नए रिश्ते को जोड़ने का काम करता है। ऐसे में इसी भरोसे की चाहत अपने बच्चों और अपने आने वाली पीढ़ी से भी करती है।…….उपसंहार : आज की भाग दौड़ की जिंदगी में मनुष्य अपनी दूसरी परेशानियों या खुशियों को अधिक प्राथमिकता देते हैं और दूसरी बातों की वजह से अपनी जननी को नजर अंदाज कर देते हैं। हमें कभी-भी अपनी जननी को नहीं भूलना चाहिए क्योंकि उनके एहसान को हम कभी नहीं चुका सकते इसलिए आप अपनी खुशियों और दुखों में कहीं पर भी हों लेकिन अपनी माँ को न भूलें और न ही उसे कभी अकेला छोड़ें।

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