बंगाल का खेल, क्या प्रजातन्त्र का मरना और संविधान एक महज बुक होना माना जाए?

क्या हम आजाद है ? क्या हम बंधुआ मजदूर तो नहीं ? क्या देश में संविधान जिंदा है ? क्या देश में लोकतंत्र जिंदा है ? क्या बुलडोजर न्याय संवैधानिक है ? क्या इन्काउनटर असली न्याय है ? क्या आपका वोट का अधिकार खत्म हो चुका है ? यह सवाल बंगाल का खेल देखकर और देश की स्थिति देखकर आपको जायज लगता है ? जवाब आप ढूंढिए मैं पश्चिम बंगाल को खंघालता हूँ ।

अगर देश की असली कमान अमित शाह के पास है, और सरकार के कितने भी ख़राब प्रदर्शन के बाद चुनाव जिताने की चमत्कारिक शक्तियाँ उनके पास हैं, तो राहुल गाँधी और विपक्ष मोदी और यहाँ वहाँ क्यों निशाना लगा रहा है, और अमित शाह पर चुप क्यों है? तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर शनिवार को सोनारपुर में भीड़ ने हमला बोल दिया। वहां महिलाओं समेत सैकड़ों लोग उनके ऊपर टूट पड़े। अभिषेक को थप्पड़ मारे गए, अंडे फेंके गए और यहां तक कि शर्ट भी फाड़ दी गई। इस घटना के बाद बंगाल में सियासत तेज हो गई है। पूर्व सीएम ममता बनर्जी ने अपने भतीजे पर हुए हमले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि शासक ही हत्यारे बन गए हैं। भाजपा को शर्म आनी चाहिए। ममता बनर्जी ने अपने एक्स पर एक पोस्ट के जरिए इस मामले में भाजपा को घेरा है। बता दें कि जब अभिषेक पर हमला हुआ तो वहां पुलिस मौजूद नहीं थी, उन्हें भीड़ से बचने के लिए क्रिकेट हेलमेट पहनना पड़ा। हमले के बाद अभिषेक ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे भाजपा समर्थित गुंडों का काम बताया और कहा कि क्या वेस्ट बेंगल में लोकतंत्र बचा ही नहीं है?अभिषेक बनर्जी दोपहर में कलकत्ता हाई कोर्ट के नोटिस के बाद अपने कलिघाट रोड वाले घर से सोनारपुर के लिए निकले। रास्ते में कमल गाजी पर कुछ महिलाओं ने उन्हें काली झंडियां दिखाईं। लेकिन असली तूफान तो सोनारपुर पहुंचने पर आया।

सैकड़ों स्थानीय लोग, ज्यादातर महिलाएं, ‘चोर’ के नारे लगाते हुए उनके काफिले पर टूट पड़े। अभिषेक गाड़ी से उतरे और एक स्थानीय तृणमूल कार्यकर्ता की बाइक पर सवार होकर आगे बढ़े। इसी दौरान भीड़ ने उन्हें घेर लिया। कुछ महिलाओं ने थप्पड़ जड़ दिए, अंडे फेंके और उनकी शर्ट तक फाड़ दी। पत्थर भी चले, लेकिन निशाना चूक गए। अभिषेक ने तुरंत क्रिकेट हेलमेट पहन लिया ताकि सिर बच जाए। उन्होंने बाद में कहा- मैं पार्टी कार्यकर्ता संजू कर्माकर से मिलने गया था, जो चुनाव नतीजों के बाद हिंसा का शिकार हुआ। मुझे इस हालत का सामना करना पड़ा। हेलमेट की वजह से सिर बच गया। यह भाजपा समर्थित गुंडों का काम है।

सोशल मीडिया पर भाजपा का एक समर्थक का पोस्ट देखिये । TMC के नेता व ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के ऊपर हमला एक स्वस्थ लोकतन्त्र का हिस्सा ही है बंगाल के राजनीत में, काश यही परम्परा पूरे देश मे दोहराई जाय तो सत्ता से बाहर निकली पार्टियों के लिए एक सबक होगी कि जैसा बोओगे वैसा ही काटने को भी मिलेगा, मेरी आरजू है ईश्वर से कि यही परम्परा पूरे देश मे कानून बनाकर मोदी जी को लानी चाहिए। हर हर मोदी-घर घर मोदी, अब पुनः सवाल है -बंगाल का खेल, क्या प्रजातन्त्र का मरना और संविधान एक महज बुक होना माना जाए? क्या हम आजाद है ? क्या हम बंधुआ मजदूर तो नहीं ? क्या देश में संविधान जिंदा है ? क्या देश में लोकतंत्र जिंदा है ? क्या बुलडोजर न्याय संवैधानिक है ? क्या इन्काउनटर असली न्याय है ? क्या आपका वोट का अधिकार खत्म हो चुका है ? यह सवाल बंगाल का खेल देखकर और देश की स्थिति देखकर आपको जायज लगता है ? जवाब आप ढूंढिए —-।

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