मोदी मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल की सुगबुगाहट

शक्तिकांत दास होंगे नए वित्त मंत्री, निर्मला सीतारमण के हाथों में शिक्षा मंत्रालय की कमान! रितेश सिन्हा

केंद्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। सत्ता पक्ष के उच्चस्तरीय सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीसरे कार्यकाल का अब तक का सबसे बड़ा मंत्रिमंडलीय विस्तार और फेरबदल कर सकते हैं। पिछले कुछ दिनों से नई दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात तथा राष्ट्रपति से समय मांगे जाने के बाद अटकलों का बाजार और गर्म हो गया है। सूत्रों का कहना है कि अगले एक-दो दिनों में केंद्रीय मंत्रिपरिषद में व्यापक फेरबदल देखने को मिल सकता है, हालांकि सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। राजनीतिक गलियारों में सबसे अधिक चर्चा वित्त मंत्रालय को लेकर है। सत्ता पक्ष के सूत्रों का दावा है कि भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास को देश का नया वित्त मंत्री बनाया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जाएगा। वहीं वर्तमान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपे जाने की चर्चा है। माना जा रहा है कि सरकार आर्थिक प्रबंधन और शिक्षा क्षेत्र में नई कार्यशैली के साथ आगे बढ़ना चाहती है।

सूत्रों के अनुसार केवल वित्त मंत्रालय ही नहीं, बल्कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर तथा रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के मंत्रालयों में भी बदलाव संभव है। कई वरिष्ठ मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं, जबकि कुछ नए चेहरों को पहली बार केंद्रीय मंत्रिपरिषद में स्थान मिलने की संभावना है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोगी दलों को इस बार पहले से अधिक प्रतिनिधित्व मिलने के संकेत हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) को अतिरिक्त भागीदारी मिल सकती है। इसके साथ ही अन्य सहयोगी दलों को भी मंत्रिपरिषद में शामिल कर गठबंधन को और मजबूत करने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।

महाराष्ट्र इस विस्तार का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभर सकता है। सूत्रों के अनुसार शिवसेना की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. एकनाथ शिंदे के पुत्र एवं कल्याण से सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे का नाम सबसे आगे चल रहा है। उनके साथ धाराशिव से सांसद ओमराजे निंबालकर का नाम भी गंभीरता से विचाराधीन बताया जा रहा है। यदि शिवसेना को अपेक्षा से अधिक प्रतिनिधित्व मिलता है तो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) को भी मंत्रिपरिषद में अतिरिक्त भागीदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की ओर से राज्यसभा सदस्य एवं पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल का नाम सबसे प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा है। लंबे प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव के कारण उन्हें महत्वपूर्ण मंत्रालय मिलने की चर्चा है। इसके अलावा रायगढ़ से सांसद एवं प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है। वहीं मुंबई उत्तर से सांसद संजय दीना पाटिल के नाम पर भी शीर्ष स्तर पर विचार होने की चर्चा है। यदि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को दो या उससे अधिक मंत्री पद मिलते हैं तो यह महाराष्ट्र में गठबंधन की राजनीति के लिहाज से बड़ा संदेश माना जाएगा।

पश्चिम बंगाल से भी कई नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की चर्चा है। सूत्रों के अनुसार काकोली घोष दस्तिदार और शताब्दी राय के नामों पर विचार किया जा रहा है। वहीं पंजाब से भी नए प्रतिनिधियों को अवसर मिल सकता है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ सहित कुछ अन्य नेताओं की भूमिका में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। ओडिशा से सांसद अपराजिता सारंगी का नाम भी संभावित नए मंत्रियों की सूची में शामिल बताया जा रहा है। कर्नाटक से तेजस्वी सूर्या को मंत्रिमंडल में स्थान मिलने तथा प्रह्लाद जोशी की जिम्मेदारियों में बदलाव की चर्चा है। सूत्रों के अनुसार हरियाणा से एक, झारखंड से दो, आंध्र प्रदेश से एक, गोवा से एक, उत्तर प्रदेश से तीन, मध्य प्रदेश से दो तथा छत्तीसगढ़ से एक नए चेहरे को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किया जा सकता है। क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह पूरी कवायद की जा रही है।

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि मंत्रिमंडल विस्तार के साथ-साथ कुछ राज्यों में नेतृत्व परिवर्तन भी हो सकता है। राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर बदलाव की संभावनाओं पर मंथन चल रहा है। हालांकि इन अटकलों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह व्यापक फेरबदल होता है तो इसका उद्देश्य केवल मंत्रियों के विभाग बदलना नहीं होगा, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों, गठबंधन की मजबूती, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, प्रशासनिक दक्षता और राजनीतिक संदेश को ध्यान में रखते हुए नई टीम तैयार करना होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी प्रदर्शन और राजनीतिक आवश्यकताओं के आधार पर मंत्रिपरिषद में बड़े बदलाव करते रहे हैं।

हालांकि यह स्पष्ट है कि जब तक राष्ट्रपति भवन या प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक इन सभी नामों और संभावित बदलावों को केवल राजनीतिक चर्चाओं और सत्ता पक्ष के सूत्रों के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। अगले एक-दो दिनों में यदि मंत्रिमंडल विस्तार होता है तो यह साफ हो जाएगा कि इन चर्चाओं में कितनी सच्चाई थी और मोदी सरकार अपने तीसरे कार्यकाल की नई टीम को किस स्वरूप में देश के सामने प्रस्तुत करती है।

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