
80वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए देशवासियों से बड़े सपने देखने और ऊंचे संकल्प लेने का आह्वान किया. लगातार 13वीं बार तिरंगा फहराकर देश के इतिहास में एक नया कीर्तिमान स्थापित करने वाले प्रधानमंत्री ने करीब 76 मिनट लंबे अपने भाषण में ‘विकसित भारत 2047’ का खाका पेश किया. उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि भारत अब छोटे सपनों के साथ आगे नहीं बढ़ सकता; यह समय हमारा है, यह अवसर हमारा है और हमारे संकल्प दृढ़ होने चाहिए. यह स्वतंत्रता दिवस समारोह इस मायने में भी अभूतपूर्व रहा क्योंकि आजादी के बाद पहली बार लाल किले पर राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में इसकी विशेष गूंज सुनाई दी.

प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम अपने संदेश में युवाओं के लिए मुफ्त कोचिंग नेटवर्क से लेकर, परमाणु ऊर्जा के नए लक्ष्यों, महिला सुरक्षा, सेमीकंडक्टर और देश के भीतर सक्रिय ‘दिमागी नक्सलियों’ से निपटने जैसे कई बड़े ऐलान किए. प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत स्वतंत्रता संग्राम के वीर शहीदों और महापुरुषों को नमन करते हुए की. उन्होंने विशेष तौर पर उल्लेख किया कि इस वर्ष देश ‘वंदे मातरम’ का 150वां वर्ष मना रहा है. उन्होंने कहा, “यह एक ऐतिहासिक पल है। राष्ट्रीय गीत ने गुलामी के कालखंड में देश को एकजुट किया था, और आज 80वें स्वतंत्रता दिवस पर इसकी गूंज 140 करोड़ देशवासियों के दिलों में नए संकल्प फूंक रही है।” इसके साथ ही उन्होंने हाल के दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों में आई बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं. पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि भारत की सोच अब ‘फ्रैजाइल फाइव’ (कमजोर पांच अर्थव्यवस्थाओं) के दौर से बाहर निकलकर दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती आर्थिक महाशक्ति बनने की है.

उन्होंने कहा, “बड़े सपने सोच का विस्तार करते हैं। जब हमारे संकल्प ऊंचे होते हैं, तो कठिन से कठिन आपदाओं के बीच से भी रास्ते निकालने का सामर्थ्य अपने आप पैदा हो जाता है।” प्रधानमंत्री ने अपने तीसरे कार्यकाल में भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने का संकल्प दोहराया और कहा कि वह देश की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए तीन गुना अधिक गति से काम कर रहे हैं. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों और उनके परिवारों को बड़ी राहत देते हुए प्रधानमंत्री ने निशुल्क ऑनलाइन कोचिंग नेटवर्क की घोषणा की. उन्होंने कहा, “कोचिंग क्लासों का भारी-भरकम खर्च गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर एक बड़ा आर्थिक बोझ बनता जा रहा है। कई बार माता-पिता सामाजिक दबाव में बच्चों को इन केंद्रों में भेजते हैं।” इस समस्या के समाधान के लिए सरकार अपने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और देश के बेहतरीन शिक्षकों के माध्यम से एक ऐसा राष्ट्रीय नेटवर्क तैयार करेगी, जो विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करेगा, जिससे परिवारों के लाखों रुपये बचेंगे. इसके साथ ही उन्होंने घोषणा की कि अगले एक वर्ष में देश के 1 करोड़ युवाओं को एआई (Artificial Intelligence) स्किल्स की ट्रेनिंग दी जाएगी.
देश की आंतरिक सुरक्षा पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने ‘बौद्धिक या दिमागी आतंकवाद’ पर कड़ा प्रहार किया. उन्होंने कहा, “हथियारबंद नक्सली और माओवादी तो सुरक्षाबलों की कड़ाई के कारण खत्म हो चुके हैं या दम तोड़ रहे हैं, लेकिन देश के भीतर कुछ ‘दिमागी नक्सली’ (बौद्धिक नक्सली) अभी भी सक्रिय हैं, जो समाज में भ्रम फैलाते हैं और देश की प्रगति को रोकना चाहते हैं।” उन्होंने देशवासियों से अपील की कि समाज को ऐसे तत्वों को पहचानकर उन्हें पूरी तरह अलग-थलग करना होगा. आंतरिक सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए उन्होंने देश में एक व्यापक सिविल डिफेंस नेटवर्क (नागरिक रक्षा नेटवर्क) खड़ा करने की योजना भी साझा की. आत्मनिर्भर भारत के तहत रक्षा क्षेत्र का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि भारत स्वदेशी उन्नत तकनीकों जैसे हाइपरसोनिक सिस्टम, ड्रोन और काउंटर-ड्रोन प्लेटफॉर्म्स का वैश्विक हब बनने की ओर अग्रसर है. उन्होंने देश के स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम ‘सुदर्शन चक्र’ का विशेष रूप से उल्लेख किया और कहा कि इसका काम तेजी से चल रहा है. ऊर्जा सुरक्षा को देश की सबसे बड़ी जरूरत बताते हुए प्रधानमंत्री ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े लक्ष्यों का ऐलान किया.
उन्होंने कहा कि भारत ने 2047 तक 100 गीगावाट (GW) परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है. इस रणनीति के तहत इसी दशक के भीतर देश में 5 नए न्यूक्लियर रिएक्टर चालू कर दिए जाएंगे, जिसके लिए संसद में ‘शांति एक्ट’ (SHANTI Act) के जरिए मजबूत कानूनी ढांचा तैयार कर लिया गया है. प्रधानमंत्री ने देश की नीति निर्माण में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष बल दिया. उन्होंने लाल किले की प्राचीर से सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण को लागू करने में राजनीति से ऊपर उठकर सहयोग करें. मोदी ने कहा, “यह मुद्दा दशकों से राजनीति के अखाड़े का शिकार रहा है। मैं तिरंगे की छांव में सभी दलों से आग्रह करता हूं कि माताओं-बहनों के सम्मान में आगे आएं। आप चाहें तो इसका पूरा श्रेय खुद ले लें, मुझे कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन देश की बेटियों को उनका हक मिलना ही चाहिए।”
तकनीकी क्षेत्र में भारत की प्रगति का विवरण देते हुए उन्होंने कहा कि भारत अब केवल सेमीकंडक्टर पर चर्चा नहीं कर रहा, बल्कि देश के तीन प्लांटों में उत्पादन और निर्यात भी शुरू हो चुका है. आने वाले वर्षों में देश में 5 से 8 नए सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित किए जाएंगे. खेलों के क्षेत्र में भारत के भविष्य को संवारने के लिए पीएम मोदी ने बताया कि साल 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी की तैयारी के साथ-साथ भारत कम से कम तीन-चौथाई स्पर्धाओं में हिस्सा लेगा. इसके लिए 5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए देशव्यापी टैलेंट हंट (प्रतिभा खोज अभियान) शुरू किया जा रहा है, ताकि उन्हें विश्व स्तरीय एथलीट बनाया जा सके.
वैश्विक मोर्चे पर चल रहे तनावों जैसे यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संकट पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने भारत को दुनिया का विश्वसनीय मित्र (‘विश्वमित्र’) बताया. उन्होंने समुद्र और प्राकृतिक संसाधनों के सैन्यीकरण (Weaponisation) पर चिंता जताई और इसके विकल्प के रूप में भारत की ‘ग्रीन एंड ब्लू इकोनॉमी’ (हरित एवं समुद्री अर्थव्यवस्था) को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई. उन्होंने बांग्लादेश के घटनाक्रम पर भी चिंता व्यक्त करते हुए वहां रह रहे हिंदुओं और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की उम्मीद जताई. इसके साथ ही उन्होंने देश में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ और ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड’ (समान नागरिक संहिता) जैसे महत्वपूर्ण सुधारों को गति देने की बात भी कही. भाषण के समापन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की युवा शक्ति, वैज्ञानिकों, किसानों और सैनिकों के सामर्थ्य पर पूरा भरोसा जताया. उन्होंने कहा कि भारत का यह कालखंड एक ‘स्वर्ण युग’ की तरह है और 140 करोड़ नागरिकों का सामूहिक प्रयास ही देश को उसकी खोई हुई वैश्विक प्रतिष्ठा वापस दिलाएगा. उनके भाषण की समाप्ति के बाद लाल किले के प्राचीर पर राष्ट्रगान की धुन गूंजी. मंच से उतरकर प्रधानमंत्री ने हमेशा की तरह वहां मौजूद एनसीसी कैडेट्स, स्कूली बच्चों और अतिथियों के बीच जाकर उनसे मुलाकात की, जिससे वहां मौजूद युवाओं में एक नया जोश और देशभक्ति का संचार देखने को मिला.




