‘कॉकरोच आंदोलन पार्ट 2’ महज़ एक छात्र प्रदर्शन नहीं रहेगा बल्कि यह देश के डिजिटल रूप से सक्रिय ‘जेन-जी’ (Gen Z) युवाओं का एक संगठित राजनीतिक दबाव रहेगा। संगठन, सोशल मीडिया रील्स और युवाओं के गुस्से के दम पर स्थापित व्यवस्था हिलेगा।

भारत की युवा राजनीति और डिजिटल विमर्श में इस समय सबसे बड़ा भूचाल ‘कॉकरोच आंदोलन पार्ट 2′ (Cockroach Movement Season 2) को लेकर आया हुआ है। सोशल मीडिया के मीम्स से शुरू हुए इस डिजिटल छात्र आंदोलन ने देश के तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तक करा दिया था। अब यह आंदोलन अपने दूसरे चरण या ‘सीज़न-2’ के साथ और अधिक आक्रामक और व्यापक होकर देश की राजनीति के केंद्र में लौट आया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि “जंतर-मंतर का सीज़न-2 बहुत जल्द शुरू होने वाला है”। इस बार इस आंदोलन का सीधा मुकाबला देश के बुनियादी ढांचे, बदहाल स्कूलों और युवाओं के साथ हो रहे कथित दमन के खिलाफ है। इस नए ऐलान के बाद एक बार फिर सत्ता पक्ष और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच हंगामा बरपा हुआ है। इस आंदोलन की जड़ें मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट की एक कथित टिप्पणी से जुड़ी हैं, जिसमें प्रदर्शनकारियों या याचिकाकर्ताओं के लिए कथित रूप से ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल हुआ था। देश के नाराज युवाओं, बेरोजगारों और छात्रों ने इसे अपने आत्मसम्मान पर चोट माना और सोशल मीडिया पर एक लाइन वायरल हो गई: “अगर हक मांगना कॉकरोच होना है, तो हां हम सब कॉकरोच हैं।” पहले चरण की अभूतपूर्व सफलता के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने खुद को एक संगठित राष्ट्रीय ढांचे में बदल लिया है और अभिजीत दीपके इसके राष्ट्रीय संयोजक बने हैं। ‘पार्ट 2’ के तहत आंदोलन ने अपने तेवर और मांगें बदल दी हैं। इसके मुख्य एजेंडे इस प्रकार हैं। सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका के अनुसार, आंदोलन के दूसरे हिस्से का मुख्य फोकस देश के प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा ढांचे को सुधारना है। उन्होंने दावा किया कि आजादी के बाद से लगातार सरकारी स्कूलों की अनदेखी की गई है और पिछले कुछ वर्षों में देश भर में 94,000 सरकारी स्कूल बंद हुए हैं। CJP की टीमें अब देश भर के गांवों का दौरा करेंगी, सरपंचों का सहयोग लेंगी और सरकार से स्कूलों की स्थिति सुधारने की मांग करेंगी। आंदोलनकारियों का आरोप है कि 25 जुलाई को सरकार के साथ हुए समझौते के तहत देश भर के प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज सभी FIR वापस लेने का वादा किया गया था। लेकिन उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में पुलिस अभी भी छात्रों और वॉलंटियर्स को हिरासत में ले रही है और प्रताड़ित कर रही है। पार्ट 2 इस प्रशासनिक दमन के खिलाफ एक सीधी जंग है। हाल ही में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा द्वारा लॉ (कानून) के छात्रों के खिलाफ सामूहिक रूप से पारित एक आदेश को सीजेपी ने ‘गैरकानूनी और तानाशाही’ करार दिया। सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने चेतावनी दी कि यदि छात्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई और आदेश वापस नहीं लिए गए, तो देश भर के युवा कॉकरोच और वकील सड़कों पर उतरेंगे। इस भारी दबाव के चलते आखिरकार बीसीआई को बैकफुट पर आना पड़ा और अपना फैसला वापस लेना पड़ा। कॉकरोच आंदोलन के इस ‘सीज़न-2’ के ऐलान के बाद देश का राजनीतिक पारा एक बार फिर सातवें आसमान पर पहुंच गया है। दिल्ली के नारायणा में सीजेपी के स्वयंसेवकों (Volunteers) की एक इनडोर मीटिंग होनी थी। अभिजीत दीपके ने लाइव आकर गंभीर आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दबाव में दिल्ली के हॉल मालिकों को धमकियां दी जा रही हैं कि जो भी ‘कॉकरोचों’ को जगह देगा, उसे उल्टा लटका दिया जाएगा। रसीद और बुकिंग होने के बावजूद अंतिम समय पर मीटिंग रद्द करनी पड़ी, जिससे छात्रों का गुस्सा भड़क गया। सत्ताधारी बीजेपी इस आंदोलन के बढ़ते प्रभाव और राजनीतिक नुकसान से बेहद सतर्क है। हाल ही में हुए एक उपचुनाव में बीजेपी की हार को भी इसी छात्र असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है। सत्ता पक्ष के कुछ विश्लेषकों का आरोप है कि यह आंदोलन ‘शाहीन बाग पार्ट-2’ या ‘अर्बन नक्सल’ ताकतों का नया रूप बनता जा रहा है, जिसमें सरकार विरोधी एजेंडा चलाया जा रहा है। आंदोलनकारी अब सीधे देश के गृह मंत्री अमित शाह को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। दीपके ने मांग की है कि 20 जुलाई को छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल के लिए गृह मंत्री को संसद में आकर माफी मांगनी चाहिए। ‘कॉकरोच आंदोलन पार्ट 2’ महज़ एक छात्र प्रदर्शन नहीं रह गया है, बल्कि यह देश के डिजिटल रूप से सक्रिय ‘जेन-जी’ (Gen Z) युवाओं का एक संगठित राजनीतिक दबाव समूह बन चुका है। एक ऐसा संगठन जिसका कोई औपचारिक दफ्तर या विशाल फंड नहीं है, वह केवल सोशल मीडिया रील्स और युवाओं के गुस्से के दम पर स्थापित व्यवस्था को हिला रहा है। आने वाले दिनों में जंतर-मंतर पर शुरू होने वाला यह ‘सीज़न-2’ तय करेगा कि देश की राजनीति में युवाओं की इस नई ‘अदृश्य’ ताकत का भविष्य क्या होने वाला है।




