कैसे सुरक्षित रहेंगी बेटियां, नोचते रहें दरिंदे और चिखती रही मासूम

है। हैवानियत इस कदर इंसान के सर चढ़कर बोलने लगे कि हवस की भूख को मिटाने के लिए लाचार, मासूम और बेबस बच्चियों को भी न छोड़ा। क्या इन बलात्कारी इंसान के रुप में भेड़िये को नोचने के लिए मासूम बच्चियां की मिली थी?

मासूम बच्चियों के साथ दरिंदगी इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली घटना है। हैवानियत इस कदर इंसान के सर चढ़कर बोलने लगे कि हवस की भूख को मिटाने के लिए लाचार, मासूम और बेबस बच्चियों को भी न छोड़ा। क्या इन बलात्कारी इंसान के रुप में भेड़िये को नोचने के लिए मासूम बच्चियां की मिली थी? जिन्हें यहां तक तक समझ नहीं कि उनके साथ क्या हो रहा है! घटना मुजफ्फरपुर जिले के शाहपुर रोड पर स्थित बालिका गृह का है। जहां देखरेख और बालिकाओं के संरक्षण के लिए उन्हें रखा जाता था। संरक्षण के बदले इन बच्चियों के साथ लगातार बलात्कार की घटना को अंजाम दिया जाता रहा। इस बालिका गृह में 44 बच्चों में से 34 के साथ जबरन रेप करने की घटना की पुष्टि हो चुकी है। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (TISS) नामक संस्था की रिपोर्ट के बाद जब मामला प्रकाश में आया तो हैवानियत भी शर्मसार हो गई। इस संस्था के संचालन की जिम्मेवारी राज्य सरकार द्वारा गैर सरकारी संस्था (NGO) सेवा संकल्प एवं विकास समिति को सौंपा गया था। इस संस्था के संचालक और पेशे से पत्रकार ब्रजेश ठाकुर, जो पत्रकारिता की आड़ में बालिका गृह में रहने वाली बच्चियों के साथ ऐसा घिनौना काम किया करता था। जिसे सुनकर आपकी रूह कांप उठेगा। ब्रजेश ठाकुर इन बच्चियों से जबरन बलात्कार या यूं कहे तो इनसे अवैध देह व्यापार का धंधा भी कराया करता था। इनके साथ लगातार रेप की घटना को अंजाम दिया जाता था। पत्रकारिता को आगे रखकर कुकर्म कर रहे ब्रजेश ठाकुर अपने गुनाहों पर पर्दा डालने के लिए इन मासूम सी नाबालिग बच्चियों को विभिन्न ओहदे पर बैठे राजनेता, समाज-सेवी, पत्रकार और अफसरों के सामने परोस दिया करता था। फिर यह लोग इन मासूमों को भेड़िए की तरह नोच खाते या दूसरे शब्दों में कहें तो अपना हवस की भूख को मिटाते थे। इन लोगों को मासूमों के जिंदगी तहस-नहस करने में जरा भी हिचक नहीं आई।

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