हमारी मातृभाषा की महिमा अपरंपार है

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह, सहज़,हरदा, मध्य प्रदेश,

हिंदी हैं,हम, हम वतन है हिंदुस्तां हमारा है, महक रहा विश्व भर में गान ये हमारा है।
हमारी मातृभाषा की महिमा अपरंपार है, यह भारत की धड़कन,ये ही चमत्कार है।
​कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक, पूरब से पश्चिम के हर एक वीर तक,
ये सबको एक सूत्र में जो पिरोती है, मचलती हुई हिंदी की ही ज्योति है।
​विविधताओं के हमारे देश महान में, एकता का रंग भरती हर एक गान में।
खान-पान रूप-रंग भले हमारे अनेक हैं, मगर हिंदी से जुड़े हर एक के विवेक हैं।
​ऋषियों की वाणी, और वेदों का सार है, तुलसी और कबीर का इसमें प्यार है।
निर्मल,​सरल इतनी बहती धारा नीर सी, गंभीर और विशाल अंबर के ये तीर सी।
जैसी बोली जाए वैसी लिखी जाती है, हर जुबां पर यह मिश्री सी घुल जाती है।
​विदेशी भाषाओं की चमक चकाचौंध में, इसका प्रकाश कम न हुआ अवरोध में।
यह हमारी आन, हमारी शान है, सुनलो, पूरे भारतवर्ष की यह जान है सुनलो।
​आओ सब मिलकर अलख जगाएँ हम, अपनी मातृभाषा का मान बढ़ाएँ हम।
जब तक गगन में चमकें ये चाँद-तारें, हिंदी के मुश्ताक़ हम सिपाही न्यारे प्यारे।

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