डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह,सहज़,हरदा,मध्य प्रदेश

आज के दौर में इंसानी रिश्तों का तक़द्दुस जिस तेज़ी से पामाल हो रहा है, वह फ़िक्र-अंगेज़ भी है और तकलीफ-देह भी। एक वक़्त था जब ख़ुशियाँ बाँटने से बढ़ती थीं, मगर आज का अलमिया यह है कि “किसी की खुशी को बर्दाश्त करना” एक बहुत बड़ा इम्तिहान बन चुका है। आज के दौर में इंसानी रिश्तों का तक़द्दुस जिस तेज़ी से पामाल हो रहा है, वह फिक्र-अंगेज़ भी है और तकलीफ-देह भी। हम जिस माशरे में साँस ले रहे हैं, वहाँ लोग शायद आपकी परेशानी पर तो हमदर्दी का दिखावा कर लें, मगर आपकी मुस्कुराहट और आपकी कामयाबी को हज़म करना उनके लिए नामुमकिन होता जा रहा है। आज के रिश्ते खुलूस के बजाय मवाज़ने और हसद की भेंट चढ़ रहे हैं। कोई भी यह नहीं देखना चाहता कि आप उनसे ज़्यादा खुश क्यों हैं, या आपकी ज़िंदगी में सुकून क्यों है। इस क़ौल का मतलब खुदगर्ज़ी नहीं, बल्कि अपनी ज़हनी सुकून की हिफ़ाज़त है। अक्सर लोग अपनी ज़ुबान या अपनी हसद भरी नज़रों से आपकी खुशियों को गहन लगा देते हैं। आपकी खुशी का एड्रेस यानी आपकी कामयाबी का ज़रिया, आपके घर के हालात, आपकी खुशी के अस्बाब,अगर यह सब खुली किताब की तरह हर किसी के सामने होंगे, तो लोग इसे पढ़ कर नहीं, बल्कि इसे जला कर खुश होंगे। हर शख़्स आपकी ख़ुशी में शरीक़ नहीं होता, बहुत से लोग सिर्फ़ आपकी ख़ुशी को अपनी नाकामी समझ कर आपके सुकून के दर-पए हो जाते हैं।

अपनी खुशियों को राज़ में रखना सीखें। जब आप अपनी खुशियों को दूसरों की नज़रों से बचा कर अपने अंदर महसूस करना शुरू कर देते हैं, तो आपकी ख़ुशी का मेयार बदल जाता है। वह ख़ुशी फ़िर किसी की मोहताज नहीं रहती, वह आपके अपने वज़ूद का हिस्सा बन जाती है। याद रखें, आपका घर यानी आपका दिल और आपकी ज़िंदगी इतना कीमती है कि उसे हर किसी के लिए खोलना दानिशमंदी नहीं है। अपनी खुशियों को सिर्फ़ उन लोगों के साथ शेयर करें जो आपकी कामयाबी पर ख़ुद को कामयाब समझें, जो आपकी ख़ुशी में आपसे ज़्यादा मुस्कुराएँ। बाकी दुनिया के लिए एक पुर-असरार दरवाज़ा बन जाएँ। अपनी खुशियों का एड्रेस अपने तक, और सिर्फ़ अपने सच्चे और मुख़लिस लोगों तक महदूद रखें, क्योंकि आज के दौर में ख़ामोश रहना और अपनी खुशियों को छुपाना ही सबसे बड़ी हिफ़ाज़त है।




