चुनावी सरगर्मियों के बीच विपक्षी ‘INDIA’ गठबंधन 1 नवंबर 2026 को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ महारैली के जरिए एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन करने जा रहा है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में होने वाली इस रैली का मुख्य उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करना और चुनावी प्रक्रियाओं में कथित गड़बड़ियों व ‘वोट चोरी’ के खिलाफ केंद्र सरकार को घेरना है। इस महारैली और इससे जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त का विरोध: विपक्ष मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनावी प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लामबंद है।
वोट और संविधान की रक्षा: राहुल गांधी के अनुसार, यह लड़ाई किसी एक दल की नहीं बल्कि देश के संविधान, लोकतंत्र और हर नागरिक के वोट देने के अधिकार को बचाने की है।

राहुल गांधी के गंभीर आरोप
कार्यकर्ताओं को रोकने का दावा: राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह पर आरोप लगाया है कि वे उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, तेलंगाना और पंजाब जैसे राज्यों से दिल्ली आ रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं और आम लोगों को रोकने की कोशिश कर रहे हैं।
विपक्ष की एकजुटता: उन्होंने कहा कि पूरा विपक्ष इस आंदोलन में एक साथ खड़ा है और सरकार चाहे जितनी कोशिश कर ले, रामलीला मैदान में लोगों का गुस्सा साफ दिखेगा।
जंतर-मंतर के बाद नया राजनीतिक केंद्र- अक्टूबर 2026 में दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर-मंतर को आधिकारिक धरना स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद, रामलीला मैदान में होने वाला यह पहला इतना बड़ा राष्ट्रीय राजनीतिक विरोध प्रदर्शन है। दिल्ली पुलिस ने कुछ शर्तों के साथ इस रैली के आयोजन के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी किया है।

रैली से जुड़े विवाद और चुनौतियाँ
व्यापारियों का विरोध: दिल्ली के स्थानीय व्यापारियों ने त्योहारों के सीजन का हवाला देते हुए राहुल गांधी से इस रैली को आगे बढ़ाने की अपील की है, क्योंकि इससे बाजारों में बड़े नुकसान की आशंका है।
ट्रैफिक प्रतिबंध: इस महारैली के कारण 1 नवंबर को मध्य दिल्ली (Central Delhi) के कई हिस्सों में भारी ट्रैफिक डायवर्जन और पाबंदियां रहने की संभावना है। यह रैली न केवल केंद्र सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर रही है, बल्कि आगामी राज्य चुनावों से पहले ‘INDIA’ गठबंधन के भीतर कांग्रेस की भूमिका और राहुल गांधी के नेतृत्व की भी एक बड़ी परीक्षा साबित होगी।




