मशहूर पंजाबी गायक-अभिनेता दिलजीत दोसांझ और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के बीच महीनों से चला आ रहा सोशल मीडिया विवाद आखिरकार दिल्ली कॉन्सर्ट के बाद नाटकीय मोड़ पर आकर समाप्त हो गया है।

दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित दिलजीत दोसांझ के दिल-लुमिनाटी (Dil-Luminati Tour 2026) के भव्य कॉन्सर्ट के दौरान मंच से मिले कड़े जवाब के बाद, सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए इंस्टाग्राम पर एक खुला पत्र जारी किया है। दीपके ने सुलह का संदेश देते हुए लिखा, “बाकी पाजी, छोटा भाई समझकर अब मिट्टी डालो।” यह खबर वर्तमान में सोशल मीडिया पर एक बड़े चर्चा का विषय बनी हुई है। ‘छोटा भाई समझकर अब मिट्टी डालो’: दिलजीत दोसांझ के दिल्ली कॉन्सर्ट के बाद CJP प्रमुख अभिजीत दीपके का ‘यू-टर्न’, मांगी सार्वजनिक माफ़ी मनोरंजन की चकाचौंध और सामाजिक-राजनीतिक सक्रियता (Social-Political Activism) के बीच का टकराव अक्सर बड़े विवादों को जन्म देता है। ऐसा ही एक हाई-प्रोफाइल विवाद पिछले कुछ महीनों से इंटरनेट पर छाया हुआ था, जिसमें एक तरफ थे वैश्विक पटल पर भारत का नाम चमकाने वाले रॉकस्टार गायक दिलजीत दोसांझ और दूसरी तरफ थे युवाओं और छात्रों के मुद्दों पर मुखर रहने वाली राजनीतिक संस्था ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के प्रमुख अभिजीत दीपके। दिल्ली में हुए दिलजीत के भव्य कॉन्सर्ट में दोनों के बीच की कड़वाहट अब सुलह में बदल गई है, जब दीपके ने पुरानी बातों पर मिट्टी डालने का आग्रह किया है। इस पूरे विवाद की शुरुआत जून 2026 में देशव्यापी ‘नीट (NEET) पेपर लीक’ और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान हुई थी। उस वक्त शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ विपक्ष और छात्र संगठन सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी बीच एक इंस्टाग्राम लाइव सेशन के दौरान जब एक प्रशंसक ने दिलजीत दोसांझ से पूछा कि क्या वे इस छात्र प्रदर्शन का हिस्सा बनेंगे या इस पर अपनी आवाज उठाएंगे, तो दिलजीत ने बेहद शालीनता से खुद को इस राजनीतिक विवाद से अलग कर लिया था।

दिलजीत ने कहा था, “भाई, मुझे इन प्रदर्शनों और राजनीति से दूर ही रखो। मैं एक आर्टिस्ट हूँ, राजनेता नहीं।” दिलजीत की यह ‘खामोशी’ सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके को नागवार गुजरी। दीपके और उनके समर्थकों ने सोशल मीडिया पर तर्क दिया कि जो दिलजीत साल 2020 के ऐतिहासिक ‘किसान आंदोलन’ के दौरान इतने बेबाक और मुखर थे, वह आज देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य (NEET परीक्षा लीक) से जुड़े मुद्दे पर खुद को सिर्फ एक ‘कलाकार’ बताकर पल्ला क्यों झाड़ रहे हैं? सीजेपी के मंच से न केवल दिलजीत के इस रुख की आलोचना की गई, बल्कि कुछ मौकों पर उनकी आने वाली फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर भी तीखी टिप्पणियां की गईं। अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में जब दिलजीत दोसांझ अपने ‘ऑरा इंडिया टूर 2026’ के तहत नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में शो करने पहुंचे, तो पूरा स्टेडियम खचाखच भरा हुआ था। अपने गानों की परफॉर्मेंस के बीच में दिलजीत ने बिना किसी का नाम लिए सीजेपी और अभिजीत दीपके के उन आरोपों का बेहद आक्रामक और भावुक अंदाज में जवाब दिया। मंच से माइक्रोफोन थामे दिलजीत ने दहाड़ते हुए कहा, “मैं एक कलाकार हूँ, अगर मैं चुप हूँ तो मुझे चुप ही रहने दीजिए। मैं आप सभी से प्यार करता हूँ, लेकिन पंजाबियों को लड़ना मत सिखाइए। जिस फिल्म (‘सतलुज’) का आप मंचों पर मज़ाक उड़ा रहे हैं, वह मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है और उस फिल्म को लाने के लिए हमने बहुत लंबा संघर्ष किया है।” दिलजीत के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तुरंत आग की तरह फैल गया। दिलजीत दोसांझ द्वारा मंच से मिले इस कड़े और स्पष्ट संदेश के बाद, अभिजीत दीपके ने देर रात अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर दिलजीत के नाम एक बेहद लंबा और भावुक खुला पत्र साझा किया। इस पत्र में उन्होंने स्वीकार किया कि वह खुद दिलजीत के बहुत बड़े प्रशंसक रहे हैं और इसी साल मई में भारत लौटने से ठीक पहले उन्होंने शिकागो में दिलजीत का लाइव कॉन्सर्ट भी अटेंड किया था।

दीपके ने अपनी पोस्ट में लिखा:
“पाजी, जून में जब हम सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे थे, तब आपकी उस टिप्पणी (‘मैं सिर्फ एक आर्टिस्ट हूँ’) से मुझे थोड़ा दुख हुआ था। ऐसा इसलिए नहीं था कि मेरे मन में आपके लिए व्यक्तिगत तौर पर कोई नफ़रत थी, बल्कि इसलिए था क्योंकि मैंने हमेशा आपको एक ऐसे व्यक्ति के रूप में देखा है जो जनता के हक में अपनी आवाज़ उठाता है।”
उन्होंने आगे कहा कि किसी एक असहमति या गलतफहमी की वजह से दिलजीत के प्रति उनका सम्मान कम नहीं होता। वह दिलजीत के उस साहस की सराहना करते हैं जिसके दम पर उन्होंने भारतीय और पंजाबी संस्कृति को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दी है। “छोटा भाई समझकर मिट्टी पाओ” अपने लंबे माफीनामे के अंत में दीपके ने एक बड़े भाई से छोटे भाई की खता माफ़ करने के पारंपरिक अंदाज में लिखा, “बाकी पाजी, छोटा भाई समझकर अब मिट्टी पाओ (मिट्टी डालो)।” इसके साथ ही उन्होंने इस कड़वाहट को पूरी तरह भुलाने के लिए दिलजीत के ही ब्लॉकबस्टर गाने ‘G.O.A.T’ की एक मशहूर लाइन भी लिखी— “गबरू ता वैरी नूं वी मिठा बोलदा, नी तू तां फेर जट्ट दा प्यार गोरिए।” (यानी गबरू तो अपने दुश्मन से भी मीठा बोलता है, तुम तो फिर भी प्यार हो।)

सोशल मीडिया पर जनता की प्रतिक्रिया
इस माफीनामे के बाद इंटरनेट की जनता और नेटिज़न्स (Netizens) दो धड़ों में बंट गए हैं। कुछ लोग अभिजीत दीपके के इस कदम की सराहना कर रहे हैं कि उन्होंने समय रहते अपनी गलती मानी और शालीनता दिखाई। वहीं दूसरी ओर, दिलजीत के फैंस सीजेपी प्रमुख को ट्रोल करते हुए लिख रहे हैं कि बिना पूरी बात जाने किसी बड़े वैश्विक कलाकार की देशभक्ति या सामाजिक चेतना पर सवाल उठाना गलत था और कॉन्सर्ट में मिली ‘फटकार’ के डर से दीपके ने यह यू-टर्न लिया है। बहरहाल, अभिजीत दीपके की इस भावुक पोस्ट ने इस विवाद पर पूरी तरह से पूर्णविराम लगा दिया है। यह घटना साबित करती है कि कला और कलाकारों की अपनी एक सीमा और अपनी एक ताकत होती है, और उन्हें ज़बरदस्ती किसी भी राजनीतिक एजेंडे में घसीटना हमेशा सही नहीं होता।




