गाली गलौज राजनीति का युग, विकास की खोज में जनता,,

लोकतंत्र में असहमति और तीखे तंज की अपनी एक जगह है, लेकिन जब तीखापन बदजुबानी और गाली-गलौज में बदल जाए, तो वह पूरे समाज को बीमार बनाता है। गाली-गलौज और निजी लांछनों की कीचड़ में डूबी समकालीन राजनीति ने बुनियादी मुद्दों को हाशिए पर धकेल दिया है, जिससे त्रस्त जनता अब विकास की वास्तविक खोज … Continue reading गाली गलौज राजनीति का युग, विकास की खोज में जनता,,