डिजिटल युग में भटकाव और विद्यार्थी जीवन का यथार्थ,,,

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह,सहज़,हरदा, मध्य प्रदेश

समय का मोल और छात्र जीवन,वर्तमान पीढ़ी के लिए एक गंभीर चेतावनी,आज का दौर तकनीक और डिजिट्ल माध्यमों का है, जहाँ सूचना और मनोरंजन की भरमार है। लेकिन इस डिजिटल चकाचौंध के बीच आज की युवा पीढ़ी और छात्र वर्ग अपने मूल उद्देश्य से भटकता हुआ नज़र आ रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अंतहीन रील्स और शॉर्ट्स देखने में घंटों बिता देना आज के युवाओं की सबसे बड़ी कमजोरी बनता जा रहा है। यह एक कड़वी सच्चाई है कि आज छात्र मोबाइल स्क्रीन पर अपना क़ीमती समय बर्बाद कर रहे हैं। वे यह भूल जाते हैं कि इंटरनेट पर रील्स और शॉर्ट्स तो हर रोज़ नए आते रहेंगे और उनका सिलसिला कभी ख़त्म नहीं होगा, लेकिन यह अमूल्य छात्र जीवन (स्टूडेंट लाइफ) जीवन में दोबारा कभी लौटकर नहीं आएगा। आज का यह अस्थायी मनोरंजन कल के गहरे पछतावे का कारण बन सकता है। किताबों से बढ़ती दूरी और धुंधलाता लक्ष्य, सुविधाओं की अधिकता ने आज के विद्यार्थियों को किताबों से दूर कर दिया है। तात्कालिक आराम और मनोरंजन के चक्कर में पढ़ाई से विमुख होना युवाओं को उनकी मंजिल से कोसों दूर कर रहा है। आज किताबों से बनाई गई दूरी भविष्य में सफ़लता के रास्ते को बेहद कठिन बना देती है, जिससे मंजिल बहुत दूर नज़र आने लगती है।


संभलने का सही समय यही है, समय किसी के लिए नहीं रुकता। बीता हुआ वक्त और विद्यार्थी जीवन का यह स्वर्णिम काल कभी वापस नहीं आ सकता। यह साफ़ है कि यदि युवाओं को अपना भविष्य संवारना है, तो उन्हें समय रहते इस भटकाव को पहचानना होगा और ख़ुद को संभालना होगा। संपादकीय का सीधा संदेश यही है कि आज के सभी विद्यार्थियों को अपनी प्राथमिकताओं को फिर से तय करना होगा। यदि आप एक उज्ज्वल और सुरक्षित भविष्य का निर्माण करना चाहते हैं, तो मोबाइल और फालतू के भटकावों को छोड़कर अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित करना ही एकमात्र विकल्प है। वक्त रहते संभल जाना ही समझदारी है, क्योंकि आज की मेहनत ही कल की सफलता की इबारत लिखती है।

Change Language