गांधी जयंती, ‘शांतिदूत’ का चश्मा और अशांत भारत का हाई-वोल्टेज ड्रामा

“दे दी हमें आजादी बिना खड्ग बिना ढाल, साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल…” हर साल 2 अक्टूबर को जब सुबह-सुबह लाउडस्पीकर पर यह भजन बजता है, तो दिल में एक अजीब सा सूकून उतर आता है। लेकिन तभी अचानक खिड़की से बाहर झांकिए—कहीं लाठियां चटक रही हैं, कहीं सोशल मीडिया पर ‘ट्रेंडिंग नफरत’ … Continue reading गांधी जयंती, ‘शांतिदूत’ का चश्मा और अशांत भारत का हाई-वोल्टेज ड्रामा