उन्होंने सफ़ेद काग़ज़ पर अपने जज़्बात की रोशनाई बिखेरनी शुरू की….
डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह, सहज़,हरदा, मध्य प्रदेश शाम की हल्की सुरमई रोशनी कमरे की खिड़की से छन कर मेज़ पर रखी खाली कॉपी और सूखे हुए क़लम पर पड़ रही थी। बाहर दरख़्तों के पत्ते हवा के हल्के झोंकों से बिछड़ने का मातम कर रहे थे। मुश्ताक़ ने बिस्तर की पुश्त से टेक लगाई और … Continue reading उन्होंने सफ़ेद काग़ज़ पर अपने जज़्बात की रोशनाई बिखेरनी शुरू की….
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