धर्म का वास्तविक मर्म,संस्कार, विवेक और सामाजिक समरसता

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह ,सहज़, हरदा, मध्य प्रदेश भारतीय चिंतन परंपरा में ‘धर्म’ शब्द कभी भी किसी संकीर्ण संप्रदाय, पूजा-कर्मकांड या विशिष्ट उपासना पद्धति तक सीमित नहीं रहा। हमारी ऋषि-परंपरा और सांस्कृतिक चेतना ने धर्म को सदैव ‘धारण करने योग्य उत्कृष्ट जीवन-मूल्यों’ के रूप में देखा है। अर्थात् जो तत्व समाज को एक सूत्र में … Continue reading धर्म का वास्तविक मर्म,संस्कार, विवेक और सामाजिक समरसता