लोकतंत्र की बुनियाद जनता के भरोसे और नागरिक अधिकारों पर टिकी होती है। जब इसी लोकतंत्र में नागरिकों की आवाज को लाठियों के दम पर दबाया जाने लगे, जब हवा में संवाद की जगह आँसू गैस का धुआँ तैरने लगे, और जब वर्दी की आड़ में छिपे असामाजिक तत्व शांतिपूर्ण
लोकतंत्र की बुनियाद जनता के भरोसे और नागरिक अधिकारों पर टिकी होती है। जब इसी लोकतंत्र में नागरिकों की आवाज को लाठियों के दम पर दबाया जाने लगे, जब हवा में संवाद की जगह आँसू गैस का धुआँ तैरने लगे, और जब वर्दी की आड़ में छिपे असामाजिक तत्व शांतिपूर्ण