उजली चुनर अहिंसा की दागदार हो गई,
गाँधी और गफ्फार की मेहनत बेकार हो गई।

नन्हीं सी लौ ने किया जव चहुँ दिस उजियार, देख हौसला दीप का काप उठा अंधियार, तम पीकर उसने किया औरो को उजियार,
इसी लिए तो पूजता गाँधी को संसार ।
वस्तुतः राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी आज भी पूजनीय एवं स्मरणीय है। पर वर्तमान परिस्थिति पर नजर डालेगें तो ऐसा लगता है कि
उजली चुनर अहिंसा की दागदार हो गई,
गाँधी और गफ्फार की मेहनत बेकार हो गई।
आज पुरे देश में धर्म के राजनीति का खौफ , गौ रक्षक का खौफ, आजादी आजादी ,सत्याग्रह, भारत बंद और मेरी मांगे पूरी करो ही हो रहा है । विकास के आधार को बनाकर सरकारें करोड़ो, अरबो रूपयें खर्च कर रही है , लेकिन गाँधी के सपनों के अनुसार रचनात्मक कार्य नहीं हो रहे हैं , यह जाँच का विषय है। महात्मा गाँधी के अनुसार देश को सजाया, संवारा नहीं गया। देश की वर्तमान सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक एवं राजनैतिक स्थिति काफी दयनीय है । हर तरफ नफरत और उन्माद का वातावरण तैयार हो रहा है। विकास के नाम पर वादे दावे कर नौजवानों और किसानों को समझाया और उलझाया जा रहा है। आज चारो ओर सिर्फ राज करने की नीति यानि राजनीति बोले तो कुर्सी की नीति सिर्फ हो रही है जैसे की राजनीति एक सर्वव्यापक प्रक्रिया है, जिसके द्वारा मानव समुदाय अपनी समस्याओं को सुलझाता है। पर आज राजनीति खुद अपने आप में एक समस्या है। अनपढ़, अज्ञानी ,चोर, अपराधी एवं हत्यारा राजनीति के क्षेत्र में बड़ी संख्या में प्रवेश कर चुके है, फिलहाल इससे निजात सम्भव नहीं दिख रहा है। कहा गया है कि लोकतंत्र जनता का, जनता के लिए एवं जनता के द्वारा किया गया शासन है। पर वर्तमान समय में लोकतंत्र पूंजिपतियों, दलालों, अफसरो एवं बडे बड़े सामांतों द्वारा किया गया शासन प्रतीत होता जा रहा है। ऐसा लग रहा है की भ्रष्टाचार का चलन दिन व दिन है बढ़ रहा,

गाँधी तेरे देश में क्या से क्या न हो रहा है ? राह जो दिखाया तुने सबको सदाचार की, तू गया नहीं की निकल गई अर्थियाँ विचार की। खादी, खाकी, काला कोट पहन के सब है ठग रहा, गाँधी तेरे देश में क्या से क्या न हो रहा। अगर वत्र्तमान राजनीति एवं देश को सुधारना है तो गाँधी के विचारो पर चलकर, गाँव गाँव में ग्राम स्वराज की स्थापना करना होगा। सबका साथ सबका विकास को सार्थक करना ही होगा। आज बार – बार मन में यह बातें आती है —
मेरे सपनों का हिंदुस्तान दे दो, गीता का ज्ञान और कुरान का पैगाम दे दो । मुझको मेरे सपनों वाला हिंदुस्तान दे दो । तुलसी का राम और रसखान का श्याम दे दो । मुझको मेरे सपनों वाला हिंदुस्तान दे दो । गाँधी की अहिंसा और भगत सिंह का शान दे दो । मुझको मेरे सपनों वाला हिंदुस्तान दे दो । बना सके जो भाईचारा और इंसानियत ऐसा खुशनुमा निजाम दे दो । मुझको मेरे सपनों वाला हिंदुस्तान दे दो । सूरदास का किशन कन्हैया और मदर टेरेसा का वातसल्य दे दो । मुझको मेरे सपनों वाला हिंदुस्तान दे दो। गीत जो बज सके हर दिल में उस संगीत की सुरताल दे दो मुझको मेरे सपनों वाला हिंदुस्तान दे दो कि क्या बनाने आए थे क्या बना बैठे?कहीं मंदिर बना बैठे तो कहीं मस्जिद बना बैठे। हमसे अच्छी जात है इन परिंदों की यारों ; कभी मंदिर पर जा बैठे कभी मस्जिद पर जा बैठे।

