अत्यंत दुखी मन से पुलवामा, पहलगांव, मणिपुर के शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए आज की राजनीति की सच्चाई से पर्दा उठाना चाहता हूँ। तब संपूर्ण भारत में राजनीति की स्थिति क्या थी और अब क्या है, इस पर संक्षेप में सही पर एक बार फिर नए सिरे से विचार कर लेना अत्यंत आवश्यक जान पड़ता है।

देश की आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक, धार्मिक तथा लोगों की वैचारिक स्थिति क्या है तथा मानव जीवन के साथ इसका क्या सम्बन्ध चला आ रहा है यह देखना जरुरी है। हालाँकि यह एक कटु सत्य है कि आज की राजनीति जितना अधिक व्यवसायिक जीवन में नीतिगत रूप से खुल कर व्यापरियों को साथ देगी, राजनैतिक पर आसीन व्यक्ति विशेष के उत्तरोत्तर विकास एवं सत्ता सुख प्राप्ति की संभावना उतना ही अधिक होगा। आज की राजनीति किसी अवसर विशेष, स्थान विशेष, राज्य विशेष, धर्म एवं संप्रदाय विशेष, जाति विशेष आदि पहलुओं को ध्यान में रख कर गढ़ी जाती है
परन्तु सत्तालोलुप शीर्ष राजनेताओं द्वारा लाख उपाय करने और जुमलेवाजी करने के बावज़ूद यह जनसाधारण के दैनिक जीवन के व्यवहार में आज तक अपना स्थान नहीं बना सकी। जिन बातों को हम अधिक सुनते हैं, जिन वस्तुओं को हम अधिक देखते हैं उन्हीं को अपना लक्ष्य बना कर जो राजनैतिक दल चला है वही सत्ता पर काबिज हुआ है आज के समय में। आप अनुभव करते होंगे जो हमारे घरों में ज्यादा सुनाई पड़ते हैं उन्हीं से हमारा मेल हो जाता है यदि हम इन वाक्यों को बिलकुल छोड़ दें तो हमारे अस्तित्व की भाषा में वह शक्ति कदापि नहीं रह पाती है अतः आज की राजनीति को यह प्रेरणा कुछ हद तक इतिहास की बड़ी बड़ी घटनाओं से मिली है जो किसी से छिपी नहीं है।
अब ऐसे में आपको अपने पर विश्वास करना सीखना होगा और इसी आत्मविश्वास के साथ अपने अंदर सही निर्णय लेने की क्षमता को विकसित करना है जिससे कि आप अच्छे-बुरे और सही-गलत का सटीक निर्णय ले पाएं। अगर आप इसमें चूक करेंगे तो आपको पछताना ही पड़ेगा ये सब आप पर निर्भर करता है……