बिहार में विकास की राजनीति या राजनीति का विकास

इस खबर के मूल में हमने कल के बिहार को पहचानने का कोशिश किया है, मेरे नजर से, आज की राजनैतिक स्थिति और आज के बाजार के नजर से। और अपने समाज के भकुआये बिहारिओं की नजर से।

बिहार तेजी से नहीं बदल रहा है , हाँ बिहार की राजनीति निशांत के आने और नीतीश जी के दिल्ली जाने से तेजी से बदल रहा है। आज हमारे बिहार कि आधी आबादी गरीबी रेखा से नीचे दबी है और जीते जी मर रही है। बाकी गरीबी रेखा से लटकी कभी ऊपर और कभी नीचे हो रही है- जिम्नास्ट की तरह। कुछ लोग कहते हैं -बिहार आज विकास कि पीड़ा से गुजर रहा हैं। कुछ कहते हैं -यह तो पीड़ा का विकास है। समझ का फेर है! दिल्ली के प्रभु और अब बिहार के प्रभु भी दिल्ली पहुँच गए हैं , जो विकास के लिए प्रतिबद्ध है, कह रहे हैं-विकास चाहिए, तो पीड़ा से गुजरना ही होगा। पटना के प्रभु, जो जवाबदेह हैं, समझ नहीं पा रहे कि वो जो कुछ कर रहे हैं, वह सचमुच विकास है या सिर्फ पीड़ा! और, प्रजा बोले तो हम आप, जिसको विकास चाहिए, समझ नहीं पा रही कि अगर यही विकास है, तो पीड़ा किसे कहेंगे! आज का बिहार क्या है, क्यों ऐसा है, कब तक ऐसा रहेगा -कुछ समझ में नहीं आता। आज अपना बिहार देश का प्रश्न प्रदेश हो गया है -यक्ष प्रश्नी प्रदेश। किस मिटटी के बने हैं हम आप यानि यहाँ के लोग ?

बिडंबना देखिए आज तक बिहार के लोग बिहारी होनें या बिहारीपन को परिभाषित भी नहीं कर पाएं है! हम आप या तो राजपूत है, भूमिहार है, यादव है, कुर्मी-कोयरी, मुसहर, चमार, पासवान है या फिर भारतीय हैं -अन्य प्रदेशों के बंगाली, मराठी, तमिल कि तरह बिहारी नहीं हैं। बिहार के होकर भी बिहारी ना हो सकने वालों को बिहार क्या है, क्यों नहीं समझ में आया है? मीडिया मार्ट इंडिया जानता है कि बिहार को समझने -समझाने का सवाल कितना भी अनुत्तरित हो, देश मे यह तय हो गया है कि बिहार क्या है? यह भी तय हो गया है कि बिहारी का मतलब क्या है? यानि हम आज तक खुल कर यह बता नहीं सके हैं कि हम क्या हैं? क्या यह हमारी अक्षमता है या मजबूरी? पर हमें यह नहीं भूलनी चाहिए कि भारत में जिसे स्वर्ण काल कहा जाता है, उसका केंद्र बिहार ही था। और जब भी देश में किसी बदलाव या आंदोलन कि चिंगारी सुलगती है तो हर ओर से आवाज आती है कि बिहार देश को दिशा देगा।

आज यह विचित्र विरोधाभास है कि जो भारतीय बिहारी को नहीं मानते पर किसी बदलाव कि सुगबुगाहट होते ही उसी से दिशा कि अपेक्षा करने लगते हैं! यह आवाज हर बिहारी को आह्लादित करती है। याद रखें बिहार ने सदा देश की अपेक्षा पुरा किया है। परन्तु बदलाव कि दिशा में हर कोई आगे बढ़ गया और बिहार वहीं का वहीं रह गया है। मीडिया मार्ट इंडिया बिहार कि नई मुद्दों से जुडी पुरानी घटनाओं और पुराने मुद्दों से जुडी नई घटनाओं की पड़ताल और पहचान करने कि कोशिश में है। प्रभु वर्ग में शामिल और प्रजा वर्ग जो भूखे पेट भजन भी गाता है, और बदलना भी कोई बदलना है सोंचता हैं, का पड़ताल करने कि कोशिश करेगा जिसके मूल में बिहार के पूर्ववर्ती बदलाव, राजनीतिक बदलाव, विकास की राजनीति और राजनीति का विकास भी होगा। उम्मीद है कि हम यक्ष प्रश्नी प्रदेश को आगे ले जानें में सहयोगी बनेंगे।

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