डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह ‘सहज’, हरदा, मध्य प्रदेश
हे मां गौरी के लाडले, गजानन महाराज,आए तुम्हारे द्वार पर, रखो सबकी लाज।
विघ्नहर्ता सिद्धिविनायक, करो कृपा की छांव, तुम्हारे ही सुमिरन से महके, मन का सूना गांव।
हे मां गौरी के लाडले,गजानन महाराज…

भाल पे सोहे सिंदूर-रोली, मोदक भोग सुहाए, मूषक की सवारी करके, नंदन घर-घर आए।
बड़े कान से सुनो पुकार, छोटे मुख से दो वरदान, तुम्हारी अनुकंपा से ही, बनता हर एक काम।
हे मां गौरी के लाडले, गजानन महाराज…
शिव-पार्वती के हो प्यारे, तुम जग के आधार, एक दृष्टि से मिट जाए, जीवन का अंधकार।
प्रथम पूज्य हे ज्ञान-शिरोमणि, रिद्धि-सिद्धि के दाता, जो ध्याए तुम्हें सच्चे मन से, मनवांछित फल पाता।
हे मां गौरी के लाडले, गजानन महाराज…
मंगलकर्ता दुखहर्ता तुम, महिमा अपरंपार, गजानन तेरे चरणों में, शीश झुकाए संसार।
कृपा दृष्टि बनाए रखना, हे गणपति महाराज, जय गणेश जय गणेश देवा, गाए सकल जहान।
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