शिक्षा मंत्री का इस्तीफा क्यों नहीं ? युवाओं का भरोसा सरकार से खिसका, सरकार में भी तनाव

सरकार NEET पेपर लीक जैसे बड़े घटनाक्रम के बाद शिक्षा मंत्री का इस्तीफा क्यों नहीं ले रही, इसकी वजह बड़ी साफ है।

सरकार के समर्थक अक्सर कहते हैं कि प्रधानमंत्री जी का विकल्प ही क्या है। सरकार के सामने भी यही समस्या है। उसके पास धर्मेंद्र प्रधान जी का विकल्प ही नहीं है। न ही निर्मला सीतारमण या गडकरी का विकल्प है। अब आप ही बताइए कि धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर किसी शिक्षा मंत्री बनाए, रवि किशन को? आप बर्दाश्त कर पाएंगे कि भौतिक विज्ञान का पहला ही चैप्टर रिमोट से लहंगा उठाने के बारे में हो। इम्तिहान में सवाल आए कि यदि लहंगे का द्रव्यमान 2 किलोग्राम है और रिमोट की बैटरी 20% बची है, तो लहंगा उठने की संभावना ज्ञात कीजिए। दे पाएंगे जवाब? नहीं ना ? अब आगे देखिये ।

धर्मेंद्र प्रधान को अभी हटाना BJP का सबसे बड़ा जाल है। चलिए, देखते हैं क्यों। प्रधान मोदी कैबिनेट के सबसे खराब मंत्रियों में से एक हैं। NEET लीक हुआ। दो बार। UGC-NET रद्द हुआ। CBSE की आंसर शीट में गड़बड़ी। NEP 2020 की असफलताएँ। एक ही मंत्री। हर बार। लेकिन BJP उन्हें हटा नहीं सकती। यह एक क्लासिक Catch-22 वाली स्थिति है। उन्हें हटाया, तो RSS नाराज़ हो जाएगी। उन्हें रखा, तो भारत की जनता नाराज़ हो जाएगी। दरअसल, वे 1983 से ही RSS से जुड़े हुए हैं। उनसे पहले उनके पिता भी RSS में थे। यही तो समस्या है। यही वह दुविधा है जिसमें BJP इस समय फँसी हुई है। और यहाँ एक ऐसी बात है जिसे कोई भी ज़ोर से नहीं कहता। अगर मोदी आज उन्हें हटा देते हैं, तो तुरंत तीन चीज़ें होंगी। या फिर मनोज तिवारी को शिक्षा मंत्री बनाए।

हर विषय की किताब के पहले पन्ने पर लिखा होगा कि फटाफट खोल के देखाव। प्रश्न पत्र देखकर तो आपके होश ही उड़ जाएंगे। जैसे कि ‘चोली में रसगुल्ला’ से कवि का क्या तात्पर्य है, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पहलुओं की व्याख्या कीजिए। या फिर अगर बबुनी के शहर के हवा लागल बा, तो गांव की हवा किसे लगी है। पवन सिंह भी पार्टी में आ गए हैं। कहीं उन्हें शिक्षा मंत्री बना दिया, तो फिर कयामत ही समझिए। हर किताब के सभी पन्ने ढोंढी से ही भर जाएंगे। फिजिक्स और केमिस्ट्री छोड़िए, मैथ की किताबें भी सिंगार रस से पट जाएंगी। शिक्षकगण ‘भर जाता ढोढ़ी मोर पसीना से’ का मतलब समझाते-समझाते खुद पसीने से भर जाएंगे। यही पसीने वाला हाल आपका भी होगा, जब एग्जाम में सवाल आएगा कि ‘आय हे दादा ई ढोढ़ी है कि ईनार बा’। और कहीं ‘लॉलीपॉप लागेलू’ भारतीय सभ्यता के विकास में मील का पत्थर सिद्ध करना पड़ गया, तो आपके दक्खिन ही लग जाने हैं। बाकी सांसदों या मंत्रियों का यही हाल है। विपक्ष को एक नैतिक बल मिलेगा।


AAP की ‘Cockroach Janata Party’ (CJP) और भी ज़ोर-शोर से सड़कों पर उतर आएगी। मीडिया इसे ‘RSS बनाम BJP’ के तौर पर पेश करेगा। और BJP को दोनों तरफ से नुकसान उठाना पड़ेगा। प्रधान को वापस ओडिशा जाना पड़ेगा। और वहाँ उन्हें CM मोहन माझी का सामना करना पड़ेगा। जो नहीं चाहते कि प्रधान वहाँ रहें। और इन सबके बीच भारत के बच्चों को ही इसकी कीमत चुकानी पड़ती है। सिर्फ़ एक ही व्यक्ति है जो इस गाँठ को खोल सकता है। पार्टी नहीं। RSS भी नहीं। सिर्फ़ मोदी। उन्हें आगे आना होगा। इसकी ज़िम्मेदारी लेनी होगी। प्रधान की जगह किसी ऐसे व्यक्ति को लाना होगा जो सचमुच शासन चला सके।

वे जितना ज़्यादा इंतज़ार करेंगे, उतना ही ऐसा लगेगा कि PM खुद किसी दुविधा में फँसे हुए हैं। इस्तीफ़ा मोदी अमित शाह का साथ मै होना चाहियेज्योतिरादित्य सिंधिया का कहना है कि जेब में प्याज रख लो, वो एसी का काम करेगा। खेसारी लाल यादव तो ‘कुर्ती में कूलर’ लगवा रहे थे, तो इन्होंने सीधे एसी फिट करवा के कंपीटिशन ही खत्म कर दिया।

एक सांसद सत्यपाल सिंह को राज्य शिक्षा मंत्री बनाया था। उन्होंने सीधे डार्विन की विकासवाद सिद्धांत को ही गलत बता दिया कि किसी ने हमारे पुरखों को बंदर से इंसान बनते नहीं देखा, इसलिए थ्योरी को पाठ्यक्रम से हटा देना चाहिए। इसलिए बर्दाश्त की गोली खाइए और धर्मेंद्र प्रधान को ही शिक्षा मंत्री रहने दीजिए। आपके पास भले ही सरकार को बदलने के एकाध विकल्प हों, लेकिन सरकार के पास शिक्षा मंत्री को बदलने का एक भी विकल्प नहीं है।

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