प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चिंता जायज है देश की बढ़ती हुई जनसंख्या यह इशारा कर रही है कि आने वाली पीढ़ी के लिए काफी समस्या होने वाली है।

15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में देश की बढ़ती हुई जनसंख्या की चर्चा की और आने वाले समय में उसके गंभीर परिणाम की चेतावनी भी दी। प्रधानमंत्री ने इस पर गंभीर चिंता व्यक्त की और साथ ही साथ कहा कि आने वाली पीढ़ी के लिए यह गंभीर चुनौती होगी। उन्होंने इसके लिए नीति बनाने पर जोर दिया। ऐसा नहीं है कि यह पहली बार हुआ है। देश में आपातकाल के दौरान तात्कालिक प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने नसबंदी का अभियान चलाया था। परंतु तब समस्या यह हुई थी कि लोगों का जबरन नसबंदी किया जा रहा था। जिसका पूरे देश में विरोध हुआ और तब इंदिरा गांधी को अपनी सत्ता गंवानी पड़ी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चिंता जायज है देश की बढ़ती हुई जनसंख्या यह इशारा कर रही है कि आने वाली पीढ़ी के लिए काफी समस्या होने वाली है। देश की जनसंख्या 1951 में करीब 36 करोड़ 10 लाख थी जो 2011 में 121 करोड़ के पार हो गई। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट बताती है कि यदि हमारे देश में जनसंख्या वृद्धि की यही रफ्तार रही तो 2027 तक जनसंख्या के मामले में हम चीन से आगे निकल जाएंगे। देश में जनसंख्या के बढ़ने की गति की तुलना में उपलब्ध संसाधन घटती जा रही है। यही वजह है कि सारी व्यवस्था में उथल पुथल हो रही है। उपलब्ध संसाधन चाहे प्राकृतिक हो या फिर सरकार द्वारा निर्मित बढ़ती जनसंख्या के लिए पर्याप्त नहीं है। बढ़ती जनसंख्या के लिए दिनों दिन जमीन घट रही है, आसमान घट रहा है, जल घट रहे हैं, शुद्ध हवा घट रही है, सारे के सारे प्राकृतिक संसाधन घट रहे हैं। बेरोजगारी, ट्रैफिक, प्रदूषण तरह.तरह की बीमारी सहित कई अन्य समस्या उत्पन्न हो रही है। देश की तेज गति से बढ़ती हुई जनसंख्या ने सोंचने पर मजबूर कर दिया है कि यदि इस पर तत्काल नियंत्रण नहीं किया गया तो फिर आगे क्या होगा, आपातकाल के दौरान तात्कालिक सरकार ने जो तरीका अपनाया था उसे कहीं से भी जायज नहीं कहा जा सकता। परंतु उसके बाद जिस तेजी से जनसंख्या बढ़ी लोगों ने जिस तेजी से जनसंख्या को बढ़ाने में अपना योगदान दिया, उसे भी जायज नहीं कहा जा सकता। एक बार फिर से आने वाली पीढ़ी के बेहतरी के लिए, देश के समुचित विकास के लिए, जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए एक सही नीति बनाने की आवश्यकता है। वो चाहे कानून बनाकर, कानून का भय दिखाकर, विभिन्न सरकारी योजनाओं में दो से अधिक बच्चों वाले परिवारों को लाभ से वंचित करके किसी भी प्रकार के चुनाव में खड़े नहीं होने देने का कानून बनाकर या फिर लोगों को जागरूक करके हो। साथ ही साथ समाज के ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करके हम जनसंख्या नियंत्रण कर सकते हैं जिनके एक ही बच्चे हैं। ऐसे बच्चों और ऐसे अभिभावकों को जनसंख्या नियंत्रण हेतु अभियान के प्रचार से जोड़कर ऐसे लोगों का पोस्टर लगाकर उन्हें सामाजिक स्तर पर सम्मानित करके ऐसे लोगों को विभिन्न योजनाओं में प्राथमिकता देकर ऐसे लोगों को आरक्षण का लाभ देकर एवं और भी कई तरीके हैं जिससे लोगों को एक बच्चे के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। आरक्षण नीति से ऐसे लोगों को हटाकर जिनके दो से अधिक बच्चे हैं हम काफी हद तक तेज गति से बढ़ती हुई जनसंख्या पर काबू कर सकते हैं। देश में जनसंख्या विस्फोट की एक प्रमुख वजह है अशिक्षा। ऐसा देखा जा रहा है कि शिक्षित समाज की तुलना में अशिक्षित लोगों में बच्चा पैदा करने की दर काफी अधिक है। हमारी सरकार को इस प्रमुख समस्या पर गौर करना होगा क्योंकि बगैर लोगों को शिक्षित किए हम अपनी बात उन्हें नहीं समझा सकते और न ही वो जनसंख्या विस्फोट के घातक परिणाम को समझ सकते हैं। जनसंख्या नियंत्रण को किसी धर्म विशेष से जोड़ना भी गलत है। कुछ राजनीतिक दल महज वोट की राजनीति के लिए इस तरह की बात करते हैं जो नहीं होनी चाहिए। यह गलत है और सरासर गलत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छोटे परिवार रखने को भी देशभक्ति कहा है, जो सच है। देशभक्ति केवल सीमा पर युद्ध लड़ना ही नहीं होता। देशभक्ति दिखाने का मौका हर किसी के पास है। हम देश के विकास मेंएदेश के सम्मान के लिए कुछ भी करके देशभक्त हो सकते हैं। तो फिर देर किस बात की। आइए हम सब संकल्प लें कि हम छोटे परिवारों की पैरवी करें, ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करें और दिखा दें कि हम सब सच्चे देशभक्त हैं।हमें बॉर्डर पर युद्ध लड़ने का मौका नहीं मिला तो क्या हुआ। हम जनसंख्या नियंत्रण कर देश के विकास में अपना योगदान देकर देशभक्ति तो साबित कर ही सकते हैं।
