भगवान से ना डरो तो चलेगा, लेकिन कर्मो से जरूर डरना क्योंकि किए हुए कर्मो का फल तो भगवान को भी भोगना पड़ता है।।

आजकल डिजिटल का जमाना है। शहरों से लेकर गांवों तक स्मार्टफोन की उपलब्धता आसान होने से मीडिया और इंटरनेट यूज करने वाले लोगों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। हर तरह का कंटेंट इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध हो जा रहा है। ऐसे में इन दिनों फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब का इस्तेमाल करने वालों की संख्या में भी लगातार बढ़ोतरी होती जा रही है। मीडिया और इंटरनेट जैसे प्लेटफॉर्म पर यूजर्स की बढ़ती संख्या को देखते हुए ये ना सिर्फ कंपनियां वरन राजनीतिक पार्टियां भी अब इस मौके को भुना रही हैँ। आज कि मीडिया और इंटरनेट की सबसे बडी बिडंवना कंटेंट की सत्यता का कोई मापदंड का ना होना ही है। यानि यह आज के मीडिया और इंटरनेट की सबसे बडी दोष है।
कहावत है ना –बहुत से गुणों के होने के बावजूद भी, सिर्फ एक दोष सब कुछ नष्ट कर सकता है।। नाम बड़ा किस काम का जो काम किसी के ना आये, सागर से नदियॉं भली जो सबकी प्यास बुझाये!!
ज्ञात रहे स्वतंत्र भारत वर्ष के सभी प्रधानमंत्रियों की अपनी विशिष्ट शैली, योगदानों से भारतीय समाज अभिभूत रहा है। पंडित नेहरू जी अपनी ऐतिहासिक सफलताओं के साथ “भारत की खोज“ प्रधानमंत्री के रूप में सदैव याद किए जाते रहेंगे तो इंदिरा गांधी जी अपनी दो फाड़ पाकिस्तान नीति की ऐतिहासिक सफलता, शास्त्री जी की हरित क्रांति से अभिभूत भारतीय किसान, राजीव गांधी जी का सुपर कंप्यूटर, बी.पी सिंह जी का मंडल कमीशन, चंद्रशेखर जी का विदेशों में सोना गिरवी रखने का साहसिक निर्णय, नरसिम्हाराव जी का आर्थिक उदारीकरण, बाजपेयी जी की स्वर्ण चतुर्भुज सड़क योजना से लेकर बेमिसाल भाषण का लोकतांत्रिक भारत के निर्माण में योगदान, देवगौड़ा जी की लाल किले प्राचीर से हिंदी के प्रति समर्पण तो मनमोहन सिंह जी की विशिष्ट आज्ञाकारी शैली जिसका भारत वर्ष सदैव कायल रहेगा। इमरजेंसी के खिलाफ लहर पर सवार प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई जी की असफलता गैर कांग्रेसी सरकारों की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न चिन्ह खड़ा करते हुए वंशवादी कांग्रेस की पुर्नस्थापना यह तथ्य जाहिर करती है कि भारतीय राजनेताओं की राष्ट्र सर्वोपरि की अवधारणा लच्छेदार भाषणों तक ही सीमित नहीं है। विगत 30 वर्षों की पूर्ण बहुमत की मोदी जी की सरकार राष्ट्र सर्वोपरि के अपने प्रतिपक्षी प्रतिबद्धताओं को सत्ता के दौर में नये आयाम प्रदान कर इतिहास में अपना स्थान सुरक्षित करने में सफल रही है। परंतु आज कि मीडिया और इंटरनेट की सबसे बडी बिडंवना कंटेंट को अगर आप कुदेरना प्रारंभ करेंगे तो पाऐंगे कि एक षडयंत्र के तहत हमारे इतिहास और मौलिक भारत के संस्कारों से छेड़छाड़ कर आपको नकारात्मकता की ओर ले जानें के लिए एक अभियान चलाया जा रहा है जो किसी के लिए सही नहीं हैं उससे भी बडी बिडंवना इन सब पर सरकार का हस्तक्षेप या कन्र्टोल ना होना भी है। तभी तो कहा गया है कि भगवान से ना डरो तो चलेगा लेकिन कर्मो से जरूर डरना क्योंकि किए हुए कर्मो का फल तो भगवान को भी भोगना पड़ता है।।
