माता-पिता की खुशी : कलयुग में बदलते रिश्तों का डोर

अपनी खुशियों का गला घोटकर हमारी सारी ख्वाहिश पुरी करने वाले माता पिता ही है , जिन्होंने हमें इस समाज में जीने का अधिकार दिलाया.

जब वे हमारे लिए इतना कुछ कर सकते है तो क्या हम उनका ख्याल नहीं रख सकते. वैसे भी हमारा ये मानना है माता-पिता के जीते जी उन्हें सारे सुख देना ही वास्तविक धर्म है!

1 माता पिता को कभी पलट कर जवाब ना दे.

2 पेरेंट्स से ऊँची आवाज में बात ना करे.

3 कोई नया या बड़ा कार्य करने से पहले माँ-बाप से चर्चा जरुर करें.

4 हर महीने उनके स्वास्थ का चेकअप कराएं.

5 उनकी पसंद ना पसंद का ख्याल रखना आपकी जिम्मेदारी है.

6 बुढ़ापे की उम्र में अक्सर पेरेंट्स को बातें करना प्रिय लगता है. ऐसे में आपको जब भी समय मिले, एक फोन कर लें और उनका हालचाल पूछ ले.

7 वृद्ध अवस्था में गुस्सा बहुत आता है. इसलिए जितना हो सके पेरेंट्स की किचकिच को इग्नोर करे.

8 हम जानते है कि बीवी के लिए प्यार अलग है और पेरेंट्स के लिए अलग. पर अक्सर माता पिता को लगता है कि शादी के बाद उनका बच्चा उन्हें भूल गया है. ऐसे समय में आपको दोनों के प्रति अपना प्यार बराबरी पर रखना है. ध्यान दे ! बीवी के सामने अपने पेरेंट्स की बेहद इज्जत करें, ताकि आपकी बीवी भी आपके माँ-बाप का सम्मान करे.

9 अपने पेरेंट्स को मंदिर ले जाना कभी ना भूले. इससे आप दोनों को ही अनोखी खुशी और शांती मिलेगी.

10 जिस तरह आप अपनी बीवी और बच्चो को नए कपडे पहनाने का शौक रखते है, ठीक उसी तरह माता-पिता को भी शॉपिंग करा दिया करे.

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