हर घर तिरंगा फहराइए, पर ख्याल रहे तिरंगा की मर्यादा बरकरार रहे, कल वो गलियों में गंदा ना पड़ा रहे

प्रधानमंत्री जी ने कहा है हम हर घर झण्डा फहराये, जरूर फहराएं पर ख्याल रहे हमारा तिरंगा हमारी मान और शान है. हर घर तिरंगा फहराइए, पर ख्याल रहे तिरंगा की मर्यादा बरकरार रहे, कल वो गलियों में गंदा ना पड़ा रहे।

तिरंगा है हमारी जान, इस पर सब कुर्बान है,
इसके तीन रंगों में छुपा, हिंदुस्तान का सम्मान है।
फहराओ इसे हर घर पर, यह अधिकार तुम्हारा है,
पर भूल न जाना कर्तव्य अपना, यह सबसे प्यारा है।
झुके न इसकी शान कभी, ऐसा कोई काम न हो,
हमारी किसी भी नादानी से, देश का नाम बदनाम न हो।

स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व आते ही संपूर्ण भारतवर्ष देशभक्ति के महासागर में डूब जाता है। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान ने इस भावना को एक नया आयाम दिया है। आज देश के प्रत्येक नागरिक के मन में अपने घर पर राष्ट्रध्वज फहराने का एक अद्भुत उत्साह देखने को मिलता है। कश्मीर से कन्याकुमारी तक, हर घर की छत, बालकनी और खिड़की तीन रंगों से सराबोर हो उठती है। यह दृश्य हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर देता है। परंतु, इस राष्ट्रप्रेम और उत्सव के उत्साह के बीच एक कड़वी सच्चाई भी छिपी है, जो अक्सर उत्सव के अगले दिन हमारी आँखों के सामने आती है। 15 अगस्त या 26 जनवरी की शाम ढलते ही, या उसके अगले दिन, कई छोटे-बड़े तिरंगे गलियों में, नालियों के पास, कचरे के ढेरों में या सड़कों पर पैरों के नीचे कुचले जाते दिखाई देते हैं। यह दृश्य अत्यंत हृदयविदारक है। तिरंगा हमारी आन, बान, शान और लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का प्रतीक है। यदि हम इसे केवल एक दिन फहराकर अगले दिन गलियों में गंदा होने के लिए छोड़ देते हैं, तो यह हमारी कैसी देशभक्ति है?

आज तो फहराया मुझे, बड़े चाव से छत पर तुमने,
कल क्यों भूला दिया मुझे, छोड़ दिया सड़कों पर तुमने?
मैं केवल कागज़ का टुकड़ा नहीं, इस देश की धड़कन हूँ,
वीरों के खून से सींचा गया, मैं वो पावन चन्दन हूँ।
फहराओ मुझे तो रखना याद, मर्यादा मेरी सबसे ऊपर है,
पैरों में आना मेरा अपमान, यह पूरे देश पर नश्तर है।

ईश्वर ने हमें सोचने, समझने, संवेदना महसूस करने और सही-गलत का निर्णय लेने की विवेकशीलता दी है। राष्ट्रीय प्रतीक क्या होते हैं, देश का सम्मान क्या होता है और तिरंगे की मर्यादा के नियम क्या हैं, यह केवल एक मनुष्य ही समझ सकता है।

विडंबना यह है कि सबसे बड़ी लापरवाही उत्सव के दिन राष्ट्रप्रेम का प्रदर्शन करने के लिए हम उत्साह में आकर गाड़ियों पर तिरंगे लगाते हैं, बच्चों को प्लास्टिक या कागज़ के छोटे झंडे थमा देते हैं और घरों पर भी झंडे लगा देते हैं। लेकिन जैसे ही उत्सव समाप्त होता है, वही जागरूक मनुष्य अपनी जिम्मेदारी भूल जाता है। रास्ते पर गिरा हुआ झंडा देखकर भी लोग कतराकर निकल जाते हैं। एक समझदार ‘पाया’ का कर्तव्य केवल झंडा फहराना नहीं, बल्कि उत्सव के बाद उसे सुरक्षित और ससम्मान वापस उतारना भी है।

‘हर घर तिरंगा’ अभियान को पूर्ण रूप से सफल और मर्यादित बनाने के लिए हमें कुछ बातों पर विशेष ध्यान देना होगा, ताकि उत्सव के अगले दिन एक भी तिरंगा गली में गंदा पड़ा न मिले. उत्सव के दौरान बच्चों को दिए जाने वाले छोटे प्लास्टिक या कागज़ के झंडे ही अगले दिन सबसे ज्यादा सड़कों पर कचरे के रूप में दिखाई देते हैं। प्लास्टिक गलता भी नहीं है, जिससे पर्यावरण को भी नुकसान होता है। हमें इनके उपयोग से पूरी तरह बचना चाहिए। यदि बच्चे तिरंगा हाथ में ले रहे हैं, तो माता-पिता और शिक्षकों का यह कर्तव्य है कि वे उन्हें समझाएं कि यह कोई खिलौना नहीं है। बच्चों को सिखाएं कि यदि झंडा हाथ से छूटकर गिर जाए, तो उसे तुरंत उठाकर चूमना चाहिए और साफ जगह पर रखना चाहिए।

लोग अपनी कारों और मोटरसाइकिलों पर तिरंगे लगाते हैं। तेज हवा के कारण ये झंडे अक्सर टूटकर सड़कों पर गिर जाते हैं और गाड़ियों के टायरों के नीचे कुचले जाते हैं। यदि आप वाहन पर झंडा लगा रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि वह बेहद मजबूती से बंधा हो। जैसे ही राष्ट्रीय पर्व का दिन समाप्त हो, शाम को या अगले दिन सुबह, घर की छत पर लगे तिरंगे को अत्यंत आदर के साथ उतार लें। उसे कभी भी हवा-पानी में फटने या रंग फीका होने के लिए हफ्तों तक छत पर न छोड़ें। यदि कोई तिरंगा बहुत पुराना हो गया है, फट गया है, गंदा हो गया है या उसका रंग उड़ गया है, तो उसे फेंकने के बजाय राष्ट्रीय ध्वज संहिता (Flag Code of India) के अनुसार ससम्मान नष्ट करने के दो ही तरीके हैं. फटे या गंदे हो चुके तिरंगे को किसी साफ स्थान पर लकड़ी की गरिमामयी अग्नि में पूरी तरह से विलीन कर दिया जाता है।

इस दौरान झंडे को सीधे आग में फेंकने के बजाय उसे सम्मानपूर्वक मोड़कर अग्नि को समर्पित किया जाता है। तिरंगे को अत्यंत आदर के साथ एक साफ सूती कपड़े में लपेटकर जमीन के अंदर गहरा गड्ढा खोदकर दबा दिया जाता है, जहाँ शांति से वह मिट्टी का हिस्सा बन जाए। इस स्थान पर कोई चहल-पहल या गंदगी नहीं होनी चाहिए। सच्ची देशभक्ति केवल नारों में, सोशल मीडिया की पोस्ट्स में या साल में दो दिन का दिखावा करने में नहीं है। सच्ची देशभक्ति हमारे आचरण में झलकनी चाहिए। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान तभी सार्थक होगा जब देश का प्रत्येक ‘पाया’ (मनुष्य) अपनी जिम्मेदारी समझेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि उसकी किसी भी नादानी या आलस की वजह से तिरंगे की मर्यादा धूमिल न हो।

आइए इस राष्ट्रीय पर्व पर यह दृढ़ संकल्प लें कि हम अपने घरों पर तिरंगा बहुत ही गर्व और उत्साह के साथ फहराएंगे। लेकिन साथ ही, उत्सव के अगले दिन जब हम अपनी गलियों में निकलेंगे, तो हमारी आँखें सजग रहेंगी। यदि हमें कहीं भी कोई छोटा या बड़ा तिरंगा जमीन पर गिरा या गंदा होता दिखाई देगा, तो हम बिना संकोच के, एक सच्चे नागरिक के नाते उसे तुरंत उठाएंगे, साफ करेंगे और उसे ससम्मान सुरक्षित स्थान पर पहुंचाएंगे। याद रखिए, तिरंगे का सम्मान ही हमारे देश का सम्मान है। जय हिंद, जय भारत!

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