अल्लावरू और राजेश राम के सामने राहुल और खरगे कहाँ हैं?

बिहार के 29 नेताओं को कारण बताओ नोटिस, 5 के बाद बाकी नामों का पता नहीं- रितेश सिन्हा,(वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक)

बिहार प्रदेश कांग्रेस के नेताओं में कलह तेज हो चुकी है। वर्तमान में लड़ाई निर्णायक मोड़ पर है। दोनों गुट दिल्ली दरबार में दस्तक दे चुके हैं। अब तक के घटनाक्रम में पार्टी आलाकमान के ज्ञापन लेने के बाद कृष्णा अल्लावरू और राजेश राम ने सामने राहुल और खरगे की औकात नहीं, इसको जगजाहिर कर दिया है। मनमाने तरीके से प्रदेश के 29 नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इनमें से 5 नाम प्रेस के माध्यम से सामने आए हैं, बाकी नेताओं का अता-पता नहीं है। धरने पर बैठे नेताओं के प्रवक्ता बने आनंद माधव ने बताया कि अभी तक किसी को नोटिस के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

उनका कहना है कि केवल कुछ खास मीडियाकर्मियों के जरिए हौवा बनाने की कवायद जारी है। हमारे सवाल के जवाब में पूर्व विधायक छत्रपति यादव ने बताया कि राजेश राम और अल्लावरू के समर्थन में उतरे 1 दर्जन नेताओं में कोई चेहरा कांग्रेस का नहीं था।मीडियाकर्मियों ने ऐसे किसी चेहरे को चिन्हित नहीं किया जिसे कांग्रेसी बताया जा सके। अलबत्ता उनके हाथों में डाॅ भीमराव आंबेडकर, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के केवल राजेश राम का पोस्टर था। इसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को जगह नहीं दी गई। अब आपको बता दें कि खरगे उन चुनींदा दलित नेताओं में शामिल हैं जिन्हें कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुन कर अध्यक्ष निर्वाचित किया। इसके पूर्व दामोदरन संजीवैया 1962-64, बाबू जगजीवन राम 1969 में अध्यक्ष बने थे। इसके ठीक 53 साल बाद 2022 में मल्लिकार्जुन खरगे दलित अध्यक्ष चुने गए।

दलितों को हक दिलाने की बात करने वाली पार्टी में खरगे का ही अस्तित्व खतरे में है। आनंद माधव ने अपने गुट की स्थिति को स्पष्ट करते हुए बताया कि हमारे साथियों में अनुशासन के दायरे में रहते हुए अपनी बातों को कांग्रेस हाईकमान तक पहुंचाया है। उनके उनका आश्वासन भी मिला है है, जल्द ही इस पर फैसला आएगा। सदाकत आश्रम में काबिज प्रदेश कांग्रेस के कर्ताधर्ता व पार्टी के प्रभारी कृष्णा अल्लावरू और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने अपने भाड़े के टट्टुओं के साथ पार्टी के केंद्रीय कार्यालय इंदिरा भवन के मेन गेट पर प्रदर्शन करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की औकात नाप दी। प्रदर्शन कर रहे इन नामालूम कार्यकताओं की टीम ने साजिशन खरगे को अपने पोस्टर-बैनर में जगह ही नहीं दी।

दिल्ली में इनकी कमान संभाले सांसद पप्पू यादव को कांग्रेस नेत्री व सांसद प्रियंका गांधी, के राजू और अलंकार का समर्थन प्राप्त है। विगत 9 महीनों से बिहार में टिकट की बिक्री, बाहरी लोगों को टिकट देने, चुनावी प्रबंधन में पैसे का गोलमाल और संगठन सृजन के नाम पर वसूली का काम अब तक जारी है।

चुनाव के दौरान ही दिल्ली से भेजे गए कांगे्रस के वरिष्ठ नेता पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सीडब्लूसी के सदस्य अविनाश पांडे ने वरिष्ठ कांग्रेसी नेता के घर जाकर उनसे मान-मनौव्वल और बागी नेताओं को चुनाव के बाद संगठन में बदलाव कर मजबूत करने की बात कही थी। नवंबर में चुनाव नतीजे आने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाही अलंकार और के राजू के दवाब में नहीं की गई है। गहलोत और अविनाश पांडे की रिपोर्ट को कूड़ेदान में फेंक दिया गया। कांग्रेस के कुछ समर्पित पूर्व यूथ कांग्रेस अध्यक्ष नरेंद्र कुमार विकल, राज कुमार राजन, पूर्व विधायक छत्रपति यादव, प्रवक्ता आनंद माधव, वरिष्ठ नेता जमाल अहमद भल्लू सहित कई जिलाध्यक्ष, वरिष्ठ पदाधिकारियों ने आलाकमान से संपर्क कर अनुशासन में रहकर अपनी बातों को रखा था।

लंबे समय तक बिहार कांग्रेस संगठन में कोई फैसला न लिए जाने के बाद एआईसीसी में हालिया हुए महासचिवों के उलटफेर में प्रदेश के प्रभारी जस के तस बने हुए हैं और प्रदेश अध्यक्ष अपनी मनमानी करते हुए खुद को खरगे से बड़ा साबित करने में जुटे हुए हैं। कांग्रेस आलाकमान खरगे ने धरने का संज्ञान लेते हुए वरिष्ठ नेता और कार्यालय से जुड़े पदाधिकारी मनीष चतरथ को विशेष निर्देशों के साथ ज्ञापन लेने और शीघ्र फैसला लेने का संदेश दिया। उसके बाद ये धरना समाप्त हुआ। बिहार से आए नेता अब भी दिल्ली में डटे हुए हैं। प्रदेश अध्यक्ष और प्रभारी के बदलने का इंतजार कर रहे हैं। खरगे के संदेश के बाद इन नेताओं को ऊर्जा मिली है। वहीं पटना में बैठे हुए प्रदेश अध्यक्ष और प्रभारी ने पप्पू यादव की मदद से 1 दर्जन नेताओं को भेजा था। दिल्ली पुलिस की मुस्तैदी ने दोनों गुटों के बीच झगड़ा नहीं होने दिया।

आपके संज्ञान में ला दें कि बिहार अनुशासन समिति के अध्यक्ष कपिलदेव यादव भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के कारोबारी करीबी हैं। इस घटना के तीन दिन पूर्व शेरधाटी के अध्यक्ष संतोष कुमार पूर्व सांसद व एनडीए नेता नागमणि के साथ बैठकर कांग्रेसी नेताओं पर हल्ला बोल रहे थे। असित नाथ तिवारी द्वारा खरगे के लिए अपशब्द से संबंधित फोटो और वीडियो प्रदेश के नेता नागेंद्र कुमार विकल ने जारी किया है।

इनको कांग्रेस में राजेश राम और कृष्णा अल्लावरू लाए और बनाया। अब देखना है आलाकमान का बिहार पर फैसला कुछ दिनों में होता है या फिर इसके लिए महीनों का इंतजार करना होगा। ये सवाल खरगे और राहुल गांधी के सामने इन गुटों के नेताओं ने खड़ा कर दिया है। यह कहना ज्यादा मुफीद है कि खरगे और राहुल के बीच भारी मतभेद हैं। एआईसीसी में हुए हालिया बदलाव में इसकी झलक साफ दिखती है।

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