अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ॰ मुन्ना कुमार शर्मा को महाराष्ट्र के नाशिक-त्र्यंबकेश्वर में आयोजित प्रतिष्ठित ‘ज्ञान कुंभ-2026’ में ‘महर्षि पुरस्कार-2026’ से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें महर्षि पंचायतन सिद्धपीठम द्वारा समाज, संस्कृति और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया।

त्र्यंबकेश्वर की पवित्र भूमि पर आयोजित इस भव्य धार्मिक और सांस्कृतिक समागम में देश-विदेश के कई जाने-माने संतों, विद्वानों और आध्यात्मिक गुरुओं ने हिस्सा लिया। ज्ञान कुंभ के मुख्य मंच पर वैदिक मंत्रोच्चार और शंखध्वनि के बीच सिद्धपीठम के पूज्य संतों द्वारा डॉ॰ मुन्ना कुमार शर्मा को अंगवस्त्र, प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न भेंट कर इस सर्वोच्च सम्मान से नवाजा गया। ज्ञान कुंभ के आयोजकों और महर्षि पंचायतन सिद्धपीठम के पदाधिकारियों के अनुसार, डॉ॰ मुन्ना कुमार शर्मा का जीवन और उनका नेतृत्व सनातन संस्कृति के मूल्यों को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए समर्पित रहा है। अखिल भारत हिन्दू महासभा के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने न केवल राजनीतिक और सामाजिक मोर्चे पर हिन्दू हितों की वकालत की है, बल्कि प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा, वेदों और उपनिषदों के संदेश को युवा पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। पुरस्कार समिति ने उनके द्वारा किए गए सामाजिक समरसता के कार्यों और आपदाओं के समय समाज सेवा के अभियानों की भी सराहना की। सिद्धपीठम के मुख्य संरक्षक ने इस अवसर पर कहा कि डॉ॰ शर्मा जैसे राष्ट्रभक्त और सांस्कृतिक प्रणेता को सम्मानित करना वास्तव में उस विचार को सम्मानित करना है जो भारत को विश्व गुरु बनाने की दिशा में अग्रसर है।

सम्मान ग्रहण करने के बाद अपने संबोधन में डॉ॰ मुन्ना कुमार शर्मा ने भावुक होते हुए त्र्यंबकेश्वर की पावन धरा और महर्षि पंचायतन सिद्धपीठम के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “यह पुरस्कार केवल मेरा व्यक्तिगत सम्मान नहीं है, बल्कि अखिल भारत हिन्दू महासभा के उन लाखों कार्यकर्ताओं और सनातन धर्म के प्रति समर्पित हर उस नागरिक का सम्मान है जो देश की सांस्कृतिक अखंडता के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं।” डॉ॰ शर्मा ने अपने भाषण में ज्ञान कुंभ की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नाशिक-त्र्यंबकेश्वर जैसी पवित्र जगहें सदियों से भारत की आध्यात्मिक चेतना का केंद्र रही हैं। आज के आधुनिक युग में जब युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से दूर हो रही है, तब ‘ज्ञान कुंभ’ जैसे आयोजन समाज को सही दिशा दिखाने का काम करते हैं। उन्होंने संकल्प लिया कि वे जीवन पर्यंत सनातन धर्म की रक्षा, गोरक्षा और भारतीय संस्कृति के उत्थान के लिए कार्य करते रहेंगे। नाशिक के त्र्यंबकेश्वर में आयोजित ‘ज्ञान कुंभ-2026’ इस वर्ष का सबसे बड़ा आध्यात्मिक और बौद्धिक समागम बनकर उभरा है। इस बहुदिवसीय आयोजन का मुख्य उद्देश्य आधुनिक विज्ञान और प्राचीन वैदिक ज्ञान के बीच एक सेतु का निर्माण करना है।

इस समागम में विभिन्न सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें भारतीय शिक्षा पद्धति में वेदों के व्यावहारिक ज्ञान को कैसे शामिल किया जाए। प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीने के प्राचीन तौर-तरीकों की प्रासंगिकता। मानसिक तनाव से जूझ रही आज की युवा पीढ़ी को योग और ध्यान के माध्यम से नई दिशा देना। इस कुंभ में देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, संस्कृत के विद्वानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी हिस्सा लिया, जिससे यह धार्मिक के साथ-साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण बौद्धिक मंच भी साबित हुआ। डॉ॰ मुन्ना कुमार शर्मा को ‘महर्षि पुरस्कार-2026’ मिलने की खबर के बाद अखिल भारत हिन्दू महासभा के देशव्यापी कार्यालयों में उत्सव का माहौल देखा गया। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और लखनऊ सहित देश के विभिन्न हिस्सों में कार्यकर्ताओं ने मिठाइयां बांटकर और पटाखे चलाकर अपनी खुशी का इजहार किया। हिन्दू महासभा के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि डॉ॰ शर्मा का यह सम्मान पूरी संस्था के लिए अत्यंत गौरव का क्षण है। उनके कुशल मार्गदर्शन में महासभा ने हाल के वर्षों में कई महत्वपूर्ण सामाजिक और धार्मिक सुधारों को गति दी है। इसके अलावा, विभिन्न धार्मिक संगठनों, संत समाज और राजनीतिक नेताओं ने भी डॉ॰ मुन्ना कुमार शर्मा को इस प्रतिष्ठित उपलब्धि के लिए बधाई और शुभकामनाएं संदेश भेजे हैं।




