बिहार के वैशाली जिले में गंगा नदी में एक दर्दनाक नाव हादसे में 13 बच्चों की डूबने से मौत हो गई है.

यह भीषण दुर्घटना मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 की रात करीब 8:30 बजे राघापुर थाना क्षेत्र के रामपुर श्यामचंद पंचायत के पास घटी. हादसे का शिकार हुए सभी मासूमों की उम्र 15 वर्ष या उससे कम थी. इस हृदयविदारक घटना पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गहरा दुख प्रकट किया है. केंद्र सरकार ने मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से 2-2 लाख रुपये और बिहार राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री राहत कोष से 4-4 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है, जिससे पीड़ित परिवारों को कुल मिलाकर 6 लाख रुपये की अनुग्रह राशि प्राप्त होगी. घटना के संबंध में मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वैशाली जिले के राघोपुर प्रखंड के अंतर्गत आने वाले रामपुर श्यामचंद गांव के करीब 20 बच्चे एक छोटी नाव पर सवार होकर गंगा नदी की एक उपधारा (ढाब) को पार कर रहे थे. ये सभी बच्चे पड़ोसी गांव में आयोजित एक सामाजिक भोज (मृत्यु भोज) में शामिल होने जा रहे थे. नाव जब बीच धारा में पहुंची, तभी अचानक वह असंतुलित होकर पलट गई. चूंकि नाव छोटी थी और उस पर क्षमता से अधिक लोग सवार थे, इसलिए असंतुलित होते ही वह पानी में समा गई. रात का समय होने के कारण चीख-पुकार मचने के बावजूद शुरुआती क्षणों में स्थानीय लोग स्थिति का सही आकलन नहीं कर पाए. हादसे की खबर मिलते ही वैशाली की जिला अधिकारी (DM) वर्षा सिंह और स्थानीय पुलिस प्रशासन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं. राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीम को भी फौरन रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए रवाना किया गया. स्थानीय गोताखोरों और प्रशासन की रातभर चली कड़ी मशक्कत के बाद नदी से कुल 13 बच्चों के शव बरामद किए गए.

इस रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान 7 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता मिली. नदी से बचाए गए इन सातों बच्चों को तुरंत इलाज के लिए पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (NMCH) में रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को फिलहाल स्थिर और खतरे से बाहर बताया है. लापता अन्य लोगों की आशंका को देखते हुए बुधवार सुबह भी एनडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों की मदद से तलाशी अभियान जारी रखा गया. इस हादसे की सबसे दुखद और झकझोर देने वाली बात यह रही कि जान गंवाने वाले 13 मासूमों में से 7 बच्चे एक ही परिवार के थे. रामपुर श्यामचंद गांव के निवासी रामप्रवेश राय (उर्फ राजा) के परिवार की 7 बच्चियां इस काल के गाल में समा गईं. इस घटना के बाद से पूरे गांव में कोहराम मचा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. गांव के किसी भी घर में बुधवार को चूल्हा नहीं जला और चारों तरफ सिर्फ चीखें सुनाई दे रही हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट कर इस घटना को अत्यंत पीड़ादायक बताया। उन्होंने लिखा
“बिहार के वैशाली में नाव पलटने की घटना में हुई जानमाल की हानि अत्यंत दुखद है। इस कठिन समय में मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। मैं सभी घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। स्थानीय प्रशासन प्रभावित लोगों की हरसंभव सहायता कर रहा है।”
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा जारी बयान के अनुसार, केंद्र सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी, जबकि घायलों के उपचार के लिए 50-50 हजार रुपये की सहायता मंजूर की गई है. वहीं, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी दुख जताते हुए कहा कि बिहार के वैशाली में बच्चों की असामयिक मृत्यु का समाचार अत्यंत हृदयविदारक है और वह शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती हैं.

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया. उन्होंने वैशाली जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि प्रभावित परिवारों को तत्काल हरसंभव सहायता पहुंचाई जाए और घायलों की चिकित्सा में कोई कमी न रहे. राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन नियमों के तहत तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रत्येक मृतक के परिवार के लिए 4-4 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की. दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और क्षेत्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भी इस हादसे पर दुख व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि घटना की सूचना मिलते ही उन्होंने जिला प्रशासन से बात कर राहत कार्यों में तेजी लाने का आग्रह किया था. उन्होंने सरकार से मांग की है कि ऐसे हादसों को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएं. इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर बिहार के दियारा क्षेत्रों में नदी परिवहन की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि रात के समय बिना किसी लाइफ जैकेट या सुरक्षा मानकों के छोटी नावों पर क्षमता से ज्यादा लोगों को बैठाया जाता है, जिस पर स्थानीय प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं है. आक्रोशित ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचीं जिला अधिकारी वर्षा सिंह के सामने नारेबाजी कर अपनी नाराजगी भी जाहिर की. प्रशासन ने अब इस मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं ताकि हादसे के असल कारणों और लापरवाही बरतने वालों की पहचान की जा सके.



