दीप से दीप जले निरन्तर यही पुकार हमारी,,,

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह सहज़,हरदा,मध्य प्रदेश

जगमग जगमग दीप जले, अंधियारा सारा भागे,

संस्कृति और आस्था के पावन बंधन जागे।

झिलमिल दीपों की माला से, सजी अयोध्या सारी,

आई रे आई,देखो सब दीपावली सुहानी आई।

तमसो मा ज्योतिर्गमय का, मंत्र गूँजता द्वारे,

अज्ञान अंधकार को चीरकर, प्रकाश दीप पुकारे।

मन के भीतर की कालिक को, आज मिटाना है,

प्रेम और विश्वास का दीपक,  दिलों में जलाना है।

सुख-समृद्धि की बहार है, खुशियों की शहनाई,

आई रे आई, देखो सब दीपावली सुहानी आई!

राम लौटे नगर अयोध्या, छाई छटा निराली,

मां लक्ष्मी-गणेश की पूजा, खुशियां पहुँची।

भेद-भाव के बंधन टूटे, अपना-पराया न छूटे,

स्नेह के इस पावन उत्सव पर, सबके मुँह से फूटे।

मिट्टी के इन नन्हे दीपों में, राष्ट्र की चेतना जागी,

पावन रोशनी से  जगमग जगमग करती धरती।

दीप से दीप जले निरन्तर यही पुकार हमारी,

खुशियों से रोशन हो जाए, दुनिया प्यारी प्यारी!

आई रे आई, देखो सब दीपावली सुहानी आई!

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