दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2026-27 का आधिकारिक बिगुल बज चुका है। दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, इस बार डूसू के केंद्रीय पैनल के लिए 18 सितंबर 2026 को मतदान होगा। छात्र राजनीति के इस महाकुंभ के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 10 सितंबर 2026 (दोपहर 3 बजे तक) रखी गई है, जिसके तुरंत बाद उम्मीदवारों के पर्चों की जांच की जाएगी। चुनावी मैदान से नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 11 सितंबर 2026 (दोपहर 12 बजे तक) है, जिसके बाद उसी दिन शाम 5 बजे अंतिम रूप से चुनाव लड़ने वाले महारथियों की फाइनल लिस्ट जारी कर दी जाएगी।

वोटों की गिनती और नतीजों की घोषणा 19 सितंबर 2026 को की जाएगी, जो यह तय करेगी कि कैंपस की कमान अगले एक साल के लिए किसके हाथों में होगी। इस बार करीब 1.40 लाख मतदाता दो शिफ्टों (सुबह 8:30 से दोपहर 1:00 बजे और दोपहर 3:00 से शाम 7:30 बजे) में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इस बार के चुनावी मुकाबले के लिए संगठनों ने अपनी आंतरिक स्क्रीनिंग तेज कर दी है। पिछले साल (2025) के चुनावों में ABVP ने अध्यक्ष (आर्यन मान), सचिव (कुणाल चौधरी) और संयुक्त सचिव (दीपिका झा) के पदों पर एकतरफा दबदबा बनाया था। ऐसे में इस बार भी भाजपा समर्थित ABVP अपनी इस विरासत को बचाने के लिए नए और ऊर्जावान चेहरों को उतारने की तैयारी में है। वहीं, कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI पिछले साल के नुकसान की भरपाई करने और अध्यक्ष पद पर वापसी के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रही है। NSUI इस बार जाट और गुर्जर बहुल वोट बैंक के साथ-साथ पूर्वांचल के छात्रों को साधने के लिए सोशल इंजीनियरिंग का सहारा ले रही है। वामपंथी मोर्चे में इस बार एक नया प्रयोग देखने को मिल रहा है, जहां AISA (ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन) और SFI (स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया) पहली बार एक संयुक्त प्रगतिशील मोर्चे के तहत चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे मुकाबला कई सीटों पर त्रिकोणीय हो गया है।

डूसू के मुख्य पैनल का रास्ता दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रमुख कॉलेजों के गलियारों से होकर गुजरता है। इस बार अलग-अलग कॉलेजों में माहौल बेहद विशिष्ट और दिलचस्प बना हुआ है।
हिंदू कॉलेज (Hindu College): इंफ्रास्ट्रक्चर और हॉस्टल का मुद्दा गरमाया
नॉर्थ कैंपस का दिल कहे जाने वाले हिंदू कॉलेज में इस समय वैचारिक बहस और छात्र सुविधाओं को लेकर माहौल बेहद गर्म है। यहां सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा हॉस्टल का निर्माण कार्य अधर में लटकना बना हुआ है। वामपंथी संगठन AISA और SFI के छात्र नेताओं ने हाल ही में आर्ट्स फैकल्टी के बाहर एक बड़ी ‘महापंचायत’ की, जिसमें उन्होंने तंज कसा कि “6 साल में बुर्ज खलीफा बन गया, लेकिन हिंदू कॉलेज का हॉस्टल अब तक पूरा नहीं हुआ”। इस मुद्दे पर NSUI भी आक्रामक है, जबकि ABVP प्रशासन से मिलकर जल्द समाधान का वादा कर छात्रों को रिझा रही है।
रामजस कॉलेज (Ramjas College): दबदबे और सुरक्षा की जंग
रामजस कॉलेज हमेशा से अपनी आक्रामक राजनीति और हाई-वोल्टेज प्रचार के लिए जाना जाता है। इस समय रामजस की सड़कों पर लग्जरी गाड़ियों के काफिले और पर्चों की बारिश साफ देखी जा सकती है। यहां मुख्य मुकाबला ABVP और NSUI के बीच सीधा है। रामजस में ‘कैंपस सिक्योरिटी’ और बाहरी तत्वों के प्रवेश को रोकने का मुद्दा सबसे ऊपर है। महिला सुरक्षा और कैंपस में शांति व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर दोनों ही दल छात्रों के बीच अपनी साख मजबूत करने में लगे हैं।
मिरांडा हाउस और दौलत राम कॉलेज: महिला सुरक्षा और फेस्ट रेगुलेशन
मिरांडा हाउस और दौलत राम जैसे प्रमुख महिला कॉलेजों में डूसू चुनाव का मिजाज थोड़ा अलग है। यहां बड़े-बड़े होर्डिंग्स के बजाय छोटे ग्रुप्स में संवाद (Class Campaigning) पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में कॉलेज फेस्ट (Fest) के दौरान हुई सुरक्षा चूकों को देखते हुए यहां की छात्राओं के लिए सबसे बड़ा मुद्दा ‘सुरक्षित और प्रतिबंधित कैंपस’ का है। वामपंथी गठबंधन (AISA-SFI) यहाँ महिला सशक्तिकरण और लोकतांत्रिक अधिकारों की बात कर रहा है, तो वहीं ABVP छात्राओं के लिए विशेष ‘सेल्फ डिफेंस’ विंग स्थापित करने और पूरे कैंपस को सीसीटीवी के दायरे में लाने का वादा कर रही है।
श्री वेंकटेश्वर और मोतीलाल नेहरू कॉलेज (साउथ कैंपस): परिवहन और मेट्रो पास की मांग
साउथ कैंपस के इन प्रमुख कॉलेजों में दिल्ली के दूर-दराज के इलाकों से आने वाले छात्रों की संख्या काफी अधिक है। इसलिए, यहाँ का चुनावी माहौल ‘मेट्रो किराए में रियायत’ और ‘रियायती बस पास’ जैसे मुद्दों के इर्द-गिर्द घूम रहा है। NSUI अपनी ‘वन रुपी थाली’ और मेट्रो पास के वादे के साथ साउथ कैंपस के छात्रों के बीच काफी पैठ बनाती दिख रही है, जबकि ABVP कॉलेज के भीतर नए हॉस्टल और आधुनिक लैब्स के निर्माण के नाम पर वोट मांग रही है।
इस बार के चुनाव पर दिल्ली हाई कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की पैनी नजर है। लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के तहत प्रत्येक उम्मीदवार के लिए चुनावी खर्च की सीमा ₹5,000 तय की गई है। इसके साथ ही, उम्मीदवारों के लिए 75% उपस्थिति अनिवार्य की गई है और कोई भी प्रत्याशी शैक्षिक बैकलाग (Pending Papers) के साथ चुनाव नहीं लड़ सकता। दिल्ली पुलिस ने भी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने (Defacement of Property) और दीवारों पर पोस्टर चिपकाने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। नॉर्थ कैंपस के पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, कैंपस के चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल तैनात हैं और किसी भी तरह के हुड़दंग या जबरन प्रचार करने वाले वाहनों को जब्त किया जा रहा है।
18 सितंबर को होने वाला यह मतदान सिर्फ यह तय नहीं करेगा कि डूसू का अगला अध्यक्ष कौन होगा, बल्कि यह देश के मूड और युवा राजनीति की दिशा का भी संकेत देगा। 10 सितंबर को नामांकन खत्म होने के बाद जब उम्मीदवारों की अंतिम सूची सामने आएगी, तब यह चुनावी जंग और भी तीखी और दिलचस्प होने की उम्मीद है। आम छात्रों के हाथ में इस बार यूनिवर्सिटी की दशा और दिशा बदलने की चाबी है।



