‘मास्टर प्लान 2047’ लैड-पुलिंग का रास्ता खोलने के लिए जल्दबाजी में लाया गया है – मुकेश शर्मा।

दिल्ली की मुख्यमंत्री के पूर्व संसदीय सचिव व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री मुकेश शर्मा ने आरोप लगाया कि ‘दिल्ली मास्टर प्लान 2047’ में दिल्ली के ग्रामीण, शहरीकृत गाँव व आम आदमी को फायदा पहुँचाने व उसे सुविधाएँ देने के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि यह मास्टर प्लान बड़े खिलाड़ियों के दबाव में लिया गया फैसला है और जल्दबाजी में इसे किया गया है जो कानून सम्मत भी नहीं है।

श्री शर्मा ने कहा कि पहले से ही प्रस्तावित मास्टर प्लान 2041 को जानबूझकर सुझाव मिलने के बाद भी लटकाया जा रहा था, और अब बिना जनता के सुझाव लिये  उस मास्टर प्लान को 2041 से 2047 करने का निर्णय करके तुगलकी फरमान जारी किया गया है, जो पूरी तरह जन-विरोधी हैं व जनता की जरूरतों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि अभी 2026 के जनगणना के आँकड़े आने का या तो इन्तजार किया जाए, नहीं तो यह कैसे सम्भव हो सकता है कि पुरानी जनगणना के आधार पर 2047 की योजना मास्टर प्लान में बना ली जाए? श्री शर्मा ने यह भी कहा कि दिल्ली के जिन लगभग 150 गाँवों को शहरीकृत घोषित किया गया है, उनमें अब कभी चकबन्दी हो ही नहीं सकती। श्री शर्मा ने यह भी कहा कि जिन गाँव को हरित जोन से निकालकर आर-जोन में किया गया है, उससे ग्रामीणों को क्या फायदा हुआ, इसका खुलासा होना चाहिए, और यदि नहीं हुआ है, तो जिनको फायदा हुआ है उनके नाम उजागर किये जायें।

श्री शर्मा ने याद दिलाया कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा जब दिल्ली में दुकानों, फैक्ट्रीयों व व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को सील करने के आदेश जारी किए गए थे, उस समय यू.पी.ए. शासन में तत्कालीन शहरी विकास राज्यमंत्री श्री अजय माकन ने मास्टर प्लान को संशोधित करके गेस्ट हाउसों, फैक्ट्रीयों, गोदामों आदि के अलावा 3500 सड़कों को व्यवसायिक घोषित करवाकर लाखों लोगों को उजड़ने से बचाया था। उन्होंने केन्द्र की भाजपा सरकार से पूछा कि इस नए मास्टर प्लान में आज तक जो लाखों दुकानें सैंकड़ों सड़कों पर खुल चुकी हैं, जिनमें दिल्ली की 1600 से ज्यादा अनाधिकृत कालोनियाँ भी शामिल हैं, उनको व्यवसायिक घोषित करने का प्रावधान क्यों नहीं किया गया? क्या सरकार फिर से किसी ऐसे आदेश का इन्तजार कर रही है? उन्होंने कहा कि यह जनता को उजाड़ने की जो तलवार लटकाई गई है, इसे तुरन्त हटाया जाए।

श्री मुकेश शर्मा ने कहा कि दिल्ली का चहुँमुखी विकास हो, सब इसके पक्षधर हैं, लेकिन दिल्ली की वर्तमान मूल आबादी को उसका लाभ मिलना चाहिए, यदि ऐसा नहीं होता है तो यह सीधे तौर पर बड़े खिलाड़ियों को फायदा पहुँचाने की योजना है। उन्होंने यह भी कहा कि मास्टर पलान में में हाई राईज बिल्डिंग का प्रावधान है, लेकिन गाँव के लाल डोरे में और स्वभाविक आबादी में हाई राईज बिल्डिंगें बनाने का कोई भी प्रावधान मास्टर प्लान 2047 में नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सुझाव 2041 मास्टर प्लान की ले लिए गए थे, जो पिछली जनगणना के आधार पर थे, यदि 2047 मास्टर प्लान लागू किया जा रहा है तो उससे पहले लोगों को सुझाव देने का समय दिया जाए।

श्री शर्मा ने यह भी कहा कि फार्म हाउसों का एफ.ए.आर. जिन शर्तों पर बढ़ाया गया है, जिसमें सड़कों की चैड़ाई भी शामिल है, लेकिन दिल्ली के ग्रामीणों को फायदा पहुँचाने के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि पूरा मास्टर प्लान में सिवाए ‘लैन्ड पुलिंग पोलिसी’ के माध्यम से बड़े खिलाड़ियों को फायदा पहुँचाने के अलावा और कुछ भी नहीं है। श्री शर्मा ने कहा कि दिल्ली की जनता में इस मुद्दे को लेकर भारी रोष है और उन्होंने फिर दोहराया कि मास्टर प्लान 2047 के लिए सुझाव माँगकर जनता की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

श्री मुकेश शर्मा ने दिल्ली के सभी सांसदों व विधायकों के साथ साथ जन-प्रतिनिधियों से आग्रह किया है कि वे इस मुद्दे पर राजनैतिक भावना से ऊपर उठकर, दिल्ली के लोगों की आवाज उठाएँ, नहीं तो जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि यह दिल्ली है सब जानती है, वो बड़े खिलाड़ी कौन हैं, वो किसी से छिपा नहीं है, और इसका खुलासा बहुत जल्द होगा।

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