डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह सहज़, हरदा, मध्य प्रदेश

आसमान में घिरे काले-घने बादल, ठंडी हवाओं के झोंके और सोंधी खुशबू के साथ जब बारिश की बूंदें धरती पर उतरती हैं, तो पूरा वातावरण जीवंत हो उठता है। बारिश का मौसम केवल मौसम में बदलाव नहीं है, बल्कि यह भावनाओं, कविताओं और प्रकृति के उत्सव का दूसरा नाम है। जब बाहर मूसलाधार बारिश हो रही हो, तो यह समय थम सा जाता है और मन किसी अनजाने सुकून में डूब जाता है।
प्रकृति का कायापलट और हरियाली की चादर,,,
गर्मी की तपिश से झुलस चुकी धरती को जब सावन की पहली फुहार मिलती है, तो वह पुनर्जीवित हो उठती है। पेड़-पौधों के पत्तों पर जमी धूल धुल जाती है और वे चमक उठते हैं। सूखी घास और बंजर ज़मीन पर हरियाली की एक लंबी चादर बिछ जाती है। मिट्टी से उठने वाली ‘सोंधी ख़ुशबू’ इस मौसम का सबसे जादुई अहसास होती है, जो सांसों में भरते ही रूह को तरोताज़ा कर देती है।
ठहर सा जाता है जीवन का शोर,,,
बारिश के दिनों में शहर की भागदौड़ भरी रफ़्तार कुछ पल के लिए धीमी पड़ जाती है। खिड़की के पास बैठकर गिरती हुई बूंदों को देखना, चाय की गरम चुस्की लेना और बारिश की रिमझिम धुन सुनना,अपने आप में एक मेडिटेशन जैसा अनुभव है। यह मौसम हमें अपनी व्यस्त ज़िंदगी से थोड़ा वक्त निकालकर ख़ुद के साथ जुड़ने का मौक़ा देता है। पुराने दिनों की यादें ताजा हो जाती हैं और मन में अनजाने ही कल्पनाओं के नए पंख लग जाते हैं।
सृजन और भावनाओं का मिलन,,
साहित्यकारों, कवियों और प्रेमियों के लिए बारिश हमेशा से प्रेरणा का स्रोत रही है। रिमझिम फुहारों के बीच बैठकर लिखना, पढ़ना या संगीत सुनना इस मौसम के सबसे खूबसूरत पहलू हैं। बारिश केवल प्रकृति की प्यास नहीं बुझाती, बल्कि यह इंसानी मन के भीतर दबी संवेदनाओं और भावनाओं को भी सींचती है।
बारिश का यह मौसम हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी तपी हुई धूप (कठिनाइयाँ) क्यों न आएं, एक न एक दिन राहत की फुहारें जरूर बरसती हैं। यह हर अंत के बाद एक नई शुरुआत का संदेश देता है। तो इस ख़ूबसूरत बारिश में, खिड़की से बाहर देखिए, प्रकृति के इस अद्भुत रूप को महसूस कीजिए और अपने भीतर के लेखक या कलाकार को थोड़ा सा वक्त दीजिए।




