ग़ज़ल, ख़त आया है उसका मैं भी अब जवाब लिखूंगा,,

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह ‘सहज़’, हरदा, मध्य प्रदेश

​ख़त आया है उसका मैं भी अब जवाब लिखूंगा।
घटा ज़ुल्फों को और लबों को गुलाब लिखू दूंगा।

​उसने सवाल लिख लिखकर जवाब मांगा है।
हर जवाब में मैं भी एक एक सवाल लिख दूंगा।

​सवाने हयात मैं जब भी अपनी दोस्त लिखूंगा।
ग़मों का अपने मैं भी हिसाब साफ़ साफ़ लिख दूंगा।

​कई चेहरे कई जलवे इन आँखों ने मेरी देखें हैं।
झील सी आँखें हैं उसकी और शबाब लिखूंगा।

​पहली नज़र ही उसकी मदहोश कर गई मुश्ताक़।
मैं उसकी आंखों को यारों मैं शराब लिख दूंगा।

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