रितेश सिन्हा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का पश्चिम बंगाल दौरा केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की पूर्वी सीमा सुरक्षा, उत्तर-पूर्व की सामरिक जीवनरेखा और बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य के बीच केंद्र सरकार की दीर्घकालिक रणनीति का स्पष्ट संकेत है।

उत्तर बंगाल से लेकर भारत-बांग्लादेश सीमा तक उनके कार्यक्रमों को यदि एक साथ देखा जाए तो यह स्पष्ट होता है कि केंद्र सरकार अब पश्चिम बंगाल को केवल एक सीमावर्ती राज्य नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा की सबसे महत्वपूर्ण सामरिक ढाल के रूप में देख रही है। दौरे के दौरान अमित शाह ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के उत्तर बंगाल सीमांत की 18वीं वाहिनी की जुमागाछ सीमा चौकी पहुंचकर वॉच टावर से अंतरराष्ट्रीय सीमा की निगरानी व्यवस्था का अवलोकन किया। उन्होंने जवानों से बातचीत की और आधुनिक सीमा सुरक्षा प्रणाली की समीक्षा की। इसके बाद उनका वक्तव्य पूरे दौरे का सबसे महत्वपूर्ण संदेश बनकर उभरा—”जो सिलीगुड़ी कॉरिडोर पहले की सरकारों में घुसपैठ का गलियारा बन गया था, वह अब सुरक्षित सीमा का पर्याय बन रहा है।”

यह बयान केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि सीमा सुरक्षा की बदलती अवधारणा का संकेत भी है। पिछले एक दशक में भारत ने अपनी पूर्वी सीमाओं की सुरक्षा को नई तकनीकों और आधुनिक संसाधनों से सशक्त करने की दिशा में तेज़ी से काम किया है। आधुनिक वॉच टावर, स्मार्ट फेंसिंग, थर्मल इमेजर, उच्च क्षमता वाले कैमरे, ड्रोन निगरानी, सेंसर आधारित सुरक्षा प्रणाली और वास्तविक समय में निगरानी करने वाली एकीकृत कमांड व्यवस्था ने सीमा सुरक्षा को नई मजबूती दी है। इस पूरे दौरे का केंद्र बिंदु रहा सिलीगुड़ी गलियारा, जिसे ‘चिकन नेक’ कहा जाता है। लगभग 22 किलोमीटर चौड़ा यह संकरा भूभाग सातों उत्तर-पूर्वी राज्यों को देश के शेष हिस्से से जोड़ने वाली जीवनरेखा है। इसके एक ओर नेपाल, दूसरी ओर बांग्लादेश, निकट में भूटान और कुछ दूरी पर चीन स्थित है। यही कारण है कि भारतीय सेना, बीएसएफ और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां इसे देश का सबसे संवेदनशील सामरिक क्षेत्र मानती हैं। युद्ध, प्राकृतिक आपदा या किसी भी बड़े सुरक्षा संकट की स्थिति में भारतीय सेना की रसद, सैन्य उपकरण, ईंधन, रेल और सड़क संपर्क का बड़ा हिस्सा इसी गलियारे पर निर्भर करता है।
लेकिन अमित शाह का संदेश केवल ‘चिकन नेक’ तक सीमित नहीं था। उनका पूरा दौरा यह संकेत देता है कि अब चिकन नेक के अंतर्गत आने वाले पूरे सामरिक क्षेत्र तथा पश्चिम बंगाल की संपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सीमा पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को एकीकृत रूप से मजबूत किया जा रहा है। उत्तर बंगाल के सीमावर्ती जिले, सीमा चौकियां, संवेदनशील सड़क और रेल मार्ग, सीमावर्ती गांव तथा भारत-बांग्लादेश सीमा के महत्वपूर्ण हिस्से अब सुरक्षा एजेंसियों की विशेष निगरानी में हैं। उद्देश्य केवल अवैध घुसपैठ रोकना नहीं, बल्कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि का शुरुआती स्तर पर पता लगाकर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना है। पिछले कुछ वर्षों में सीमा सुरक्षा के सामने चुनौतियों का स्वरूप भी बदल गया है। अब खतरा केवल अवैध घुसपैठ तक सीमित नहीं है। मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, नकली भारतीय मुद्रा, ड्रोन के माध्यम से हथियारों की आपूर्ति, संगठित अपराध और सीमा पार सक्रिय नेटवर्क जैसी चुनौतियां लगातार जटिल होती जा रही हैं। ऐसे में सीमा सुरक्षा बल, खुफिया एजेंसियों और अन्य केंद्रीय सुरक्षा बलों के बीच समन्वय को पहले से कहीं अधिक मजबूत बनाया जा रहा है।
भारत-बांग्लादेश सीमा का बड़ा हिस्सा पश्चिम बंगाल से होकर गुजरता है। इसलिए इस सीमा की सुरक्षा का सीधा संबंध केवल राज्य की कानून-व्यवस्था से नहीं, बल्कि पूरे देश की आंतरिक सुरक्षा से है। बदलते क्षेत्रीय घटनाक्रमों और पड़ोसी देशों की परिस्थितियों को देखते हुए भारत ने पूर्वी सीमा पर निगरानी, खुफिया तंत्र और तकनीकी क्षमता को लगातार सुदृढ़ किया है। अमित शाह का दौरा इसी व्यापक रणनीति का प्रत्यक्ष संकेत माना जा रहा है। मोदी सरकार की सीमा सुरक्षा नीति केवल सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे का विकास, आधुनिक तकनीक का उपयोग, त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली, सीमा चौकियों का उन्नयन और स्थानीय आबादी के साथ बेहतर समन्वय को भी समान महत्व दिया गया है। गृह मंत्री ने स्वयं कहा कि सरकार ने न केवल वॉच टावरों की संख्या बढ़ाई है, बल्कि उन्हें अत्याधुनिक तकनीक से लैस कर सीमा सुरक्षा को और अधिक मजबूत तथा अभेद्य बनाया है।
सुरक्षा विशेषज्ञ लंबे समय से कहते रहे हैं कि यदि सिलीगुड़ी गलियारा सुरक्षित है तो उत्तर-पूर्व भारत सुरक्षित है। यही कारण है कि अब ‘चिकन नेक’ को भारत की सबसे बड़ी सामरिक चुनौती नहीं, बल्कि सबसे मजबूत सामरिक शक्ति में बदलने का प्रयास किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक, मजबूत खुफिया तंत्र, प्रशिक्षित सुरक्षा बल और स्पष्ट राजनीतिक इच्छाशक्ति के माध्यम से इस क्षेत्र को अभेद्य सुरक्षा कवच प्रदान करने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। अमित शाह का पश्चिम बंगाल दौरा इस दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है कि यह केवल वर्तमान सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा नहीं, बल्कि भविष्य की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति की दिशा भी निर्धारित करता है। यह संदेश स्पष्ट है कि भारत अब अपनी पूर्वी सीमाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है और पश्चिम बंगाल इस रणनीति का केंद्रीय स्तंभ है।
स्पष्ट है कि केंद्र सरकार की दृष्टि अब केवल सिलीगुड़ी कॉरिडोर तक सीमित नहीं है। पूरे पश्चिम बंगाल के सामरिक भूभाग, भारत-बांग्लादेश सीमा, सीमावर्ती जिलों और ‘चिकन नेक’ के अंतर्गत आने वाले प्रत्येक संवेदनशील क्षेत्र पर सुरक्षा एजेंसियों की पैनी निगाह है। यह दौरा बताता है कि भारत अपनी सीमाओं की रक्षा केवल वर्तमान चुनौतियों के लिए नहीं, बल्कि भविष्य के संभावित सुरक्षा खतरों को ध्यान में रखकर कर रहा है।
पूर्वी सीमा की सुरक्षा, उत्तर-पूर्व की निर्बाध संपर्क व्यवस्था और राष्ट्रीय अखंडता को सुदृढ़ बनाए रखने का संकल्प ही अमित शाह के इस पूरे बंगाल दौरे का सबसे बड़ा संदेश है। भारत की सुरक्षा नीति अब स्पष्ट है—सीमा पर चौकसी, तकनीक में बढ़त, त्वरित प्रतिक्रिया और सामरिक तैयारी के माध्यम से ‘चिकन नेक’ सहित पूरे पूर्वी मोर्चे को अभेद्य सुरक्षा कवच प्रदान करना।

